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गौहाटी उच्च न्यायालय ने अरुणाचल पुलिस पदोन्नति नियमों में संशोधन को संवैधानिक ठहराया

गौहाटी उच्च न्यायालय ने अरुणाचल प्रदेश पुलिस सेवा (संशोधन) नियम 2025 के नियम 5(1)(ख) को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया। न्यायालय ने कहा कि तीन फीडर कैडरों में निरीक्षकों की स्वीकृत संख्या के आधार पर पदोन्नति कोटा आवंटित करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन नहीं करता।

मुख्य तथ्य

मामला
कायिन एरिंग और 4 अन्य बनाम अरुणाचल प्रदेश राज्य और 15 अन्य
न्यायालय
गौहाटी उच्च न्यायालय (खंडपीठ: न्यायमूर्ति कार्दक एटे और न्यायमूर्ति बुदि हबुंग)
चुनौती
अरुणाचल प्रदेश पुलिस सेवा (संशोधन) नियम 2025 का नियम 5(1)(ख)
कोटा
सिविल पुलिस: 79.39%, IRBn: 15.35%, AAPBn: 5.26%
परिणाम
याचिका खारिज, नियम संवैधानिक रूप से वैध

पृष्ठभूमि

अरुणाचल प्रदेश पुलिस सेवा (संशोधन) नियम 2025 के नियम 5(1)(ख) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए निरीक्षकों ने गौहाटी उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि यह नियम मनमाना, अतार्किक और संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करता है।

पूर्व में पदोन्नति कोटा कैडर-वार स्वीकृत पदोन्नति पदों के आधार पर तय किया जाता था। नए नियमों के तहत यह कोटा तीन फीडर कैडरों—सिविल पुलिस, भारत रिजर्व बटालियन (आईआरबीएन) और अरुणाचल सशस्त्र पुलिस बटालियन (एएपीबीएन)—में निरीक्षकों की स्वीकृत संख्या के आधार पर निर्धारित किया गया है।

वर्तमान स्थिति

न्यायमूर्ति कार्दक एटे और न्यायमूर्ति बुदि हबुंग की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि नया नियम आईआरबीएन के निरीक्षकों की पदोन्नति के अवसरों को न तो छीनता है और न ही समाप्त करता है, बल्कि यह तीनों कैडरों के बीच पदोन्नति कोटा के वितरण का पुनर्गठन मात्र है।

न्यायालय ने कहा कि सरकारी कर्मचारी का यह अधिकार नहीं है कि सेवा शर्तों या पदोन्नति के नियम हमेशा अपरिवर्तित रहें। न्यायालय ने पी.यू. जोशी बनाम महालेखाकार, अहमदाबाद (2003) के फैसले का हवाला दिया।

न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं के इस तर्क को खारिज कर दिया कि नए नियम कैडर-वार आरक्षित पदोन्नति पदों में बदलाव करते हैं। न्यायालय ने कहा कि तीनों फीडर कैडरों में से किसी भी निरीक्षक को एंट्री ग्रेड में पदोन्नत होने के बाद वह अपने मूल कैडर में विशेष रूप से सेवा नहीं करता, बल्कि सामान्य पुलिस सेवा का सदस्य बन जाता है।

फीडर कैडरों के लिए पदोन्नति कोटा
कैडर कोटा (%)
सिविल पुलिस79.39
भारत रिजर्व बटालियन (IRBn)15.35
अरुणाचल सशस्त्र पुलिस बटालियन (AAPBn)5.26
आंकड़े न्यायालय के फैसले में उल्लिखित स्वीकृत संख्या पर आधारित हैं।

प्रभाव

इस फैसले का सीधा असर अरुणाचल प्रदेश पुलिस के तीनों फीडर कैडरों—सिविल पुलिस, आईआरबीएन और एएपीबीएन—के निरीक्षकों पर पड़ेगा। नए नियमों के तहत सिविल पुलिस को 79.39%, आईआरबीएन को 15.35% और एएपीबीएन को 5.26% पदोन्नति कोटा मिलेगा।

आईआरबीएन के निरीक्षकों के लिए पदोन्नति के पद 17 से घटकर 9 हो गए हैं, जिससे उनके पदोन्नति के अवसर सीमित हुए हैं। हालांकि, न्यायालय ने इसे स्वीकार्य ठहराया क्योंकि यह पूरी तरह से पदोन्नति के अवसरों को समाप्त नहीं करता।

यह फैसला राज्य सरकार को पुलिस सेवा में संरचनात्मक सुधार करने की अनुमति देता है, जिससे विभिन्न कैडरों के बीच पदोन्नति में असंतुलन को दूर किया जा सके।

भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि याचिकाकर्ता इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देते हैं, तो उच्चतम न्यायालय इस मामले में अंतिम निर्णय कर सकता है। संभावना है कि सर्वोच्च न्यायालय इस फैसले को बरकरार रखे, क्योंकि यह पूर्व न्यायिक सिद्धांतों के अनुरूप है।

यदि राज्य सरकार भविष्य में फीडर कैडरों की संरचना में बदलाव करती है, तो पदोन्नति कोटा में फिर से संशोधन हो सकता है। हालांकि, ऐसा कोई संकेत अभी नहीं है।

यह फैसला अन्य राज्यों में भी पुलिस पदोन्नति नियमों में सुधार के लिए एक मिसाल बन सकता है, लेकिन यह देखना होगा कि अन्य राज्य इसका अनुसरण करते हैं या नहीं।

स्रोत: livelaw.in

AMRIT EXPLAINER

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तुलना

फीडर कैडरों में पदोन्नति कोटा

कोटा
79.3959.542539.69519.8475079.3915.355.26सिविल पुलिससिविल पुलिसIRBnIRBnAAPBnAAPBnइकाई: %
सिविल पुलिस79.39 %
IRBn15.35 %
AAPBn5.26 %

AAPBn5.26 %

सटीक आंकड़े देखें
श्रेणीकोटा
सिविल पुलिस79.39 %
IRBn15.35 %
AAPBn5.26 %

स्रोत:गौहाटी उच्च न्यायालय के फैसले में दिए गए आंकड़े। स्रोत-समर्थित

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