मुख्य तथ्य
- आयोजन
- अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस सप्ताह का उद्घाटन, कोच्चि, केरल, 22 जून 2026
- वैश्विक योगदान
- 90% व्यवसाय, 50% वैश्विक रोजगार
- भारत में योगदान
- 31% GDP, 35% विनिर्माण उत्पादन, लगभग आधा निर्यात, 32 करोड़+ लोगों की आजीविका
- संपार्श्विक-मुक्त ऋण सीमा
- ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख, ₹25 लाख तक संभव
- अकाउंट एग्रीगेटर ऋण
- ₹3.5 लाख करोड़ (FY 2025-26)
- नया नियम
- फ्लोटिंग-रेट ऋणों पर पूर्व-भुगतान शुल्क पर प्रतिबंध
पृष्ठभूमि
भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर ने 22 जून 2026 को कोच्चि, केरल में अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस (27 जून) के सप्ताह भर चलने वाले समारोह का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने एमएसएमई क्षेत्र के वैश्विक और घरेलू महत्व पर प्रकाश डाला।
गवर्नर ने बताया कि वैश्विक स्तर पर एमएसएमई 90 प्रतिशत व्यवसायों का निर्माण करते हैं और कुल वैश्विक रोजगार में लगभग 50 प्रतिशत का योगदान देते हैं। भारत में, एमएसएमई सामूहिक रूप से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 31 प्रतिशत, विनिर्माण उत्पादन का लगभग 35 प्रतिशत और भारत के व्यापारिक निर्यात का लगभग आधा हिस्सा योगदान करते हैं, साथ ही 32 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका को सहारा देते हैं।
गवर्नर ने कोच्चि की व्यावसायिक परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि यह शहर सदियों से मसाला व्यापार का केंद्र रहा है, और आज यह पर्यटन, आयुर्वेद, आईटी, समुद्री खाद्य प्रसंस्करण और स्टार्ट-अप जैसे क्षेत्रों में एमएसएमई की भावना को आगे बढ़ा रहा है।
वर्तमान स्थिति
गवर्नर ने एमएसएमई के लिए वित्त तक पहुंच बढ़ाने में सहायक आठ नियामक उपायों की सूची दी। पहला, प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग (पीएसएल) वर्गीकरण सभी एमएसएमई ऋणों को कवर करता है, जिसमें सूक्ष्म उद्यमों के लिए समर्पित उप-लक्ष्य है।
दूसरा, बैंकों को एमएसई के लिए छोटी राशि के संपार्श्विक-मुक्त ऋण देने का निर्देश दिया गया है। संपार्श्विक-मुक्त ऋण की सीमा हाल ही में ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख कर दी गई है, जिसे सुसंगत वित्तीय ट्रैक रिकॉर्ड वाले व्यवसायों के लिए ₹25 लाख तक बढ़ाया जा सकता है।
तीसरा, क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (सीजीटीएमएसई) के माध्यम से गारंटी कवर का विस्तार किया गया है, और सीजीटीएमएसई-गारंटी वाले हिस्से पर शून्य जोखिम भार से बैंकों को प्रोत्साहन मिलता है। चौथा, ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (टीआरईडीएस) सक्षम किया गया है, जिससे एमएसएमई अपने प्राप्य को तुरंत नकदी में बदल सकते हैं।
| विवरण | मान |
|---|---|
| वैश्विक व्यवसायों में हिस्सा | 90% |
| वैश्विक रोजगार में हिस्सा | 50% |
| भारत के GDP में हिस्सा | 31% |
| विनिर्माण उत्पादन में हिस्सा | 35% |
| व्यापारिक निर्यात में हिस्सा | लगभग आधा |
| आजीविका | 32 करोड़ से अधिक लोग |
| संपार्श्विक-मुक्त ऋण सीमा (पहले) | ₹10 लाख |
| संपार्श्विक-मुक्त ऋण सीमा (अब) | ₹20 लाख |
| संपार्श्विक-मुक्त ऋण सीमा (अधिकतम) | ₹25 लाख |
| अकाउंट एग्रीगेटर से ऋण (FY 2025-26) | ₹3.5 लाख करोड़ |
प्रभाव
पांचवां, एमएसई के लिए सरलीकृत कार्यशील पूंजी मानदंड से वित्त प्राप्त करना आसान हुआ है। छठा, एनबीएफसी ऑन-लेंडिंग और सह-लेंडिंग व्यवस्थाओं को पीएसएल मान्यता मिलने से एमएसएमई के लिए ऋण पहुंच के संस्थागत चैनल व्यापक हुए हैं।
सातवां, अकाउंट एग्रीगेटर ढांचे ने वित्त वर्ष 2025-26 में ₹3.5 लाख करोड़ का ऋण सुगम बनाया है। आठवां, हाल ही में वाणिज्यिक बैंकों को व्यक्तियों और एमएसई को दिए गए फ्लोटिंग-रेट ऋणों पर पूर्व-भुगतान शुल्क लगाने से प्रतिबंधित किया गया है।
इन उपायों से एमएसएमई, विशेष रूप से सूक्ष्म उद्यमों को ऋण तक बेहतर पहुंच मिलने की संभावना है, जिससे उनकी वृद्धि और रोजगार सृजन को बल मिलेगा। हालांकि, इन पहलों का पूर्ण प्रभाव समय के साथ देखा जा सकेगा।
भविष्य की संभावनाएँ
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
गवर्नर ने एमएसएमई को टीआरईडीएस पर पंजीकरण करने और अपने खरीदारों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। यदि अधिक एमएसएमई टीआरईडीएस से जुड़ते हैं, तो उन्हें अपने प्राप्य के त्वरित नकदीकरण से लाभ हो सकता है।
अकाउंट एग्रीगेटर ढांचे की क्षमता को देखते हुए, यदि इसका विस्तार होता है, तो एमएसएमई ऋण में और वृद्धि हो सकती है। हालांकि, यह अनिश्चित है कि ये पहल किस गति से आगे बढ़ेंगी।
यदि सीजीटीएमएसई गारंटी कवर का विस्तार जारी रहता है, तो बैंक अधिक संपार्श्विक-रहित ऋण दे सकते हैं। लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव बैंकों की भागीदारी और आर्थिक स्थितियों पर निर्भर करेगा।
स्रोत: Reserve Bank of India
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भारत में एमएसएमई का योगदान
निर्यात50 प्रतिशत
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| श्रेणी | हिस्सा |
|---|---|
| जीडीपी | 31 प्रतिशत |
| विनिर्माण उत्पादन | 35 प्रतिशत |
| निर्यात | 50 प्रतिशत |
स्रोत:आरबीआई गवर्नर का भाषण, 22 जून 2026 स्रोत-समर्थित



