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एंटरप्राइज़ सॉफ्टवेयर का पुनः आविष्कार: परिणाम-आधारित मूल्य निर्धारण की ओर बदलाव

एआई के कारण एंटरप्राइज़ सॉफ्टवेयर का निर्माण सस्ता और तेज़ हो गया है, जिससे सॉफ्टवेयर की कमी कम हुई है। अब ग्राहक सीटों या स्टोरेज के बजाय व्यावसायिक परिणामों के लिए भुगतान करना चाहते हैं। यह लेख सास मॉडल से आउटकम-आधारित मूल्य निर्धारण की ओर बदलाव और भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए अवसरों की चर्चा करता है।

मुख्य तथ्य

लेखक
फ़ारूक़ आदम, संस्थापक, फ़ाइंड
सास मॉडल की अवधि
पिछले दो दशक
एआई द्वारा हल किए जाने वाले टिकटों का प्रतिशत
80%
मूल्य निर्धारण का आधार
सीटें, स्टोरेज, उपयोग स्तर, सुविधाएँ
नया मॉडल
आउटकम-एज़-ए-सर्विस
भारत के लिए अवसर
दक्षता और लागत अनुकूलन में ताकत

पृष्ठभूमि

तीन दशकों से एंटरप्राइज़ सॉफ्टवेयर उद्योग लाइसेंस, सीट और लॉगिन बेचता रहा है। उत्पाद की जटिलता, एकीकरण और स्विचिंग लागत ने इसे एक मज़बूत व्यावसायिक मॉडल बनाया। यह मॉडल तकनीकी उद्योग के सबसे सफल मॉडलों में से एक रहा है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने सॉफ्टवेयर निर्माण की अर्थव्यवस्था को बदल दिया है। जो सुविधाएँ पहले महीनों में विकसित होती थीं, वे अब दिनों या घंटों में बनाई जा सकती हैं। आंतरिक अनुप्रयोगों को एआई की मदद से तेज़ी से तैयार किया जा रहा है, हालाँकि सुरक्षा, शासन और अनुपालन जैसी आवश्यकताएँ बनी रहेंगी।

जब सॉफ्टवेयर बनाना आसान हो जाता है, तो सॉफ्टवेयर की कमी कम हो जाती है। ग्राहक अब केवल उत्पाद के अस्तित्व या उसे दोबारा बनाने की कठिनाई के लिए भुगतान नहीं करते, बल्कि उस व्यावसायिक परिणाम के लिए भुगतान करते हैं जो सॉफ्टवेयर देने में मदद करता है।

वर्तमान स्थिति

सास मूल्य निर्धारण वास्तव में सॉफ्टवेयर के बारे में नहीं था, बल्कि एक व्यावहारिक समाधान था। राजस्व वृद्धि, ग्राहक प्रतिधारण या परिचालन दक्षता में प्रत्येक अनुप्रयोग के योगदान को मापना कठिन था, इसलिए उद्योग ने सीटों, स्टोरेज, उपयोग स्तरों और सुविधाओं के आधार पर मूल्य निर्धारित किया। यह तब उचित था जब सॉफ्टवेयर बनाना महंगा था और परिणाम मापना कठिन था।

अब ये बाधाएँ धीरे-धीरे समाप्त हो रही हैं। उदाहरण के लिए, यदि एआई 80% ग्राहक सहायता टिकटों को बिना मानवीय हस्तक्षेप के हल कर देता है, तो ग्राहक वास्तव में किसके लिए भुगतान कर रहा है? वे ग्राहक समस्याओं के त्वरित और सटीक समाधान के लिए भुगतान कर रहे हैं, लेकिन अनुबंध अभी भी उस दुनिया को दर्शाता है जहाँ मनुष्य काम करते थे। कई वित्त प्रमुख इस बेमेल पर सवाल उठाने लगे हैं।

सदस्यता मॉडल इनपुट (सीटें, स्टोरेज, एपीआई कॉल) की कीमत लगाता है, न कि व्यावसायिक परिणाम की। एआई सीधे परिणाम उत्पन्न करता है, इसलिए वाणिज्यिक बातचीत समाधानों के मूल्य की ओर बढ़ रही है। यह केवल मूल्य समायोजन नहीं है, बल्कि एक अलग वाणिज्यिक संबंध है जिसमें जवाबदेही साझा की जाती है।

सास मॉडल बनाम आउटकम-आधारित मॉडल
पहलू सास मॉडल आउटकम-आधारित मॉडल
मूल्य निर्धारण आधारसीटें, स्टोरेज, उपयोगव्यावसायिक परिणाम
जोखिमखरीदार परविक्रेता पर
प्रोत्साहनसॉफ्टवेयर डिलीवरीग्राहक के व्यावसायिक प्रदर्शन से जुड़े
अनुबंधसीट-आधारित नवीनीकरणपरिणाम-आधारित शुल्क
तालिका लेख में वर्णित अवधारणाओं का सारांश प्रस्तुत करती है।

प्रभाव

सास मॉडल में, विक्रेता विश्वसनीय सॉफ्टवेयर देने के लिए भुगतान पाते हैं, और निष्पादन जोखिम खरीदार पर होता है। परिणाम-आधारित मूल्य निर्धारण इस जोखिम को पुनर्वितरित करता है, जिससे विक्रेता हल किए गए टिकटों, योग्य लीड, मिलान किए गए चालान या सफल डिलीवरी के लिए अधिक जिम्मेदार हो जाते हैं। यह उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव है।

भारत के लिए यह बदलाव विशेष महत्व रखता है। भारतीय एंटरप्राइज़ सॉफ्टवेयर कंपनियों ने कम लागत पर प्रतिस्पर्धी उत्पाद देकर सफलता पाई है। जैसे-जैसे मूल्य परिणामों की ओर बढ़ता है, प्रतिस्पर्धा का आधार बदल जाता है। ग्राहक पूछेंगे कि कौन लगातार डिलीवरी में सुधार करता है, परिचालन लागत घटाता है, या रूपांतरण बढ़ाता है, न कि कौन सबसे सस्ती सीट देता है।

भारतीय कंपनियों की कुशल टीमें और अनुशासित यूनिट अर्थव्यवस्था उन्हें परिणाम-आधारित मॉडल में लाभ दे सकती है। साथ ही, एआई मानकीकृत सास उत्पादों को बदलकर लचीला एंटरप्राइज़ सॉफ्टवेयर बना रहा है, जो व्यवसाय के साथ अनुकूलित होता है। यह अनुकूलनशीलता मूल्य का हिस्सा बन जाती है।

भविष्य का परिदृश्य

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि एंटरप्राइज़ सॉफ्टवेयर कंपनियाँ परिणाम-आधारित मूल्य निर्धारण अपनाती हैं, तो वे ग्राहकों के साथ अपने हितों को संरेखित कर सकती हैं और प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त कर सकती हैं। हालाँकि, यह बदलाव धीमा हो सकता है क्योंकि कई सास कंपनियाँ पूर्वानुमानित आवर्ती राजस्व पर निर्भर हैं और जोखिम को लेकर सतर्क हैं।

यदि भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियाँ दक्षता और लागत अनुकूलन में अपनी ताकत का लाभ उठाती हैं, तो वे इस नए युग में अग्रणी बन सकती हैं। वे सॉफ्टवेयर एक्सेस के बजाय वितरित परिणामों के आसपास अनुबंधों को फिर से डिज़ाइन कर सकती हैं।

हालाँकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह परिवर्तन कितनी जल्दी होगा। यदि ग्राहक सीट-आधारित नवीनीकरण पर जोर देते रहे, तो संक्रमण धीमा हो सकता है। फिर भी, अगली नवीनीकरण बातचीत में सीट छूट के बजाय व्यावसायिक परिणामों पर ध्यान केंद्रित होने की संभावना है।

स्रोत: hindustantimes.com

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