मुख्य तथ्य
- वक्ता
- राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी
- बैठक
- उज्बेकिस्तान के निवेश, उद्योग और व्यापार मंत्री लाज़िज़ कुद्रातोव के साथ उद्योग गोलमेज
- मुख्य मांग
- अटारी-वाघा सीमा को व्यापार के लिए फिर से खोलना
- लाभान्वित क्षेत्र
- पंजाब और हरियाणा
- संभावित निर्यात क्षेत्र
- बासमती चावल, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, वस्त्र, साइकिल, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान और मशीनरी
- वैकल्पिक मार्ग
- अफगानिस्तान और ईरान का चाबहार बंदरगाह
पृष्ठभूमि
राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने मंगलवार को उज्बेकिस्तान के निवेश, उद्योग और व्यापार मंत्री लाज़िज़ कुद्रातोव के साथ एक उद्योग गोलमेज बैठक में भारत और राष्ट्रमंडल स्वतंत्र राज्यों (CIS) के बीच ऐतिहासिक भूमि मार्ग को फिर से खोलने का मुद्दा उठाया।
साहनी ने कहा कि यह मार्ग उत्तरी भारत, विशेष रूप से पंजाब को CIS देशों से जोड़ता था और इसके बहाल होने से क्षेत्र के व्यापार और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि क्षेत्रीय शत्रुता कम होगी और अटारी-वाघा सीमा व्यापार के लिए फिर से खुल सकेगी।
वर्तमान स्थिति
साहनी ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों पर जोर दिया, ताशकंद, समरकंद और बुखारा जैसे शहरों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे दोनों देशों की साझा विरासत में विशेष स्थान रखते हैं।
उन्होंने कपास, बागवानी, अंगूर की खेती, फार्मास्यूटिकल्स और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग की संभावना पर प्रकाश डाला। साथ ही, उज्बेकिस्तान के सोना, तांबा और यूरेनियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के भंडार का उल्लेख करते हुए कहा कि ये द्विपक्षीय आर्थिक जुड़ाव को मजबूत कर सकते हैं।
साहनी ने अफगानिस्तान और ईरान के बंदरगाह चाबहार के माध्यम से वैकल्पिक कनेक्टिविटी के महत्व पर भी जोर दिया, कहा कि ऐसे मार्ग क्षेत्र के आर्थिक भूगोल को बदल सकते हैं।
प्रभाव
साहनी के अनुसार, बेहतर भूमि कनेक्टिविटी से पंजाब और हरियाणा के लिए बासमती चावल, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, वस्त्र, साइकिल, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में नए निर्यात अवसर पैदा होंगे।
इस कदम से इन राज्यों के व्यापारियों और निर्यातकों को सीधा लाभ हो सकता है, क्योंकि CIS देशों तक पहुंच आसान होगी। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह मार्ग कब तक बहाल हो सकता है, क्योंकि यह क्षेत्रीय स्थितियों पर निर्भर करेगा।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि अटारी-वाघा सीमा व्यापार के लिए फिर से खुलती है, तो पंजाब और हरियाणा से CIS देशों को निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। हालांकि, यह क्षेत्रीय शत्रुता में कमी पर निर्भर करेगा।
वैकल्पिक मार्गों, जैसे चाबहार बंदरगाह के माध्यम से, के विकसित होने पर भी व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन इसके लिए बुनियादी ढांचे और राजनीतिक सहमति की आवश्यकता होगी।
यदि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ता है, तो खनिज संसाधनों और कृषि उत्पादों के आदान-प्रदान से दीर्घकालिक लाभ हो सकता है, लेकिन यह भविष्य की बातचीत और नीतियों पर निर्भर करेगा।
स्रोत: tribuneindia.com



