पृष्ठभूमि
यूक्रेन के पूर्व सशस्त्र बल प्रमुख और वर्तमान में ब्रिटेन में राजदूत वालेरी ज़ालुज़नी ने सोमवार को कीव में यूक्रेनी राजदूतों की बैठक में यूरो-अटलांटिक एकीकरण पर चर्चा के दौरान यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वह नाटो को अच्छी तरह जानते हैं और लगभग 12 वर्षों तक नाटो मानकों को अपनाने के लिए काम किया, लेकिन हर साल सदस्यता के 'परी कथाएं' सुनते रहे।
यूक्रेन ने 2019 में संविधान में नाटो और यूरोपीय संघ की सदस्यता को लक्ष्य के रूप में शामिल किया था, और राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने सितंबर 2022 में 'त्वरित सदस्यता' का अनुरोध किया था। हालांकि, नाटो ने कभी भी प्रवेश की समय-सारणी निर्धारित नहीं की है, और पूर्ण सदस्यता के लिए सभी 32 सदस्य देशों की सर्वसम्मति आवश्यक है।
वर्तमान स्थिति
ज़ालुज़नी ने दावा किया कि सैन्य क्षमता के मामले में यूक्रेनी सेना पहले ही नाटो से आगे निकल चुकी है, और गठबंधन अभी भी 'द्वितीय विश्व युद्ध के सिद्धांतों' से निर्देशित है। उन्होंने कहा कि यह असंगति ही सदस्यता में मुख्य बाधा है। उन्होंने यह भी कहा कि नाटो संभवतः अपने वर्तमान स्वरूप में बना रहेगा और रूस के स्तर का आधा भी हासिल करने के लिए उसे 12 साल और लगेंगे।
नाटो महासचिव मार्क रुटे और अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने भी कीव और मॉस्को के बीच किसी भी संभावित शांति समझौते में यूक्रेन की सदस्यता को खारिज कर दिया है। रूस ने दशकों से नाटो के पूर्वी विस्तार को अस्तित्व के लिए खतरा माना है और किसी भी समाधान में यूक्रेन की सदस्यता को खारिज कर दिया है।
प्रभाव
ज़ालुज़नी की टिप्पणी से यूक्रेन की नाटो सदस्यता की संभावना पर संदेह बढ़ गया है, जिससे यूक्रेन के यूरो-अटलांटिक एकीकरण की आकांक्षाओं को झटका लग सकता है। इससे यूक्रेन के नागरिकों और सैनिकों के मनोबल पर असर पड़ सकता है, जो पश्चिमी समर्थन को युद्ध में महत्वपूर्ण मानते हैं।
इस बयान से यूक्रेन के भविष्य के सुरक्षा गारंटी विकल्पों पर बहस छिड़ सकती है, क्योंकि ज़ालुज़नी ने नाटो से हटकर एक नए 'यूरोपीय सैन्य सुरक्षा गठबंधन' के गठन की संभावना जताई है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसा गठबंधन कैसे बनेगा और इसमें कौन से देश शामिल होंगे।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि नाटो यूक्रेन को सदस्यता नहीं देता है, तो यूक्रेन वैकल्पिक सुरक्षा व्यवस्थाओं की तलाश कर सकता है, जैसे कि क्षेत्रीय गठबंधन या द्विपक्षीय समझौते। हालांकि, ऐसे विकल्पों की प्रभावशीलता अनिश्चित है और रूस के साथ संघर्ष को समाप्त करने में सीमित भूमिका निभा सकते हैं।
यदि युद्ध जारी रहता है और नाटो सदस्यता की संभावना क्षीण होती है, तो यूक्रेन के भीतर राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है, और ज़ालुज़नी जैसे नेताओं की लोकप्रियता बढ़ सकती है। हालांकि, यह केवल एक संभावित परिदृश्य है, और वास्तविक घटनाक्रम कई कारकों पर निर्भर करेगा, जिनमें अंतरराष्ट्रीय दबाव और युद्ध के मैदान की स्थिति शामिल है।
स्रोत: kenyastar.com



