मुख्य तथ्य
- जारी करने की तिथि
- 31 जुलाई 2026
- संशोधन की तिथि
- 30 जुलाई 2026
- कुल संशोधित प्रविष्टियाँ
- 5
- संबंधित UNSC प्रेस विज्ञप्ति
- SC/16425
- लागू संकल्प
- 1988 (2011), 2816 (2026)
- प्रभावित संस्थाएँ
- सभी वाणिज्यिक बैंक, SFB, भुगतान बैंक, सहकारी बैंक, RRB, NBFC, ARC, AIFI
पृष्ठभूमि
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 31 जुलाई 2026 को एक परिपत्र जारी कर सभी वाणिज्यिक बैंकों, लघु वित्त बैंकों, भुगतान बैंकों, शहरी/ग्रामीण सहकारी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, स्थानीय क्षेत्र बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियों और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की तालिबान प्रतिबंध सूची में हुए संशोधनों से अवगत कराया।
यह परिपत्र RBI के नो योर कस्टमर (KYC) निर्देश, 2025 (28 नवंबर 2025 को जारी, 29 दिसंबर 2025 को संशोधित) के अध्याय IX के तहत आता है, जो अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से प्राप्त संचार से संबंधित है। इसके तहत विनियमित संस्थाओं को यह सुनिश्चित करना होता है कि UAPA, 1967 की धारा 51A के अनुसार, उनके पास आतंकवादी संबंधों के संदेह वाले व्यक्तियों या संस्थाओं का कोई खाता नहीं है, जिनकी सूची UNSC द्वारा अनुमोदित और समय-समय पर जारी की जाती है।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने RBI को UNSC प्रेस विज्ञप्ति SC/16425 (30 जुलाई 2026) की जानकारी दी है, जिसमें 1988 (2011) संकल्प के तहत गठित समिति ने तालिबान प्रतिबंध सूची में संशोधन किए हैं। ये संशोधन संकल्प 2816 (2026) के पैराग्राफ 1 में उल्लिखित परिसंपत्ति फ्रीज, यात्रा प्रतिबंध और हथियार प्रतिबंध के अधीन व्यक्तियों और संस्थाओं की सूची में किए गए हैं।
वर्तमान स्थिति
UNSC की 1988 (2011) तालिबान प्रतिबंध सूची में कुल पाँच प्रविष्टियों में संशोधन किया गया है। संशोधनों में व्यक्तियों के नाम, जन्म तिथि, जन्म स्थान, पासपोर्ट विवरण, पते और अन्य पहचान संबंधी जानकारी में बदलाव शामिल हैं। ये संशोधन 30 जुलाई 2026 को लागू हुए हैं।
संशोधित प्रविष्टियों में तीन व्यक्तियों का विवरण स्पष्ट रूप से दिया गया है। पहले व्यक्ति हामिदुल्लाह नोमानी (TAi.044) हैं, जिन्हें तालिबान शासन (1996-2001) के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री और काबुल के मेयर के रूप में नामित किया गया है। उनकी जन्म तिथि लगभग 1968 या 28 अगस्त 1965 बताई गई है। दूसरे व्यक्ति अब्दुल-हक वसीक (TAi.082) हैं, जो तालिबान शासन में सुरक्षा (खुफिया) उप मंत्री थे। तीसरे व्यक्ति नूर मोहम्मद साकिब (TAi.110) हैं, जो तालिबान शासन के दौरान सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे।
इन संशोधनों में पासपोर्ट विवरण भी शामिल हैं। उदाहरण के लिए, हामिदुल्लाह नोमानी का अफगानिस्तान पासपोर्ट नंबर D0010694 है, जो 7 अप्रैल 2026 को काबुल में जारी हुआ और 7 अप्रैल 2031 तक वैध है। अब्दुल-हक वसीक के दो पासपोर्ट दर्ज हैं: एक 23 अक्टूबर 2021 को जारी (D0009755) और दूसरा 29 मार्च 2026 को जारी (D0010689)।
| क्रमांक | नाम | पदनाम | जन्म तिथि | पासपोर्ट संख्या | सूचीबद्ध तिथि |
|---|---|---|---|---|---|
| TAi.044 | हामिदुल्लाह नोमानी | उच्च शिक्षा मंत्री, काबुल के मेयर (1996-2001) | लगभग 1968 / 28 अगस्त 1965 | D0010694 | 23 फरवरी 2001 |
| TAi.082 | अब्दुल-हक वसीक | सुरक्षा (खुफिया) उप मंत्री (1996-2001) | 1971 / लगभग 1975 / 20 सितंबर 1968 | D0009755, D0010689 | 31 जनवरी 2001 |
| TAi.110 | नूर मोहम्मद साकिब | सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (1996-2001) | लगभग 1958 / 18 सितंबर 1963 / 19 अक्टूबर 1962 | जानकारी उपलब्ध नहीं | जानकारी उपलब्ध नहीं |
प्रभाव
इस परिपत्र का सीधा असर भारत में कार्यरत सभी विनियमित वित्तीय संस्थाओं पर पड़ेगा। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि संशोधित सूची में शामिल किसी भी व्यक्ति या संस्था का खाता उनके पास न हो। यदि कोई खाता पाया जाता है, तो उसे तुरंत फ्रीज करना होगा और संबंधित अधिकारियों को सूचित करना होगा।
इसका असर उन खातों पर भी पड़ सकता है जो पहले से मौजूद हैं, क्योंकि संशोधन के बाद नई जानकारी (जैसे नए पासपोर्ट नंबर) के आधार पर पहचान संभव हो सकेगी। वित्तीय संस्थाओं को अपनी ग्राहक सूची की समीक्षा करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी संशोधित प्रविष्टि से मेल न खाता हो।
यह कदम आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का पालन सुनिश्चित करने की दिशा में है। इससे भारतीय वित्तीय प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत होगा।
भविष्य की संभावनाएँ
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि वित्तीय संस्थाएँ इन संशोधनों का पालन करने में विफल रहती हैं, तो उन्हें RBI के निर्देशों के उल्लंघन के लिए जुर्माना या अन्य दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। हालाँकि, RBI ने अभी तक किसी विशिष्ट दंड का उल्लेख नहीं किया है।
आगे चलकर, UNSC द्वारा सूची में और संशोधन हो सकते हैं, जिसके लिए RBI समय-समय पर अद्यतन जारी कर सकता है। वित्तीय संस्थाओं को नियमित रूप से UNSC की सूची की निगरानी करनी होगी और अपने ग्राहक आधार को अद्यतन रखना होगा।
यदि भारत सरकार UAPA के तहत कोई अतिरिक्त निर्देश जारी करती है, तो वित्तीय संस्थाओं को उनका भी पालन करना होगा। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि इन संशोधनों के कारण कितने खाते प्रभावित होंगे, क्योंकि यह जानकारी उपलब्ध नहीं है।
स्रोत: Reserve Bank of India



