मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 370 हटने के बाद
- सात साल
- पीओजेके में घेराबंदी की तारीख
- 5 जून 2026
- गोलीबारी की तारीखें
- 31 जुलाई और 1 अगस्त
- विरोध स्थल
- मुजफ्फराबाद
- बयान देने वाले
- तस्लीमा अख्तर और सरदार नासिर अज़ीज़ खान
पृष्ठभूमि
अनुच्छेद 370 हटाए जाने के सात साल बाद जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) की स्थितियों में विरोधाभास देखने को मिल रहा है। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में अधिक स्थिरता और विकास का दावा किया जा रहा है, जबकि पीओजेके में अशांति, प्रतिबंधों और सार्वजनिक विरोध की शिकायतें सामने आ रही हैं।
यह रिपोर्ट कलकत्तान्यूज़.नेट पर प्रकाशित एएनआई की खबर पर आधारित है, जिसमें जम्मू-कश्मीर की मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लीमा अख्तर और यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) के प्रवक्ता सरदार नासिर अज़ीज़ खान के बयानों का हवाला दिया गया है।
वर्तमान स्थिति
जम्मू-कश्मीर की मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लीमा अख्तर ने कहा कि अगस्त 2019 के संवैधानिक बदलावों के बाद केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा माहौल में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने कहा, 'अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में शांतिपूर्ण माहौल देखने को मिला है, और हम इस शांति को बनाए रखना चाहते हैं।'
अख्तर ने दावा किया कि भारत सरकार के फैसले से स्थानीय आतंकवाद, अलगाववादी गतिविधियों और पत्थरबाजी की घटनाओं पर अंकुश लगा है, जिससे लोग बिना किसी डर के सामान्य जीवन जी पा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'भारत सरकार का सबसे बड़ा फैसला जम्मू-कश्मीर के युवाओं की जान बचाना था। पत्थरबाजी और स्थानीय आतंकवाद की व्यवस्था को कुचल दिया गया है।'
इसके विपरीत, यूकेपीएनपी के प्रवक्ता सरदार नासिर अज़ीज़ खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए कई पोस्ट में आरोप लगाया कि पीओजेके 5 जून 2026 से घेराबंदी, नाकाबंदी और संचार ब्लैकआउट का सामना कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि निवासियों को भोजन, दवाओं और स्वास्थ्य सेवाओं सहित आवश्यक आपूर्ति की कमी का सामना करना पड़ रहा है, और सुरक्षा बलों ने अस्पतालों पर कब्जा कर लिया है।
| क्षेत्र | स्थिति | प्रमुख घटनाएं |
|---|---|---|
| जम्मू-कश्मीर | शांतिपूर्ण, विकास | अनुच्छेद 370 हटा, पत्थरबाजी पर अंकुश |
| पीओजेके | प्रतिबंध, असंतोष | घेराबंदी, गोलीबारी, विरोध |
प्रभाव
अख्तर ने नियंत्रण रेखा के पार की स्थिति की तुलना करते हुए पीओजेके में नागरिकों के खिलाफ हिंसा की खबरों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'जब मैं देखती हूं कि पीओजेके में क्या हो रहा है, तो आम लोगों को उनके अधिकारों की मांग करने और शांतिपूर्ण विरोध करने के लिए कथित तौर पर गोली मार दी जाती है। हम भाग्यशाली हैं कि हमारी जान यहां सुरक्षित है और हम शांतिपूर्ण माहौल में रह रहे हैं।'
खान ने आरोप लगाया कि मुजफ्फराबाद में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जहां हजारों लोगों ने राज्य के दमन, अत्यधिक बल प्रयोग और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने के खिलाफ विरोध किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि 31 जुलाई और 1 अगस्त को सुरक्षा कर्मियों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें कई हताहत हुए और जनता का गुस्सा बढ़ गया।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि पीओजेके में कथित प्रतिबंध और आर्थिक कठिनाइयां जारी रहती हैं, तो वहां असंतोष और बढ़ सकता है, जिससे और अधिक विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि हुई है या नहीं।
जम्मू-कश्मीर में यदि वर्तमान शांति और विकास कार्य जारी रहता है, तो क्षेत्र में स्थिरता बनी रह सकती है। लेकिन अगर पीओजेके में स्थिति बिगड़ती है, तो इसका असर नियंत्रण रेखा के पार भी देखने को मिल सकता है, हालांकि इसकी संभावना के बारे में कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है।
स्रोत: calcuttanews.net



