मुख्य तथ्य
- तूफान की शुरुआत
- 30 मई 2018
- अपॉर्चुनिटी की आखिरी सिग्नल
- 10 जून 2018
- मिशन की अवधि
- 15 साल से अधिक
- तय की गई दूरी
- 45.16 किलोमीटर
- बैटरी क्षमता
- 85 प्रतिशत (5,000 चार्ज साइकिल के बाद)
- तूफान के दौरान tau मान
- 10.8 (अपॉर्चुनिटी के ऊपर)
पृष्ठभूमि
मंगल ग्रह पर 2018 में आया धूल तूफान इतना बड़ा था कि उसने पूरे ग्रह को ढक लिया और कई महीनों तक सूर्य की रोशनी रोक दी। इसी तूफान ने नासा के अपॉर्चुनिटी रोवर की सौर पैनलों को बेकार कर दिया, जिससे वह हमेशा के लिए शांत हो गया। यह मिशन 15 साल तक चला था।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस तूफान की हवाएं अधिकतम 95 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंची थीं, लेकिन मंगल का वायुमंडल पृथ्वी की तुलना में बहुत पतला है, इसलिए यह हवा किसी चीज को उड़ाने के बजाय धक्का देने जैसी थी। असली खतरा धूल थी, जो बारीक और स्थैतिक बिजली से युक्त थी और हर चीज पर चिपक जाती थी।
वर्तमान स्थिति
मार्स रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर ने 30 मई 2018 को इस तूफान का पता लगाया था। एक हफ्ते के भीतर यह 18 मिलियन वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैल गया, जो उत्तरी अमेरिका से भी बड़ा था। 12 जून तक यह 35 मिलियन वर्ग किलोमीटर में फैल चुका था, जो ग्रह का एक चौथाई हिस्सा था। 19 जून को इसे ग्रह-व्यापी घटना घोषित किया गया।
अपॉर्चुनिटी रोवर इस तूफान के नीचे था, जो पर्सेवरेंस वैली में खड़ा था। तूफान के दौरान उसके ऊपर धूल की मोटाई (tau) 10.8 तक पहुंच गई, जबकि सामान्य समय में यह 0.5 होती थी। यह इतनी अधिक थी कि इंजीनियर सटीक माप भी नहीं ले पा रहे थे। क्यूरियोसिटी रोवर, जो प्लूटोनियम से चलता है, उस पर इसका असर कम पड़ा, लेकिन उसके उपकरणों ने भी 8.0 से अधिक tau दर्ज किया, जो उसके इतिहास में सबसे अधिक था।
| तिथि | क्षेत्र (वर्ग किमी) | tau मान |
|---|---|---|
| 30 मई 2018 | शुरुआत | 0.5 (सामान्य) |
| 6 जून 2018 (लगभग) | 18 मिलियन से अधिक | — |
| 12 जून 2018 | 35 मिलियन | — |
| 19 जून 2018 | ग्रह-व्यापी | — |
| 10 जून 2018 | — | 10.8 (अपॉर्चुनिटी) |
| — | — | 8.0 (क्यूरियोसिटी) |
प्रभाव
अपॉर्चुनिटी की आखिरी सिग्नल 10 जून 2018 को मिली थी। इंजीनियरों ने पाया कि उसकी बैटरी 24 वोल्ट से नीचे चली गई थी, जिससे लो-पावर फॉल्ट शुरू हो गया। इसके बाद रोवर केवल मिशन क्लॉक चलाता रहा, जो समय-समय पर जागकर पूछता था कि क्या पर्याप्त चार्ज है। आसमान साफ होने में लगभग चार महीने लग गए।
इस तूफान ने वैज्ञानिकों को मंगल के वायुमंडल के बारे में नई जानकारी दी। 2018 का तूफान पहला ऐसा तूफान था जिसे पूरे ऑर्बिटल फ्लीट ने देखा। शोधकर्ताओं ने पाया कि धूल के कारण जल वाष्प 100 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच गया, जहां सूर्य की रोशनी इसे विभाजित कर देती है और हाइड्रोजन अंतरिक्ष में चला जाता है। यह मंगल से पानी के नुकसान का एक कारण हो सकता है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
अभी तक कोई भी वैज्ञानिक इन तूफानों की भविष्यवाणी नहीं कर पाया है। नासा ने अब सतही मिशनों को सौर ऊर्जा पर निर्भर नहीं बनाने का फैसला किया है। यह स्वीकार करने जैसा है कि मौसम को हराया नहीं जा सकता, बल्कि उससे बचकर चलना होगा।
यदि भविष्य में कोई बड़ा धूल तूफान आता है, तो सौर ऊर्जा से चलने वाले रोवरों के लिए खतरा बना रहेगा। हालांकि, अगर वैज्ञानिक इन तूफानों के पैटर्न को समझ लें, तो शायद भविष्य में बेहतर तैयारी संभव हो सके। फिलहाल, यह अनिश्चित है कि अगला ग्रह-व्यापी तूफान कब आएगा, लेकिन यह संभावना है कि यह अगले कुछ मंगल वर्षों में आ सकता है।
स्रोत: spacedaily.com



