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असम-मेघालय सीमा पर हाथियों के सह-अस्तित्व के लिए जागरूकता कार्यक्रम

नागुआपारा में आयोजित कार्यक्रम में सीमावर्ती गांवों के लोगों ने हाथी प्रबंधन में अंतर-राज्य समन्वय बढ़ाने की मांग की।

मुख्य तथ्य

आयोजन तिथि
1 अगस्त
स्थान
नागुआपारा उच्च प्राथमिक विद्यालय, पश्चिम गारो हिल्स, मेघालय
आयोजक
अरन्याक, लखीपुर वन रेंज (असम), वन्यजीव संरक्षण रेंज (मेघालय)
प्रतिभागी
लगभग 50 (किसान, शिक्षक, नोकमा)
समुदाय
राभा और गारो

पृष्ठभूमि

असम के गोलपारा और मेघालय के पश्चिम गारो हिल्स (डब्ल्यूजीएच) की सीमा पर जंगली हाथियों के झुंड विचरण करते हैं। ये हाथी दोनों राज्यों की भौगोलिक सीमा को नहीं पहचानते, जिससे मानव-हाथी संघर्ष (एचईसी) की स्थिति बनी रहती है।

इस समस्या के समाधान के लिए दोनों राज्यों के वन विभागों और स्थानीय समुदायों के बीच समन्वय आवश्यक है। इसी उद्देश्य से 1 अगस्त को नागुआपारा गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

वर्तमान स्थिति

कार्यक्रम का आयोजन अरन्याक के तत्वावधान में असम वन विभाग के लखीपुर वन रेंज और मेघालय वन विभाग के वन्यजीव संरक्षण रेंज, पश्चिम गारो हिल्स के सहयोग से किया गया। इसमें सीमा के दोनों ओर के गांवों के लोगों ने भाग लिया।

नागुआपारा गांव में राभा और गारो समुदाय के लोग रहते हैं, जो लंबे समय से मानव-हाथी संघर्ष का सामना कर रहे हैं। कार्यक्रम में लगभग 50 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें किसान, शिक्षक और नोकमा (पारंपरिक प्रमुख) शामिल थे।

प्रतिभागी गांवों की सूची
गांव का नाम राज्य
नागुआपारामेघालय
खासियापारामेघालय/असम
गनारुग्रेमेघालय/असम
कालापारामेघालय/असम
मौरियापारामेघालय/असम
बेसोरकोनामेघालय/असम
जॉयरामकुचीमेघालय/असम
मेधीपारा पार्ट-IIमेघालय/असम
कासुबारीमेघालय/असम
स्रोत के अनुसार, कुछ गांव मेघालय और असम दोनों से संबंधित हैं, लेकिन सटीक राज्य स्पष्ट नहीं है।

प्रभाव

मेघालय की ओर के ग्रामीणों ने असम वन विभाग से सीमावर्ती गांवों के पास हाथियों के गश्त के दौरान त्वरित सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। दोनों राज्यों के प्रतिभागियों ने एचईसी को कम करने के लिए आपसी समन्वय बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की।

इस कार्यक्रम से स्थानीय समुदायों में हाथियों के साथ सह-अस्तित्व के प्रति जागरूकता बढ़ने की संभावना है। साथ ही, दोनों राज्यों के वन विभागों के बीच बेहतर तालमेल से संघर्ष की घटनाओं में कमी आ सकती है।

भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि दोनों राज्यों के वन विभाग नियमित रूप से संयुक्त गश्त और सूचना साझा करते हैं, तो हाथियों के आवागमन पर निगरानी बेहतर हो सकती है और संघर्ष की घटनाओं में कमी आ सकती है।

स्थानीय समुदायों के सहयोग से हाथियों के व्यवहार की जानकारी साझा करने से चेतावनी प्रणाली मजबूत हो सकती है। हालांकि, इसके लिए दीर्घकालिक प्रयास और दोनों राज्यों की सरकारों की प्रतिबद्धता आवश्यक है।

यदि जागरूकता कार्यक्रमों को नियमित रूप से आयोजित किया जाता है, तो समुदायों में सह-अस्तित्व की भावना विकसित हो सकती है, लेकिन इसका ठोस परिणाम तभी दिखेगा जब सभी हितधारक मिलकर काम करेंगे।

स्रोत: theshillongtimes.com

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