मुख्य तथ्य
- वादी
- निंटेंडो कंपनी लिमिटेड (जापान)
- प्रतिवादी
- निंटेंडो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (बिहार)
- अदालत
- दिल्ली हाईकोर्ट, जस्टिस ज्योति सिंह
- आदेश
- अंतरिम निषेधाज्ञा (एक पक्षीय)
- धारा
- ट्रेड मार्क्स एक्ट, 1999 की धारा 29(4)
- नोटिस
- फरवरी 2026 में भेजा गया
पृष्ठभूमि
जापानी गेमिंग कंपनी निंटेंडो कंपनी लिमिटेड ने बिहार की एक रियल एस्टेट कंपनी के खिलाफ ट्रेडमार्क उल्लंघन का मुकदमा दिल्ली हाईकोर्ट में दायर किया था। याचिका में आरोप लगाया गया कि बिहार की कंपनी 'निंटेंडो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' नाम का इस्तेमाल करके निंटेंडो की प्रतिष्ठा का फायदा उठा रही है।
निंटेंडो ने अदालत को बताया कि उसकी स्थापना 1889 में जापान में हुई थी और शुरुआत में वह ताश के पत्ते बनाती थी। बाद में कंपनी ने इलेक्ट्रॉनिक मनोरंजन और वीडियो गेम के क्षेत्र में कदम रखा। उसके उत्पादों में गेम बॉय, निंटेंडो डीएस, वी, निंटेंडो स्विच और निंटेंडो स्विच 2 शामिल हैं। कंपनी के पास सुपर मारियो ब्रदर्स, द लीजेंड ऑफ ज़ेल्डा, पोकेमॉन और डोंकी कोंग जैसे लोकप्रिय गेमिंग फ्रैंचाइज़ भी हैं।
निंटेंडो ने दावा किया कि 'निंटेंडो' एक गढ़ा हुआ शब्द है जो उसका हाउस मार्क, कॉर्पोरेट नाम और ब्रांड पहचान का सबसे प्रमुख हिस्सा है। कंपनी ने 1983 में भारत में क्लास 28 में NINTENDO वर्ड मार्क पंजीकृत कराने के लिए आवेदन किया था, जिसे बाद में मंजूरी मिल गई।
वर्तमान स्थिति
दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस ज्योति सिंह ने पाया कि जापानी कंपनी ने प्रथम दृष्टया मामला स्थापित कर दिया है और एक पक्षीय अंतरिम निषेधाज्ञा जारी की। अदालत ने कहा, "वादी की दशकों पुरानी प्रतिष्ठा और साख को देखते हुए, यह प्रथम दृष्टया स्पष्ट है कि विवादित नाम को अपनाने का उद्देश्य वादी की प्रतिष्ठा और साख का फायदा उठाना है, ताकि जनता को यह गलतफहमी हो कि प्रतिवादी संख्या 1-3 का वादी से कोई संबंध या जुड़ाव है।"
निंटेंडो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड पटना में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ के साथ पंजीकृत है। अदालत में रखे गए दस्तावेजों के अनुसार, यह कंपनी भूमि और अन्य अचल संपत्तियों के अधिग्रहण, प्रबंधन और सौदे में लगी हुई है। निंटेंडो को नवंबर 2025 में इस कंपनी के बारे में पता चला और उसने फरवरी 2026 में एक कानूनी नोटिस भेजा, जिसका शुरू में कोई जवाब नहीं मिला।
बाद में एक निदेशक ने ईमेल से जवाब दिया कि उसने कभी भी विवादित कंपनी के नाम का इस्तेमाल व्यवसाय के लिए नहीं किया और न ही उसका इरादा है, और वह स्थायी निषेधाज्ञा का आदेश मानने को तैयार है। अन्य प्रतिवादी अदालत में पेश नहीं हुए।
| तिथि | घटना |
|---|---|
| 1889 | निंटेंडो की स्थापना जापान में |
| 1983 | भारत में NINTENDO वर्ड मार्क के लिए आवेदन |
| नवंबर 2025 | निंटेंडो को प्रतिवादी कंपनी के बारे में पता चला |
| फरवरी 2026 | सीज़-एंड-डिसिस्ट नोटिस भेजा गया |
| 2026-08-04 | दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश |
प्रभाव
अदालत ने पाया कि निंटेंडो ने भारत में ट्रेड मार्क्स एक्ट, 1999 की धारा 29(4) के तहत आवश्यक प्रतिष्ठा हासिल कर ली है। यह प्रावधान पंजीकृत स्वामी को असमान वस्तुओं या सेवाओं के संबंध में भी अपने मार्क के इस्तेमाल को रोकने की अनुमति देता है, बशर्ते वैधानिक शर्तें पूरी हों।
अदालत ने यह भी कहा कि धारा 29(4) का उपयोग करने के लिए निंटेंडो के लिए अपने ट्रेडमार्क को औपचारिक रूप से 'सुप्रसिद्ध ट्रेडमार्क' घोषित कराना आवश्यक नहीं है। अदालत ने पाया कि 'निंटेंडो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' नाम 'निंटेंडो कंपनी लिमिटेड' और निंटेंडो के पंजीकृत मार्कों से भ्रामक रूप से समान है।
इस समानता से जनता और व्यापार में भ्रम पैदा होने की संभावना है, भले ही प्रतिवादी रियल एस्टेट क्षेत्र में काम करते हों। अदालत ने कंपनी, उसके निदेशकों, अज्ञात प्रतिवादियों और उनकी ओर से काम करने वाले किसी भी व्यक्ति को 'निंटेंडो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' या NINTENDO मार्क का उपयोग करने से रोक दिया है।
आगे की संभावना
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि प्रतिवादी अदालत के आदेश का पालन नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही हो सकती है। हालांकि, मामले की अंतिम सुनवाई अभी बाकी है, और अदालत अंतिम फैसले में स्थायी निषेधाज्ञा दे सकती है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है।
यदि निंटेंडो को स्थायी निषेधाज्ञा मिलती है, तो बिहार की कंपनी को अपना नाम बदलना पड़ सकता है। अन्यथा, यह मामला आगे बढ़ सकता है और अदालत में लंबी सुनवाई हो सकती है।
इस फैसले का असर अन्य कंपनियों पर भी पड़ सकता है जो बिना अनुमति के प्रसिद्ध ब्रांडों के नाम का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन यह केवल एक संभावना है।
स्रोत: barandbench.com



