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स्पेन और यूरोपीय संघ के बीच सेउटा संकट पर तनाव, मंत्रियों की बैठक आज

यूरोपीय संघ के गृह मंत्री मंगलवार को सेउटा संकट से सबक लेने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंस करेंगे। स्पेन और सख्त रुख रखने वाले देशों के बीच तनाव है।

मुख्य तथ्य

घटना
सेउटा में अनुमानित 60,000 प्रवासियों का प्रवेश
बैठक
मंगलवार को गृह मंत्रियों की वीडियो कॉन्फ्रेंस
स्पेन का रुख
खुली प्रवासन नीति, साथी देशों की 'स्वार्थी' आलोचना
सख्त रुख वाले देश
इटली, डेनमार्क, जर्मनी, हंगरी सहित 22 देश
फ्रांस का रुख
पहल से दूरी, राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप
आयोग की सिफारिश
पांच क्षेत्रों में काम तेज करने का आह्वान

पृष्ठभूमि

मोरक्को से स्पेन के उत्तरी अफ्रीकी एन्क्लेव सेउटा में अनुमानित 60,000 लोगों के प्रवेश ने यूरोपीय संघ के 27 देशों में प्रवासन नीति को लेकर मतभेद उजागर कर दिए हैं। अधिकांश प्रवासी बाद में लौट गए हैं।

इस घटना के बाद स्पेन की सरकार और यूरोपीय संघ के कई सदस्य देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। स्पेन प्रवासन के प्रति अपेक्षाकृत खुला दृष्टिकोण रखता है, जबकि इटली और डेनमार्क जैसे देश सख्त रुख की वकालत कर रहे हैं।

वर्तमान स्थिति

यूरोपीय संघ के गृह मंत्रियों की मंगलवार सुबह 10:00 बजे (0800 GMT) वीडियो कॉन्फ्रेंस होगी, जिसमें देश आम सहमति बनाने या अपने रुख को मजबूत करने की कोशिश करेंगे। इटली और डेनमार्क ने स्पेन को शेंगेन क्षेत्र से निलंबित करने की मांग की थी, जिसे स्पेन ने खारिज कर दिया और जो कानूनी रूप से संभव नहीं है।

स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने शनिवार को यूरोपीय संघ के संस्थानों के प्रमुखों को पत्र लिखकर साथी देशों के 'स्वार्थी' रवैये की आलोचना की और आपात बैठक बुलाने की मांग की। इसके कुछ घंटों बाद, इटली, डेनमार्क, जर्मनी और हंगरी के नेतृत्व में 22 देशों ने भी तत्काल वार्ता की मांग करते हुए पत्र भेजा, लेकिन सख्त रुख के साथ।

फ्रांस ने इस पहल से दूरी बनाए रखी और कहा कि यह सेउटा की स्थिति का राजनीतिक फायदा उठाना है। पेरिस ने यह भी बताया कि अधिकांश प्रवासी पहले ही मोरक्को लौट चुके हैं।

सेउटा संकट पर प्रमुख देशों के रुख
देश रुख मुख्य बयान
स्पेनखुलासाथी देशों का 'स्वार्थी' रवैया
इटलीसख्तशेंगेन निलंबन की मांग
डेनमार्कसख्तअनियंत्रित प्रवासन खतरा
जर्मनीसख्त22 देशों के पत्र में शामिल
हंगरीसख्त22 देशों के पत्र में शामिल
फ्रांससंयमितराजनीतिक फायदा उठाने से बचें
स्रोत के अनुसार, 22 देशों ने सख्त रुख वाला पत्र भेजा, जिसमें इटली, डेनमार्क, जर्मनी और हंगरी शामिल थे।

प्रभाव

इस संकट ने यूरोपीय संघ के भीतर प्रवासन नीति को लेकर गहरी खाई को दिखाया है। स्पेन का कहना है कि उसे साथी देशों से पर्याप्त समर्थन नहीं मिल रहा है, जबकि कुछ देशों को लगता है कि स्पेन की नीतियों से यह संकेत मिलता है कि दरवाजे खुले हैं।

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने अनियमित प्रवासन से निपटने के लिए पांच क्षेत्रों में काम तेज करने का आह्वान किया है: साझेदार देशों के साथ सहयोग, बाहरी सीमाओं को मजबूत करना, शुरुआती चेतावनी प्रणाली, तस्करी नेटवर्क को नष्ट करना और वापसी को बढ़ावा देना।

भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

मंगलवार की बैठक को 'पहला कदम' बताते हुए वॉन डेर लेयेन ने उम्मीद जताई कि नेता अक्टूबर में होने वाले अगले शिखर सम्मेलन में इस मुद्दे को उठाएंगे। यदि सदस्य देश आम सहमति बनाने में सफल रहे, तो यूरोपीय संघ एक समन्वित प्रवासन नीति की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

हालांकि, यदि सख्त रुख रखने वाले देश अपनी मांगों पर अड़े रहे, तो तनाव बढ़ सकता है और नीतिगत गतिरोध जारी रह सकता है। यह भी संभावना है कि बैठक में केवल सैद्धांतिक सहमति बने और ठोस कदम न उठें।

स्रोत: aawsat.com

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