मुख्य तथ्य
- आंदोलन की तारीख
- 26 नवंबर 2026
- प्रदर्शन स्थल
- नई दिल्ली और देश के लगभग 100 स्थान
- मांगों की संख्या
- 7
- 10 अगस्त को विरोध स्थल
- लगभग 1,000 स्थान
- MGNREGA मांग
- 200 दिन काम, ₹700 दैनिक वेतन
- MSP फॉर्मूला
- C2+50% (स्वामीनाथन आयोग)
पृष्ठभूमि
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने 26 नवंबर 2026 से शुरू होने वाले देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि किसान राष्ट्रीय राजधानी और देश के करीब 100 स्थानों पर समन्वित बहु-दिवसीय विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार सात प्रमुख मांगों को स्वीकार नहीं कर लेती।
यह घोषणा 28 जुलाई को नई दिल्ली के सिविक सेंटर ऑडिटोरियम में हुई SKM की अखिल भारतीय कन्वेंशन के बाद की गई है, जिसमें देश भर से लगभग 1,200 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके बाद 29 जुलाई को तालकटोरा स्टेडियम में मजदूरों और किसानों का राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ, जिसमें लगभग 5,000 प्रतिनिधि शामिल हुए।
SKM ने आंदोलन की शुरुआत 2020-21 के किसान आंदोलन से जोड़ी है, जो दिल्ली की सीमाओं पर 385 दिनों तक चला और नवंबर 2021 में तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के निरसन के साथ समाप्त हुआ। संगठन का दावा है कि 9 दिसंबर 2021 को केंद्र सरकार द्वारा लिखित आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित किया गया था, लेकिन पिछले पांच वर्षों में किसानों से किए गए कई वादे अधूरे रह गए हैं।
वर्तमान स्थिति
SKM ने कहा कि वह इस साल की शुरुआत से ही समर्थन जुटा रहा है। 16 जनवरी को गांवों में किसानों ने पहले के आश्वासनों को लागू करने तक संघर्ष तेज करने की शपथ ली। संगठन ने 12 फरवरी को हुई राष्ट्रव्यापी हड़ताल, 9 मार्च को जंतर-मंतर पर आयोजित मजदूर-किसान संसद और 1 अप्रैल को चार श्रम संहिताओं के विरोध में मनाए गए राष्ट्रव्यापी 'काले दिन' में अपने समर्थन का उल्लेख किया।
कन्वेंशन में SKM ने सात सूत्री मांग पत्र अपनाया, जिसमें स्वामीनाथन आयोग के फॉर्मूले C2+50 प्रतिशत के आधार पर MSP की कानूनी गारंटी और सभी फसलों की खरीद, व्यापक कर्ज माफी, चार श्रम संहिताओं को वापस लेना, MGNREGA की बहाली और विस्तार (200 दिन काम और ₹700 दैनिक वेतन), बिजली निजीकरण विधेयक, बीज विधेयक और NFSA संशोधन को रद्द करना, कृषि को प्रभावित करने वाले मुक्त व्यापार समझौतों का विरोध, और भूमि अधिग्रहण तथा कॉर्पोरेट भूमि पूलिंग को रोकना शामिल है।
कन्वेंशन ने छह सूत्री कार्य योजना भी मंजूर की। 10 अगस्त को देश भर में लगभग 1,000 स्थानों पर जेल भरो, रेल रोको और रोड रोको जैसे कार्यक्रम होंगे। 17 अगस्त को प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों, विपक्ष के नेताओं और निर्वाचित प्रतिनिधियों को मांग पत्र सौंपेंगे। 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी की घटना की याद में गांव स्तर पर महापंचायतें होंगी।
| क्रम | मांग |
|---|---|
| 1 | भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते पर रोक, सभी FTA रद्द करें |
| 2 | MSP @ C2+50% पर कानून, सभी फसलों की खरीद की गारंटी |
| 3 | व्यापक कर्ज माफी, प्रत्येक किसान आत्महत्या पीड़ित परिवार को ₹25 लाख मुआवजा |
| 4 | चार श्रम संहिताएं रद्द करें, सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन ₹31,000 |
| 5 | MGNREGA बहाल करें, 200 दिन काम और ₹700 वेतन सुनिश्चित करें |
| 6 | बिजली निजीकरण विधेयक 2025, बीज विधेयक 2025 और NFSA संशोधन विधेयक वापस लें |
| 7 | जबरन भूमि अधिग्रहण और कॉर्पोरेट भूमि पूलिंग पर रोक, LARR 2013, FRA 2006 और PESA 1996 के तहत भूमि अधिकारों की रक्षा |
प्रभाव
SKM के अनुसार, आगामी आंदोलन मजदूर संघों, कृषि मजदूरों, छात्रों, युवाओं, महिला संगठनों और अन्य सामाजिक समूहों के साथ समन्वित होगा। संगठन का कहना है कि यह आंदोलन कृषि संकट, श्रम मुद्दों और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी चिंताओं को संबोधित करना चाहता है।
SKM ने आरोप लगाया कि सरकार ने चार श्रम संहिताएं, बिजली क्षेत्र सुधार, कृषि आदानों को प्रभावित करने वाले संशोधन और खाद्य भंडारण तथा खरीद में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने वाली नीतियां पेश की हैं। संगठन ने भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते जैसे प्रस्तावित व्यापार समझौतों पर चिंता जताई है, जिससे कृषि उत्पादों का आयात बढ़ सकता है और घरेलू किसान तथा छोटे उद्यम प्रभावित हो सकते हैं।
आंदोलन का सीधा असर दिल्ली और देश भर के लगभग 100 स्थानों पर यातायात और सार्वजनिक जीवन पर पड़ सकता है। 10 अगस्त को 1,000 स्थानों पर रेल रोको और रोड रोको जैसे कार्यक्रमों से आम जनता को असुविधा हो सकती है। हालांकि, SKM ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि प्रदर्शनों के सटीक स्थान और प्रारूप क्या होंगे।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
SKM ने कहा है कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार उसकी प्रमुख मांगों को पूरा नहीं करती। यदि सरकार मांगों पर विचार नहीं करती है, तो 2020-21 के आंदोलन के समान एक और लंबा किसान आंदोलन हो सकता है। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि सरकार क्या रुख अपनाएगी।
यदि सरकार MSP की कानूनी गारंटी और कर्ज माफी जैसी मांगों पर सहमति जताती है, तो आंदोलन समाप्त हो सकता है। लेकिन अगर सरकार इन मांगों को खारिज करती है, तो आंदोलन लंबा खिंच सकता है और देश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं।
SKM ने कहा है कि वह 26 नवंबर से दिल्ली और 100 स्थानों पर किसान मार्च और बहु-दिवसीय धरना शुरू करेगा। प्रदर्शनों के सटीक स्थान और प्रारूप की घोषणा बाद में की जाएगी। यह देखना होगा कि सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत होती है या नहीं।
स्रोत: theindianawaaz.com
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आंकड़े, तुलना और घटनाक्रम—एक ही जगह, बिना अनुमान के
आंदोलन की मुख्य तिथियां
- 01
अखिल भारतीय कन्वेंशन
नई दिल्ली के सिविक सेंटर ऑडिटोरियम में लगभग 1,200 प्रतिनिधियों ने भाग लिया
- 02
राष्ट्रीय सम्मेलन
तालकटोरा स्टेडियम में लगभग 5,000 प्रतिनिधि शामिल हुए
- 03
राष्ट्रव्यापी विरोध दिवस
लगभग 1,000 स्थानों पर जेल भरो, रेल रोको, रोड रोको
- 04
मांग पत्र सौंपना
प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और विपक्ष के नेताओं को मांग पत्र सौंपे जाएंगे
- 05
गांव स्तर पर महापंचायत
लखीमपुर खीरी शहीद दिवस के रूप में मनाया जाएगा
- 06
किसान मार्च और धरना
नई दिल्ली और लगभग 100 स्थानों पर बहु-दिवसीय आंदोलन शुरू
स्रोत:स्रोत: theindianawaaz.com स्रोत-समर्थित



