मुख्य तथ्य
- ज्ञापन किसने सौंपा
- तेगबीर सिंह के नेतृत्व में सिखों के एक समूह ने
- ज्ञापन किसे सौंपा गया
- एसजीपीसी सचिव बलविंदर सिंह कहलवां, गोल्डन टेंपल जनरल मैनेजर मेजर सिंह, सचिवालय प्रभारी बगीचा सिंह
- सरूप भेजने का आधार
- अकाल तख्त के 2009 के नियम और एसजीपीसी कार्यकारिणी का प्रस्ताव
- सरूप कहां पहुंचे
- गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, सुरी
- भाजपा की मांग
- सरूपों के परिवहन की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच
पृष्ठभूमि
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने गुरु ग्रंथ साहिब के सरूपों को कनाडा भेजे जाने के मामले में स्पष्टीकरण दिया है। एसजीपीसी सचिव बलविंदर सिंह कहलवां ने बताया कि यह प्रक्रिया अकाल तख्त द्वारा 2009 में बनाए गए नियमों और एसजीपीसी कार्यकारिणी समिति के प्रस्ताव के अनुसार पूरी की गई।
इस संबंध में वैंकूवर और लोअर मेनलैंड (कनाडा) की संगत की ओर से सुझाव तेगबीर सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने अकाल तख्त सचिवालय में ज्ञापन के रूप में सौंपा। यह ज्ञापन एसजीपीसी सचिव बलविंदर सिंह कहलवां, गोल्डन टेंपल जनरल मैनेजर मेजर सिंह और सचिवालय प्रभारी बगीचा सिंह ने प्राप्त किया।
वर्तमान स्थिति
कहलवां ने स्पष्ट किया कि सरूप कनाडा भेजे जाने से पहले स्थानीय संगत से अनुरोध मिला था और नियमों का पालन किया गया। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में कोई अनादर या लापरवाही नहीं हुई। दुनिया भर में सिखों के रहने के कारण एसजीपीसी को नियमित रूप से सरूप भेजने के अनुरोध मिलते रहते हैं।
संगत के कुछ सदस्यों ने सरूपों के विदेश परिवहन के मौजूदा नियमों में बदलाव के सुझाव दिए थे, जिन्हें अकाल तख्त के ध्यान में लाया गया है। आज सौंपा गया पत्र स्वीकार कर लिया गया है और इसे अकाल तख्त जत्थेदार के समक्ष रखा जाएगा। सिख उच्च पुजारियों के विचार-विमर्श के बाद जारी निर्देशों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। तब तक सरूप विदेश नहीं भेजे जाएंगे।
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| नियम | अकाल तख्त 2009 |
| प्रस्ताव | एसजीपीसी कार्यकारिणी |
| परिवहन साधन | नई डिजाइन की पालकी शैली की बस |
| स्थापना स्थल | गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, सुरी |
| निरीक्षण | राजिंदर सिंह मेहता, बीबी हरजिंदर कौर |
प्रभाव
कहलवां ने उन अफवाहों को पूरी तरह झूठा बताया कि सरूपों को कंटेनर और जीर्ण-शीर्ण बस में भेजा गया और नमी से उन्हें नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा कि पवित्र बीड़ों को नए डिजाइन की पालकी शैली की बस में सिख परंपराओं और नियमों के अनुसार 'सुखासन' में भेजा गया। कनाडा पहुंचने पर पंज प्यारों की उपस्थिति में पूरे सम्मान के साथ स्वागत किया गया और संबंधित गुरुद्वारे में स्थापित किया गया।
भेजने से पहले एसजीपीसी सदस्य राजिंदर सिंह मेहता ने गुरुद्वारे का निरीक्षण किया और सभी व्यवस्थाएं सिख आचार संहिता के अनुरूप पाईं। कनाडा पहुंचने के बाद गुरुद्वारा प्रबंधन ने सहज पाठ के साथ धन्यवाद समारोह आयोजित किया। एसजीपीसी कार्यकारिणी सदस्य बीबी हरजिंदर कौर ने भी गुरुद्वारे का दौरा किया और व्यवस्थाएं संतोषजनक पाईं। सरूप सुरी स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में सुरक्षित पहुंचे और समुदाय से कई प्रशंसा पत्र मिले।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
भविष्य में सरूपों के विदेश भेजने की प्रक्रिया अकाल तख्त जत्थेदार के फैसले पर निर्भर करेगी। यदि उच्च पुजारी सुझावों पर विचार करते हैं, तो नियमों में संशोधन हो सकता है। तब तक सरूप विदेश नहीं भेजे जाएंगे।
भाजपा प्रवक्ता प्रोफेसर सरचंद सिंह खियाला ने कंटेनर में सरूप भेजे जाने की खबरों पर गहरा दुख जताया और एसजीपीसी से निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग की। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। एसजीपीसी भविष्य में विवादों से बचने के लिए एक व्यापक प्रोटोकॉल भी तैयार कर सकती है।
स्रोत: tribuneindia.com



