मुख्य तथ्य
- प्रवक्ता
- रणधीर जायसवाल
- पाकिस्तानी सेना प्रवक्ता
- जनरल अहमद चौधरी
- अफगान कृषि मंत्री
- मौलवी अताउल्लाह उमरी
- भारतीय राजदूत (अमेरिका)
- विनय मोहन क्वात्रा
- सिंधु जल संधि
- 1960 में हस्ताक्षरित
- संधि की स्थिति
- निलंबित
पृष्ठभूमि
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित पाक्षिक प्रेस वार्ता में पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता जनरल अहमद चौधरी की उस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने धार्मिक छंदों का हवाला देते हुए काबुल को 'अविश्वासियों' से दूर रहने की सलाह दी थी।
यह टिप्पणी अफगानिस्तान के कृषि मंत्री मौलवी अताउल्लाह उमरी की जुलाई में भारत यात्रा के बाद आई है। उमरी ने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों देशों के बीच संबंधों की मजबूती को रेखांकित करते हुए कहा था, 'मुझे लगता है कि यह मेरे अपने लोग हैं, जैसे हमारा देश हो, और मुझे लगता है कि जैसा आपने कहा, हमारा डीएनए एक है।'
वर्तमान स्थिति
जायसवाल ने कहा, 'पाकिस्तान के प्रवक्ता ने कुछ टिप्पणियां की थीं। ऐसे बयान और टिप्पणियां भारत-अफगानिस्तान संबंधों की सकारात्मक दिशा को लेकर पाकिस्तानी राज्य की असुरक्षा और हताशा को दर्शाती हैं।'
इसके अलावा, जायसवाल ने सिंधु जल संधि के निलंबन पर अमेरिका में भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा के लेख से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए दोहराया कि यह संधि तब तक निलंबित रहेगी जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के समर्थन को अपरिवर्तनीय और विश्वसनीय रूप से त्याग नहीं देता।
प्रभाव
क्वात्रा ने रविवार को न्यूज़वीक पत्रिका में प्रकाशित लेख में कहा कि सिंधु जल संधि को निलंबित करने का भारत का निर्णय पहलगाम में हुए घातक आतंकवादी हमले का सीधा जवाब था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से जल समझौते को लेकर युद्ध की धमकियां उसकी आंतरिक समस्याओं से ध्यान भटकाने का प्रयास हैं।
क्वात्रा ने कहा कि यदि पाकिस्तान वास्तव में द्विपक्षीय मुद्दों पर भारत का सहयोग चाहता है, तो उसे पहले अपने द्वारा निर्मित आतंकवादी ढांचे को खत्म करना होगा। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि संधि की प्रस्तावना में इसे 'सद्भावना और मित्रता की भावना' से संपन्न बताया गया था, लेकिन पाकिस्तान ने आधी सदी में उस सद्भावना और मित्रता को नष्ट कर दिया।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि पाकिस्तान आतंकवाद के समर्थन को स्पष्ट रूप से त्यागता है, तो सिंधु जल संधि के निलंबन की स्थिति में बदलाव आ सकता है। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाएगा।
भारत-अफगानिस्तान संबंधों की सकारात्मक दिशा को देखते हुए पाकिस्तान की ओर से और टिप्पणियां आ सकती हैं, लेकिन भारत सरकार ने ऐसे बयानों को अनदेखा करने की नीति अपनाई है। यदि दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ता है, तो क्षेत्रीय स्थिरता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
स्रोत: webindia123.com



