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आरबीआई डिप्टी गवर्नर ने आंतरिक लोकपाल की स्वतंत्रता और ग्राहक शिकायत निवारण पर जोर दिया

आरबीआई डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे ने मुंबई में आंतरिक लोकपाल सम्मेलन में कहा कि ग्राहक शिकायत निवारण कोर कार्य है, लागत केंद्र नहीं। आंतरिक लोकपाल की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और समय पर समाधान पर बल दिया।

मुख्य तथ्य

आयोजन
आंतरिक लोकपाल सम्मेलन, मुंबई
तारीख
13 जुलाई 2026
वक्ता
श्री स्वामीनाथन जे, डिप्टी गवर्नर, आरबीआई
मुख्य संदेश
ग्राहक शिकायत निवारण कोर कार्य है, लागत केंद्र नहीं
आंतरिक लोकपाल की भूमिका
संस्था के भीतर अंतिम अवसर
सफलता के मीट्रिक
बाहरी हस्तक्षेप के बिना समाधान, रोकी गई शिकायतें, प्रणालीगत सुधार

पृष्ठभूमि

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर श्री स्वामीनाथन जे ने 13 जुलाई 2026 को मुंबई में आयोजित आंतरिक लोकपाल सम्मेलन में मुख्य भाषण दिया। इस सम्मेलन में बैंकों, एनबीएफसी और अन्य विनियमित संस्थाओं के प्रबंध निदेशक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पूर्णकालिक निदेशक, कार्यकारी निदेशक, वरिष्ठ प्रबंधन, प्रधान संपर्क अधिकारी, आरबीआई के कार्यकारी निदेशक सुश्री सोनाली सेन गुप्ता, आरबीआई लोकपाल और विनियमित संस्थाओं के आंतरिक लोकपाल उपस्थित थे।

डिप्टी गवर्नर ने कहा कि ग्राहक सेवा एक साझा जिम्मेदारी है जो बोर्ड से शुरू होती है, वरिष्ठ प्रबंधन और परिचालन टीमों से होती हुई ग्राहक के साथ हर बातचीत में झलकती है। उन्होंने रेखांकित किया कि बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं का मूल संबंध ग्राहक और संस्था के बीच विश्वास पर टिका है, जो मजबूत बैलेंस शीट, पर्याप्त पूंजी और उन्नत तकनीक के साथ-साथ शिकायतों के निष्पक्ष और समय पर समाधान से बना रहता है।

आरबीआई ने समय के साथ उपभोक्ता संरक्षण को वित्तीय स्थिरता का अभिन्न अंग बताया है और इसे आरबीआई लोकपाल तंत्र, आंतरिक लोकपाल ढांचे और ग्राहक सेवा के लिए मजबूत नियामक अपेक्षाओं के माध्यम से एक व्यापक संस्थागत ढांचे में बदला है।

वर्तमान स्थिति

डिप्टी गवर्नर ने कहा कि हर अनसुलझी शिकायत की लागत होती है, जो केवल वित्तीय नहीं, बल्कि ग्राहक विश्वास, संस्थागत प्रतिष्ठा और नियामक ध्यान के रूप में होती है। आदर्श शिकायत निवारण ढांचा वह है जहां ग्राहक की चिंता का समाधान संस्था के भीतर सबसे कम स्तर पर और सबसे जल्दी हो।

उन्होंने कहा कि शिकायत सिर्फ एक शिकायत नहीं है, बल्कि एक क्षण है जब ग्राहक संस्था से रिश्ते की पुष्टि चाहता है। संस्था की प्रतिक्रिया अक्सर मूल समस्या से अधिक ग्राहक की धारणा को आकार देती है। वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र के बड़े, डिजिटल और अत्यधिक परस्पर जुड़े होने के साथ आंतरिक लोकपाल तंत्र का महत्व बढ़ गया है।

आरबीआई ने आंतरिक लोकपाल ढांचा इस दर्शन के साथ पेश किया कि यह संस्था को अपनी त्रुटि सुधारने, अनुचित परिणाम को संबोधित करने और ग्राहक को सार्थक समाधान देने का अवसर देता है। यदि आंतरिक लोकपाल प्रभावी ढंग से कार्य करें, तो आरबीआई लोकपाल या अन्य मंचों पर बाहरी शिकायतें स्वाभाविक रूप से कम होनी चाहिए।

आंतरिक लोकपाल सफलता के मीट्रिक
मीट्रिक विवरण
बाहरी हस्तक्षेप के बिना निष्पक्ष समाधानकितनी शिकायतों का समाधान हुआ
रोकी गई शिकायतेंकितनी शिकायतों को आगे बढ़ने से रोका गया
प्रणालीगत सुधारकितने सुधार आंतरिक लोकपाल की अंतर्दृष्टि से हुए
डिप्टी गवर्नर द्वारा उल्लिखित मीट्रिक, संख्यात्मक मान उपलब्ध नहीं।

प्रभाव

आंतरिक लोकपाल की सफलता का आकलन तीन प्रश्नों से किया जा सकता है: कितनी शिकायतों का बाहरी हस्तक्षेप के बिना निष्पक्ष समाधान हुआ, कितनी शिकायतों को आगे बढ़ने से रोका गया, और आंतरिक लोकपाल की अंतर्दृष्टि से कितने प्रणालीगत सुधार हुए। ये मीट्रिक वास्तव में ढांचे की प्रभावशीलता को दर्शाते हैं।

डिप्टी गवर्नर ने जोर देकर कहा कि 'लोकपाल' शीर्षक स्वतंत्रता, तटस्थता और निष्पक्षता की अपेक्षा रखता है। आंतरिक लोकपाल संगठन के भीतर कार्य करता है लेकिन उसे आंतरिक अनुमोदन श्रृंखला का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। संस्था के पिछले फैसले से यांत्रिक सहमति ढांचे के उद्देश्य को पूरा नहीं करती।

आंतरिक लोकपाल के समक्ष प्रश्न केवल 'क्या प्रक्रिया का पालन किया गया?' तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह भी देखना चाहिए कि क्या ग्राहक के साथ निष्पक्ष व्यवहार हुआ, क्या परिणाम परिस्थितियों में उचित था, और क्या संस्था पूर्ण निष्पक्षता के साथ मामले की फिर से जांच करने पर उसी निष्कर्ष पर पहुंचती।

भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि आंतरिक लोकपाल अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से निभाते हैं, तो बाहरी मंचों पर शिकायतों की संख्या में गिरावट आ सकती है, जिससे ग्राहक विश्वास मजबूत होगा और नियामक दबाव कम हो सकता है।

यदि आंतरिक लोकपाल केवल औपचारिकताओं तक सीमित रहते हैं और वास्तविक स्वतंत्रता नहीं दिखाते, तो शिकायतें बढ़ सकती हैं और संस्थाओं को नियामक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि विनियमित संस्थाएं आंतरिक लोकपाल की सिफारिशों को कितनी गंभीरता से लागू करती हैं और प्रणालीगत सुधारों को अपनाती हैं। यदि ऐसा होता है, तो शिकायत निवारण अधिक प्रभावी हो सकता है और ग्राहकों को तेज, निष्पक्ष समाधान मिल सकता है।

स्रोत: Reserve Bank of India

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