मुख्य तथ्य
- AIIMS रिपोर्ट
- आसाराम को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं, लेकिन प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं की निरंतर सहायता आवश्यक
- बीमारियां
- कोरोनरी धमनी रोग, ऑस्टियोपोरोसिस, क्रोनिक हाइपोनेट्रेमिया, थैलेसीमिया, रक्त हानि के साथ गैस्ट्रो समस्याएं
- सजा
- 2018 में विशेष POCSO अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई
- उच्च न्यायालय का फैसला
- IPC के तहत दोषसिद्धि बरकरार, POCSO के तहत दोषसिद्धि खारिज
- अगली सुनवाई
- गुरुवार को
पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट में आसाराम की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई जारी है, जिसमें उन्होंने 2013 के बलात्कार मामले में सजा को निलंबित करने की मांग की है। इस मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय ने उनकी सजा और आजीवन कारावास को बरकरार रखा था।
जोधपुर की एक विशेष POCSO अदालत ने अप्रैल 2018 में आसाराम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। यह सजा IPC की विभिन्न धाराओं के तहत दी गई थी, जिनमें बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, मानव तस्करी, गलत तरीके से कैद करना, आपराधिक धमकी और आपराधिक साजिश शामिल हैं।
उच्च न्यायालय ने IPC के तहत दोषसिद्धि को बरकरार रखा, लेकिन POCSO अधिनियम के तहत दोषसिद्धि को खारिज कर दिया। साथ ही, सह-आरोपी शारद और शिल्पी को बरी कर दिया गया, जिन्हें आपराधिक साजिश में सक्रिय भूमिका के लिए 20 साल की सजा सुनाई गई थी।
वर्तमान स्थिति
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल की है, जिसमें कहा गया है कि आसाराम को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उन्हें प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं की चौबीसों घंटे सहायता की आवश्यकता है।
रिपोर्ट में आसाराम की बीमारियों का उल्लेख किया गया है, जिनमें कोरोनरी धमनी रोग, ऑस्टियोपोरोसिस, क्रोनिक हाइपोनेट्रेमिया, थैलेसीमिया और रक्त हानि से जुड़ी बार-बार होने वाली गैस्ट्रो समस्याएं शामिल हैं।
जून में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका और सजा निलंबन के आवेदन पर नोटिस जारी किया था। हाल ही में अदालत ने आसाराम की गहन चिकित्सा जांच का आदेश दिया था और AIIMS से पूछा था कि क्या उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता है या समय-समय पर दवा से काम चल सकता है।
प्रभाव
AIIMS की रिपोर्ट के अनुसार, आसाराम को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है, जिसका अर्थ है कि उन्हें जेल में ही रखा जा सकता है, बशर्ते उन्हें प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं की निरंतर सहायता उपलब्ध हो।
इस रिपोर्ट से आसाराम की सजा निलंबन की याचिका पर फैसले में देरी हो सकती है, क्योंकि अदालत को यह तय करना है कि क्या उनकी चिकित्सा स्थिति को देखते हुए सजा निलंबित की जानी चाहिए।
इस मामले में पीड़िता और समाज के लिए यह महत्वपूर्ण है कि न्यायालय सजा निलंबन के आवेदन पर निर्णय करते समय चिकित्सा रिपोर्ट और मामले की गंभीरता दोनों पर विचार करे।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि सुप्रीम कोर्ट AIIMS की रिपोर्ट को स्वीकार करता है, तो आसाराम को अस्पताल में भर्ती करने के बजाय जेल में ही इलाज की व्यवस्था की जा सकती है, जिससे उनकी सजा निलंबन की याचिका खारिज हो सकती है।
हालांकि, यदि अदालत यह मानती है कि आसाराम की चिकित्सा स्थिति गंभीर है और उन्हें विशेष देखभाल की आवश्यकता है, तो वह सजा निलंबित करने पर विचार कर सकती है, लेकिन इसकी संभावना कम है क्योंकि AIIMS ने अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता से इनकार किया है।
मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होगी, जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता उपलब्ध होंगे। अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान रिपोर्ट पर विचार करेगी और उचित आदेश पारित कर सकती है।
स्रोत: livelaw.in



