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असाराम बापू को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं: एम्स ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

एम्स ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दोषी असाराम बापू को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उन्हें प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं की चौबीसों घंटे सहायता चाहिए।

असाराम बापू को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं: एम्स ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
Graphic: Amrit Khabar NewsroomImage rights policy

मुख्य तथ्य

संस्था
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स)
व्यक्ति
असुमल हरपलानी (असाराम बापू)
आयु
85 वर्ष
सिफारिश
अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं, लेकिन चौबीसों घंटे प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं की आवश्यकता
सूचना का स्रोत
लाइव लॉ

पृष्ठभूमि

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि जेल में बंद धार्मिक नेता असुमल हरपलानी, जिन्हें असाराम बापू के नाम से जाना जाता है, को उनकी बीमारियों के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है। यह जानकारी लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार दी गई है।

असाराम बापू की उम्र 85 वर्ष है और वह वर्तमान में जेल में सजा काट रहे हैं। उनके स्वास्थ्य को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी, जिसमें एम्स ने अपनी राय पेश की।

वर्तमान स्थिति

एम्स ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि असाराम बापू को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उन्हें प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं द्वारा चौबीसों घंटे सहायता की आवश्यकता है। यह सिफारिश उनकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर की गई है।

मामले की अगली सुनवाई की तारीख अभी स्पष्ट नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मामले पर आगे विचार किया जाएगा।

प्रभाव

एम्स की इस सिफारिश का सीधा असर असाराम बापू के इलाज की व्यवस्था पर पड़ेगा। चूंकि उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है, इसलिए उन्हें जेल परिसर में ही रखा जा सकता है, बशर्ते वहां प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं की व्यवस्था हो।

इस फैसले से जेल प्रशासन पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ सकती है, क्योंकि उन्हें 85 वर्षीय कैदी के लिए चौबीसों घंटे देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। यह स्थिति उनके परिजनों और अनुयायियों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं।

भविष्य की संभावनाएँ

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि सुप्रीम कोर्ट एम्स की सिफारिश को स्वीकार कर लेता है, तो असाराम बापू को जेल में ही रखा जा सकता है और उनकी देखभाल के लिए विशेष व्यवस्था की जा सकती है। इससे उन्हें अस्पताल स्थानांतरित करने की प्रक्रिया से बचा जा सकेगा।

हालांकि, यदि उनकी स्वास्थ्य स्थिति में गिरावट आती है, तो एम्स की सिफारिश बदल सकती है और अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता हो सकती है। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि अदालत इस मामले में अंतिम निर्णय कब सुनाएगी।

संभावना है कि अदालत एम्स की सिफारिश के अनुसार जेल प्रशासन को निर्देश दे सकती है कि वे प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं की व्यवस्था सुनिश्चित करें। यदि ऐसा होता है, तो असाराम बापू को जेल में ही उचित चिकित्सा सहायता मिल सकती है।

स्रोत: banglanews24.today

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