मुख्य तथ्य
- हिरासत की तारीख
- 30 जुलाई
- गिरफ्तारी की तारीख
- 12 जुलाई
- कारण
- काजीरंगा के पास प्रस्तावित लक्जरी होटल के विरोध में प्रदर्शन
- निंदा करने वाले
- असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई
- पिछला मामला
- सोनम वांगचुक को एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया था
पृष्ठभूमि
असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने भूमि अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत में लिए जाने की कड़ी निंदा की है। डोले को 12 जुलाई को काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पास प्रस्तावित लक्जरी होटल के विरोध में प्रदर्शनों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था।
असम सरकार ने 30 जुलाई को डोले के खिलाफ एनएसए लागू किया, ठीक एक दिन बाद जिला अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी। यह कदम विवादास्पद रहा है, और गोगोई ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया है।
वर्तमान स्थिति
गोगोई ने एक बयान में कहा, "मैं एनएसए के तहत प्रणब डोले की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करता हूं। काजीरंगा में एक होटल परियोजना को राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला नहीं माना जा सकता। एनएसए के दुरुपयोग के माध्यम से यह सरकार नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनने की कोशिश कर रही है।"
उन्होंने आगे कहा, "कोई भी प्रणब डोले और उनके सहयोगियों से सहमत या असहमत हो सकता है, लेकिन संविधान हर नागरिक को सवाल पूछने का अधिकार देता है।" गोगोई ने यह भी कहा कि अदालत द्वारा जमानत देने के बाद एनएसए लागू करना यह साबित करता है कि सरकार समाज को चुप रखना चाहती है।
कांग्रेस नेता ने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट आने वाले दिनों में एनएसए के दुरुपयोग का संज्ञान लेगा। उन्होंने सोनम वांगचुक के मामले का भी जिक्र किया, जिन्हें बीजेपी सरकार ने एनएसए के तहत कई महीनों तक हिरासत में रखा था।
प्रभाव
इस घटनाक्रम से असम में नागरिक समाज और राजनीतिक दलों के बीच चिंता बढ़ गई है। कांग्रेस ने डोले को हर संभव समर्थन देने की बात कही है, जिससे आगामी दिनों में राजनीतिक आंदोलन तेज हो सकता है।
एनएसए के तहत हिरासत का मतलब है कि डोले को बिना मुकदमे के अधिकतम 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है, जिससे उनकी कानूनी लड़ाई लंबी खिंच सकती है। इससे काजीरंगा में होटल परियोजना के विरोध प्रदर्शनों पर भी असर पड़ सकता है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि सुप्रीम कोर्ट एनएसए के इस इस्तेमाल की समीक्षा करता है, तो डोले को राहत मिल सकती है, लेकिन यह अनिश्चित है। गोगोई की अपील के बाद अदालत की ओर से संज्ञान लिया जाना अभी स्पष्ट नहीं है।
अगर सरकार अपने रुख पर कायम रहती है, तो विरोध प्रदर्शन और तेज हो सकते हैं, और कांग्रेस सहित अन्य दलों द्वारा इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से भुनाने की संभावना है। हालांकि, यह देखना बाकी है कि क्या एनएसए की कार्रवाई को कानूनी चुनौती दी जाएगी।
फिलहाल, डोले की हिरासत की अवधि और उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्यवाही पर निर्भर करेगा कि यह मामला कितना आगे बढ़ता है।
स्रोत: theshillongtimes.com



