मुख्य तथ्य
- गवर्नर
- संजय मल्होत्रा
- मुद्रास्फीति लक्ष्य
- 4% (मध्यम अवधि)
- CRR/SLR छूट
- FCNR (B) जमा पर दी जाएगी
- ECB/FCNR विंडो
- 3-4 महीने
- मीडिया प्रतिभागी
- 25
पृष्ठभूमि
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 5 जून, 2026 को वित्तीय वर्ष 2026-27 की दूसरी मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया। इस सम्मेलन में गवर्नर संजय मल्होत्रा के साथ डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे, डॉ. पूनम गुप्ता, श्री शिरीष चंद्र मुर्मू और पहली बार श्री रोहित जैन शामिल हुए। कार्यकारी निदेशक डॉ. अजित रत्नाकर जोशी, संजय कुमार हांसदा और इंद्रनील भट्टाचार्य भी उपस्थित थे।
संवाददाता सम्मेलन की शुरुआत में मुख्य महाप्रबंधक बृज राज ने मीडिया प्रतिभागियों से एक प्रश्न पूछने का अनुरोध किया और लाइव प्रसारण के दौरान माइक चालू रखने की अपील की। इस अवसर पर 25 मीडिया प्रतिभागी उपस्थित थे।
वर्तमान स्थिति
CNBC-TV18 की लता वेंकटेश ने ECB और FCNR योजना के विवरण के बारे में पूछा। उन्होंने पूछा कि क्या FCNR जमा को CRR और SLR से छूट दी जाएगी और बैंकों को ग्राहकों को FCNR जुटाने के लिए ऋण देने की अनुमति होगी। गवर्नर ने कहा कि विवरण जल्द ही जारी किए जाएंगे, लेकिन CRR और SLR से छूट निश्चित रूप से दी जाएगी। अन्य नियामक प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं होगा।
गवर्नर ने कहा कि RBI किसी विशेष राशि को लक्षित नहीं कर रहा है, लेकिन ECB और FCNR (B) जमा के लिए तीन से चार महीने की छोटी अवधि में स्वस्थ प्रवाह की उम्मीद है। उन्होंने इक्विटी और सरकारी बॉंड के लिए अन्य उपायों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन सभी उपायों से चालू वित्त वर्ष में भुगतान संतुलन (BoP) पहले की तुलना में बेहतर रहने की संभावना है।
| विवरण | मान |
|---|---|
| मीडिया प्रतिभागियों की संख्या | 25 |
| ECB/FCNR विंडो अवधि | 3-4 महीने |
| मुद्रास्फीति लक्ष्य | 4% |
प्रभाव
ECB और FCNR योजनाओं से विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ने की उम्मीद है, जिससे रुपये की विनिमय दर स्थिर रह सकती है और भुगतान संतुलन मजबूत हो सकता है। बैंकों को CRR और SLR से छूट मिलने से उनकी उधार देने की क्षमता बढ़ सकती है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
गवर्नर ने स्पष्ट किया कि 4% मुद्रास्फीति लक्ष्य को स्थगित नहीं किया गया है। यह लक्ष्य सरकार द्वारा निर्धारित है और मध्यम अवधि में इसे हासिल करना है। उन्होंने कहा कि छोटे या बड़े उतार-चढ़ाव पर तुरंत प्रतिक्रिया देना उचित नहीं है। इससे नीति निर्माताओं को विकास और मुद्रास्फीति के बीच संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है।
भविष्य की संभावनाएँ
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि ECB और FCNR योजनाओं के तहत अपेक्षित प्रवाह आते हैं, तो चालू वित्त वर्ष में भुगतान संतुलन में सुधार हो सकता है। हालांकि, यदि वैश्विक आर्थिक स्थिति खराब होती है, तो प्रवाह प्रभावित हो सकता है। RBI ने कहा है कि वह किसी विशेष राशि को लक्षित नहीं कर रहा है, इसलिए वास्तविक प्रवाह अलग हो सकता है।
मुद्रास्फीति के 4% लक्ष्य को मध्यम अवधि में हासिल करने की संभावना है, लेकिन यह वैश्विक कीमतों और घरेलू आपूर्ति पर निर्भर करेगा। यदि मुद्रास्फीति लगातार उच्च बनी रहती है, तो RBI को कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं, जिससे विकास प्रभावित हो सकता है। फिलहाल, RBI का रुख विकास को समर्थन देने का है।
स्रोत: Reserve Bank of India



