मुख्य तथ्य
- अध्ययन के नेता
- स्वास्थ्य मंत्रालय के डॉ. पवन कुमार और डॉ. कपिल सिंह
- टीके की प्रकृति
- छह-में-एक संयोजन टीका
- सुरक्षा प्रदान करने वाली बीमारियां
- डिप्थीरिया, टेटनस, पर्टुसिस, हेपेटाइटिस बी, हिब और पोलियो
- वार्षिक टीकाकरण
- लगभग 26 मिलियन शिशु
- मूल्य में कमी का अनुमान
- 50 प्रतिशत
पृष्ठभूमि
भारत का सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) देश में शिशुओं को कई गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए नियमित टीकाकरण सत्र आयोजित करता है। वर्तमान में, शिशुओं को टीकाकरण के दौरान कई अलग-अलग टीके लगाए जाते हैं, जिससे उन्हें कई इंजेक्शन लगते हैं। इससे देखभाल करने वालों का समय भी अधिक लगता है और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं पर कार्यभार बढ़ता है।
हेक्सावेलेंट टीका एक छह-में-एक संयोजन टीका है जो एक ही खुराक में छह गंभीर बीमारियों—डिप्थीरिया, टेटनस, पर्टुसिस, हेपेटाइटिस बी, हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी (हिब) और पोलियो—से सुरक्षा प्रदान करता है। कई टीकों को एक में मिलाकर, यह नियमित टीकाकरण के दौरान शिशुओं को लगने वाले इंजेक्शनों की संख्या को कम करता है।
वर्तमान स्थिति
इस अध्ययन का नेतृत्व स्वास्थ्य मंत्रालय के डॉ. पवन कुमार और डॉ. कपिल सिंह ने किया, जिसमें जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ इंडिया की डॉ. सुस्मिता चटर्जी, गेट्स फाउंडेशन के डॉ. अरिंदम रे और डॉ. अमृता कुमारी, गावी के डॉ. होमेरो हर्नांडेज़ और जॉन स्नो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के डॉ. अरूप देब रॉय शामिल थे। अध्ययन में पाया गया कि भारत के यूआईपी में हेक्सावेलेंट टीका शामिल करने से देश के बाल टीकाकरण कार्यक्रम की दक्षता में सुधार हो सकता है।
भारत में हर साल लगभग 26 मिलियन शिशुओं का टीकाकरण किया जाता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि हेक्सावेलेंट टीके की कीमत समग्र कार्यक्रम लागत का सबसे बड़ा निर्धारक है। भारत में टीका खरीद के ऐतिहासिक रुझानों के आधार पर, अध्ययन का अनुमान है कि टीके की कीमत में 50 प्रतिशत की कमी से परिचालन और प्रणाली-स्तर की बचत, प्राथमिक टीकाकरण अनुसूची के तहत अतिरिक्त टीका अधिग्रहण लागत से अधिक हो सकती है।
| लाभ | विवरण |
|---|---|
| इंजेक्शन की संख्या | कम |
| कोल्ड-चेन आवश्यकता | कम |
| सीरिंज और आपूर्ति | कम उपयोग |
| एएनएम का समय | कम |
| देखभाल करने वालों का समय | बचत |
संभावित प्रभाव
शोध से पता चलता है कि हेक्सावेलेंट टीका शुरू करने से कई लाभ हो सकते हैं, जिनमें कोल्ड-चेन भंडारण की आवश्यकता कम होना और सीरिंज तथा अन्य टीकाकरण आपूर्ति का कम उपयोग शामिल है। इससे सहायक नर्स मिडवाइव्स (एएनएम) को टीके लगाने और रिकॉर्ड बनाए रखने में लगने वाला समय भी कम होगा।
इससे शिशुओं को लगने वाले इंजेक्शनों की संख्या घटेगी, जिससे देखभाल करने वालों का समय बचेगा और स्वास्थ्य कर्मियों पर दबाव कम होगा। हालांकि, टीके की अग्रिम खरीद लागत अधिक है, लेकिन अध्ययन के अनुसार, यह दक्षता में सुधार करके इन लागतों की भरपाई कर सकता है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि टीके की कीमत में 50 प्रतिशत की कमी आती है, तो परिचालन बचत अतिरिक्त लागत से अधिक हो सकती है, जिससे यह कार्यक्रम के लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य हो सकता है। हालांकि, यदि कीमत में कमी नहीं होती है, तो उच्च अग्रिम लागत एक बाधा बनी रह सकती है।
अध्ययन के निष्कर्ष नीति निर्माताओं को भारत के टीकाकरण कार्यक्रम को मजबूत करने के लिए भविष्य की नीति चर्चाओं में आर्थिक साक्ष्य प्रदान करते हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार कब या किस रूप में हेक्सावेलेंट टीके को शामिल करने पर विचार करेगी, लेकिन यदि ऐसा होता है, तो इससे टीकाकरण प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक और कुशल हो सकती है।
स्रोत: tribuneindia.com



