मुख्य तथ्य
- बोर्ड ऑफ पीस के उच्च प्रतिनिधि
- निकोलाई एवतिमोव म्लादेनोव
- इज़राइल पर आरोप
- 2 अगस्त को 18 नागरिकों की हत्या और चिकित्सा आपूर्ति नष्ट करना
- मध्यस्थ देश
- मिस्र, तुर्किये, कतर और अमेरिका
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव
- 2803 (2025), गाजा में अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल 2027 तक
- रूस और चीन की स्थिति
- प्रस्ताव से अनुपस्थित, आलोचनात्मक
पृष्ठभूमि
गाजा में स्थायी शांति स्थापित करने के उद्देश्य से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सितंबर 2025 में प्रस्तावित बोर्ड ऑफ पीस की स्थापना की गई थी। इस बोर्ड के संस्थापक सदस्यों में अमेरिका, इज़राइल, सऊदी अरब, मिस्र, कतर, तुर्किये, बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, यूएई, पाकिस्तान और मोरक्को शामिल हैं। अन्य सदस्यों में अल्बानिया, अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अज़रबैजान, बेलारूस, बुल्गारिया, कंबोडिया, एल साल्वाडोर, हंगरी, इंडोनेशिया, कज़ाखस्तान, कोसोवो, मंगोलिया, पैराग्वे, उज़्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं।
बोर्ड का उद्देश्य गाजा के पुनर्विकास के लिए रूपरेखा तैयार करना और वित्तपोषण का समन्वय करना है। हालांकि, इसके चार्टर में गाजा का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, बल्कि यह 'संघर्ष से प्रभावित या खतरे वाले क्षेत्रों में स्थिरता को बढ़ावा देने, विश्वसनीय और कानूनी शासन बहाल करने और स्थायी शांति सुनिश्चित करने' की बात करता है।
वर्तमान स्थिति
बोर्ड ऑफ पीस के उच्च प्रतिनिधि निकोलाई एवतिमोव म्लादेनोव ने कहा कि 'स्थायी शांति हासिल करना कठिन है, लेकिन अगर हर कोई सर्वोत्तम प्रयास करे तो यह संभव है।' उन्होंने इज़राइल पर 2 अगस्त को 18 'नागरिकों' की हत्या और 'चिकित्सा आपूर्ति' को नष्ट करके युद्ध विराम को लगातार तोड़ने का आरोप लगाया।
म्लादेनोव ने कहा कि इज़राइली बमबारी ऐसे समय में हुई जब वे और उनकी टीम तनाव कम करने और राष्ट्रपति की योजना के पूर्ण कार्यान्वयन के लिए जगह बनाने के लिए काम कर रहे थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि बोर्ड ऑफ पीस और मध्यस्थों (मिस्र, तुर्किये, कतर और अमेरिका) ने फिलिस्तीनी गुटों को राष्ट्रपति ट्रंप की योजना के पूर्ण कार्यान्वयन, नागरिक शासन सौंपने और अपने हथियारों को निष्क्रिय करने के लिए एक रोडमैप पर सहमत करने के लिए गहन प्रयास किए।
फिलिस्तीनी मीडिया के अनुसार, रूपरेखा समझौते की घोषणा के बाद से इज़राइल द्वारा बमबारी का एक भी दिन नहीं गुजरा है। इज़राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन-गविर ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार्य बताते हुए खारिज कर दिया और गाजा में लक्षित हत्याएं जारी रखने तथा फिलिस्तीनियों के प्रवासन पर जोर दिया।
| क्षेत्र | देश |
|---|---|
| मध्य पूर्व | इज़राइल, सऊदी अरब, मिस्र, कतर, तुर्किये, बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, यूएई, मोरक्को |
| दक्षिण एशिया | पाकिस्तान |
| यूरोप | अल्बानिया, बुल्गारिया, हंगरी, कोसोवो, उज़्बेकिस्तान |
| अमेरिका | अमेरिका, अर्जेंटीना, ब्राजील, मेक्सिको, पैराग्वे, एल साल्वाडोर |
| एशिया | आर्मेनिया, अज़रबैजान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, कज़ाखस्तान, मंगोलिया, वियतनाम |
| अन्य | बेलारूस, जॉर्डन, मोरक्को |
प्रभाव
कतर, मिस्र और तुर्किये ने गाजा में युद्ध विराम के इज़राइली उल्लंघनों की 'कड़ी निंदा और भर्त्सना' करते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया। तुर्किये ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर 'अमेरिका को कमजोर करने' का आरोप लगाया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से नेतन्याहू के विस्तारवादी और सैन्यवादी मानसिकता के खिलाफ दृढ़ रुख अपनाने का आग्रह किया।
कतर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इज़राइल पर फिलिस्तीनी अधिकारों के उल्लंघन को समाप्त करने और रोडमैप के पूर्ण कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए दबाव डालने का आह्वान किया। मिस्र ने जोर देकर कहा कि इज़राइल को गाजा से हटना होगा और फिलिस्तीनियों को मानवीय सहायता की अनुमति देनी होगी।
यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय संघ के सदस्य देशों ने आशंका जताई कि बोर्ड ऑफ पीस संयुक्त राष्ट्र को कमजोर कर सकता है, राष्ट्रपति ट्रंप को एकमात्र वीटो शक्ति दे सकता है और राष्ट्रीय संविधानों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के साथ संघर्ष पैदा कर सकता है। वेटिकन सिटी ने भी इसी तरह की आपत्तियां जताईं। ब्राजील और मेक्सिको ने फिलिस्तीनी अनुपस्थिति का हवाला देते हुए खुद को अलग कर लिया।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि गाजा में शांति स्थापित होती है और दो-राज्य समाधान साकार होता है, तो राष्ट्रपति ट्रंप बोर्ड ऑफ पीस चार्टर के लिए एक ठोस आधार तैयार कर सकते हैं। कई राजनयिकों का मानना है कि यह बोर्ड की विश्वसनीयता बढ़ा सकता है।
यदि फिलिस्तीनियों के लिए सच्ची शांति हासिल नहीं होती है, तो चीन और रूस शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) और राष्ट्रमंडल स्वतंत्र राज्यों (सीआईएस) को व्यापक प्रभाव डालने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं या बोर्ड ऑफ पीस के समान कोई संयुक्त पहल कर सकते हैं।
रूस और चीन बोर्ड ऑफ पीस की भविष्य में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका अपनाने की संभावना से चिंतित हैं, जहां उनके पास वीटो शक्ति है। वे अमेरिकी नेतृत्व में बोर्ड को शक्तिहीन होते देखना नहीं चाहते।
स्रोत: geo.tv



