मार्केट

बाज़ार डेटा लोड हो रहा है…

विलंबित भाव
लाइव टीवी
व्यापार

RBI ने पर्यवेक्षी निर्देशों के समेकन के तहत 628 परिपत्रों को निरस्त किया

भारतीय रिज़र्व बैंक ने पर्यवेक्षी निर्देशों के समेकन के तहत 628 परिपत्रों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। ये परिपत्र या तो 64 समेकित निर्देशों में शामिल किए गए हैं या अप्रचलित हो चुके हैं।

मुख्य तथ्य

जारी करने की तिथि
31 जुलाई 2026
निरस्त किए गए परिपत्र
628
समेकित निर्देश
64
जारीकर्ता
भारतीय रिज़र्व बैंक, पर्यवेक्षण विभाग
प्रभाव
तत्काल प्रभाव से निरस्त

पृष्ठभूमि

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 31 जुलाई 2026 को पर्यवेक्षी निर्देशों के समेकन की प्रक्रिया के तहत 628 परिपत्रों को निरस्त करने की घोषणा की। यह कदम RBI के पर्यवेक्षण विभाग (DoS) द्वारा जारी 64 समेकित निर्देशों के प्रकाशन के साथ आया है।

RBI के अनुसार, ये समेकित निर्देश DoS तथा उन विभागों के सभी निर्देशों को शामिल करते हैं जिनके पर्यवेक्षी कार्यों को DoS में विलय कर दिया गया है। साथ ही, जो निर्देश अब प्रासंगिक नहीं रहे हैं, उन्हें समेकित निर्देशों से बाहर रखा गया है।

वर्तमान स्थिति

RBI द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, परिशिष्ट में सूचीबद्ध 628 परिपत्र, जिनमें वे परिपत्र शामिल हैं जिनके निर्देशों को समेकित निर्देशों में शामिल किया गया है, साथ ही वे जो अप्रचलित या अनावश्यक हो गए हैं, तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं।

हालांकि, RBI ने स्पष्ट किया है कि निरस्त किए गए निर्देशों, परिपत्रों या दिशानिर्देशों के तहत की गई या शुरू की गई कोई भी कार्रवाई उन्हीं प्रावधानों के अनुसार जारी रहेगी। यानी, निरस्तीकरण का पूर्व में की गई कार्रवाइयों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

प्रभाव

इस निरस्तीकरण का सीधा असर बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर पड़ेगा, जिन्हें अब 64 समेकित निर्देशों के अनुसार काम करना होगा। पुराने परिपत्रों के स्थान पर नए समेकित निर्देश लागू होंगे, जिससे नियामकीय अनुपालन में स्पष्टता आएगी।

हालांकि, जिन मामलों में पहले से कार्रवाई चल रही है या पूरी हो चुकी है, उन पर पुराने नियम ही लागू होंगे। इससे कानूनी प्रक्रियाओं में निरंतरता बनी रहेगी और किसी प्रकार की विसंगति नहीं आएगी।

भविष्य की संभावनाएँ

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि वित्तीय संस्थान नए समेकित निर्देशों को अपनाने में सक्षम होते हैं, तो नियामकीय ढांचा अधिक सुव्यवस्थित हो सकता है। इससे अनुपालन में आसानी होगी और पर्यवेक्षी प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकती है।

हालांकि, यदि किसी संस्थान को नए निर्देशों को समझने या लागू करने में कठिनाई होती है, तो उसे अस्थायी रूप से परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। RBI द्वारा आगे कोई स्पष्टीकरण या मार्गदर्शन जारी किया जा सकता है, लेकिन इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है।

स्रोत: Reserve Bank of India

इस समाचार को साझा करें