मुख्य तथ्य
- मरीज की उम्र
- 62 वर्ष
- अस्पताल
- प्रशांत अस्पताल, चेन्नई
- इजेक्शन फ्रैक्शन
- 30% (सामान्य: 55-65%)
- प्रक्रिया की अवधि
- तीन घंटे
- नेतृत्व
- अरविंद दुरुवासल, वरिष्ठ सलाहकार-इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट
पृष्ठभूमि
चेन्नई के प्रशांत अस्पताल के डॉक्टरों ने 62 वर्षीय एक मधुमेह रोगी पर एक साथ दो हृदय प्रक्रियाएं कीं। यह जानकारी अस्पताल द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में दी गई। मरीज को गंभीर हृदयाघात के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
मरीज को आपातकालीन विभाग में गंभीर सांस लेने में तकलीफ के साथ लाया गया था, जो तीव्र फुफ्फुसीय एडिमा के कारण थी। यह एक जानलेवा स्थिति है जिसमें फेफड़ों में तरल पदार्थ तेजी से जमा हो जाता है।
वर्तमान स्थिति
आगे की जांच में पता चला कि मरीज को साइलेंट हार्ट अटैक आया था, जिसके बारे में उसे पता भी नहीं चला। इससे उसका हृदय गंभीर रूप से कमजोर हो गया था और इजेक्शन फ्रैक्शन (ईएफ) सामान्य 55-65% की तुलना में केवल 30% रह गया था।
डॉक्टरों ने पहले हृदय के कार्यभार को कम करने के लिए एक लघु अस्थायी हृदय पंप प्रत्यारोपित किया। मरीज की स्थिति स्थिर होने के बाद, टीम ने पाया कि ब्लॉक धमनी में ताजा रक्त का थक्का, कठोर प्लाक और निशान ऊतक का जटिल मिश्रण था, जिससे पारंपरिक गुब्बारे ब्लॉकेज को पार नहीं कर सके।
इसके बाद डॉक्टरों ने एक्साइमर लेजर कोरोनरी एथेरेक्टॉमी (ईएलसीए) का उपयोग करके रुकावट को साफ किया, जिससे बैलून एंजियोप्लास्टी और सफल स्टेंट प्लेसमेंट का मार्ग बना। तीन घंटे की यह प्रक्रिया अस्पताल के वरिष्ठ सलाहकार-इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट अरविंद दुरुवासल के नेतृत्व में की गई।
| विवरण | मान |
|---|---|
| मरीज की उम्र | 62 वर्ष |
| इजेक्शन फ्रैक्शन (मरीज) | 30% |
| सामान्य इजेक्शन फ्रैक्शन | 55-65% |
| प्रक्रिया की अवधि | तीन घंटे |
प्रभाव
इस दोहरी प्रक्रिया का सीधा लाभ मरीज को हुआ, जिसकी जान बच गई और हृदय की कार्यक्षमता में सुधार की संभावना बनी। मधुमेह रोगियों में हृदय रोग का जोखिम अधिक होता है, और ऐसे जटिल मामलों में यह तकनीक मददगार साबित हो सकती है।
इस घटनाक्रम से चिकित्सा जगत में यह संदेश जाता है कि साइलेंट हार्ट अटैक के मामलों में भी आधुनिक उपकरणों और तकनीकों से इलाज संभव है। हालांकि, इसका व्यापक प्रभाव स्पष्ट नहीं है, क्योंकि यह एकल मामले की रिपोर्ट है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि मरीज की रिकवरी अच्छी रहती है, तो यह तकनीक भविष्य में ऐसे ही जटिल मामलों में इस्तेमाल की जा सकती है। हालांकि, इसकी सफलता दर और दीर्घकालिक परिणामों के बारे में अभी कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
अस्पताल प्रशासन ने इस प्रक्रिया की सफलता की पुष्टि की है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इस तरह की प्रक्रियाएं अन्य अस्पतालों में भी उपलब्ध होंगी। यदि इस तकनीक को व्यापक रूप से अपनाया जाता है, तो मधुमेह और हृदय रोग के मरीजों को लाभ हो सकता है, लेकिन इसके लिए और शोध और डेटा की आवश्यकता होगी।
स्रोत: thehindu.com



