मुख्य तथ्य
- स्थान
- ईशानगर, छतरपुर, मध्य प्रदेश
- स्कूल
- शासकीय उच्चतर माध्यमिक सांदीपनि स्कूल
- आरोपी
- प्रिंसिपल बसंत लाल प्रजापति
- मुख्य आरोप
- महिला शौचालय का बार-बार इस्तेमाल
- शिकायत का माध्यम
- जिला जनसुनवाई में लिखित शिकायत
- मांग
- निष्पक्ष जांच और प्रिंसिपल को हटाना
पृष्ठभूमि
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के ईशानगर स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक सांदीपनि स्कूल की छात्राओं ने अपने प्रिंसिपल बसंत लाल प्रजापति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्राओं का कहना है कि प्रिंसिपल बार-बार लड़कियों के शौचालय का इस्तेमाल करते हैं, जिससे वे असुरक्षित और असहज महसूस करती हैं।
यह मामला जिले की जनसुनवाई के दौरान सामने आया, जहां छात्राओं ने प्रिंसिपल के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई और उन्हें हटाने की मांग को लेकर नारेबाजी भी की।
वर्तमान स्थिति
छात्राओं ने आरोप लगाया कि प्रिंसिपल बसंत लाल प्रजापति ने कई बार मना करने के बावजूद लड़कियों के शौचालय का इस्तेमाल जारी रखा है। छात्रा सुरभि कुशवाहा ने बताया कि मंगलवार को हुई जनसुनवाई में लिखित शिकायत दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रिंसिपल ने केंद्र सरकार की अग्निवीर योजना को 'कचरा' कहकर आपत्तिजनक टिप्पणी की।
एक अन्य छात्रा सरस्वती अहिरवार ने आरोप लगाया कि प्रिंसिपल का छात्राओं के प्रति व्यवहार अनुचित था। उन्होंने कहा कि प्रिंसिपल सुबह की सभा में छात्राओं से तेज आवाज में बात करने पर गाली-गलौज करते थे। छात्राओं ने स्कूल के अन्य स्टाफ सदस्यों के साथ भी अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया है।
छात्राओं ने जिला प्रशासन और जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) से निष्पक्ष जांच कराने और सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। अधिकारियों से जांच पूरी होने के बाद अगला कदम तय करने की उम्मीद है।
प्रभाव
इन आरोपों से स्कूल की छात्राओं में भय और असुरक्षा की भावना पैदा हुई है। छात्राओं के अनुसार, प्रिंसिपल के महिला शौचालय में बार-बार आने से उन्हें डर लगता है और वे स्कूल परिसर में असहज महसूस करती हैं।
इस घटना से स्कूल के माहौल पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, क्योंकि छात्राओं ने प्रिंसिपल के खिलाफ आवाज उठाई है। अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो प्रशासनिक कार्रवाई से स्कूल प्रशासन में बदलाव हो सकता है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि जांच में छात्राओं के आरोप सही पाए जाते हैं, तो प्रिंसिपल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है, जिसमें उन्हें पद से हटाना भी शामिल हो सकता है। हालांकि, यह तभी संभव है जब प्रशासन शिकायत को गंभीरता से ले और निष्पक्ष जांच करे।
अगर जांच में आरोप निराधार पाए जाते हैं, तो प्रिंसिपल को बरी किया जा सकता है, लेकिन इससे छात्राओं और प्रशासन के बीच विश्वास की कमी बढ़ सकती है। फिलहाल, अधिकारियों के जांच पूरी करने के बाद ही अगला कदम तय होगा।
इस मामले में स्कूल प्रशासन और जिला शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, इसलिए स्थिति स्पष्ट नहीं है।
स्रोत: freepressjournal.in



