मुख्य तथ्य
- गिरफ्तारी
- छह आरोपी राजस्थान और मध्य प्रदेश से गिरफ्तार
- ठगी की राशि
- ₹4.29 लाख
- पीड़ित
- दिल्ली निवासी
- धोखाधड़ी का तरीका
- फर्जी ऑनलाइन प्रमोशनल टास्क और नकली क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म
- जांच
- बैंक रिकॉर्ड, यूपीआई लेनदेन, सीडीआर, एटीएम सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण
- जब्त सामान
- छह मोबाइल फोन
पृष्ठभूमि
दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को एक छह सदस्यीय अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया, जो कथित तौर पर टास्क-आधारित स्कैम और फर्जी क्रिप्टोकरेंसी निवेश धोखाधड़ी में शामिल था। आरोपियों को राजस्थान और मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने एक दिल्ली निवासी को फर्जी ऑनलाइन प्रमोशनल टास्क के जरिए ठगा, जिसमें उन्होंने ऊंचे कमीशन और आकर्षक रिटर्न का वादा किया। पीड़ित को एक नकली क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर निवेश के लिए प्रेरित किया गया।
वर्तमान स्थिति
पुलिस के अनुसार, पीड़ित को शुरू में एक डिजिटल मार्केटिंग कंपनी के प्रतिनिधि बताकर एक ग्रुप में जोड़ा गया। छोटे कमीशन देकर विश्वास जीतने के बाद, आरोपियों ने उसे दूसरे ग्रुप में शिफ्ट कर दिया, जहां उसे बड़ी राशि निवेश करने के लिए राजी किया गया।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि फ्रॉडस्टर्स ने फर्जी मुनाफा दिखाया और पीड़ित को कई यूपीआई आईडी और बैंक खातों के माध्यम से पैसे ट्रांसफर करने के लिए प्रेरित किया। जब पीड़ित ने पैसे निकालने की कोशिश की, तो आरोपियों ने दावा किया कि उसका ट्रेडिंग खाता फ्रीज हो गया है और खाता सक्रिय करने तथा निकासी प्रोसेसिंग के लिए अतिरिक्त भुगतान की मांग की।
पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद दक्षिण-पश्चिम जिले में ई-एफआईआर दर्ज की गई। जांच के दौरान पुलिस ने बैंक रिकॉर्ड, यूपीआई लेनदेन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, एटीएम सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल सबूतों का विश्लेषण किया।
| नाम | स्थान | भूमिका |
|---|---|---|
| सुरेश कुमार यादव | जयपुर | म्यूल अकाउंट धारक |
| पूरन मल यादव | जयपुर | खाता सुविधाकर्ता |
| अरशान मोहम्मद | इंदौर | नकदी निकासी |
| गुफरान कुरैशी | इंदौर | नकदी निकासी |
| अभिजीत पाटीदार | जानकारी उपलब्ध नहीं | बैंक खाता उपलब्ध कराना |
| आर्यन राठौर | जानकारी उपलब्ध नहीं | बैंक खाता उपलब्ध कराना |
प्रभाव
इस गिरफ्तारी से साइबर फ्रॉड सिंडिकेट के नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जो विभिन्न राज्यों में फैला हुआ था। पुलिस ने जयपुर से म्यूल अकाउंट धारक सुरेश कुमार यादव और खाता सुविधाकर्ता पूरन मल यादव को गिरफ्तार किया।
आगे की जांच में पता चला कि ठगी की गई राशि का कुछ हिस्सा इंदौर में एटीएम से निकाला गया था, जिसके बाद अरशान मोहम्मद और गुफरान कुरैशी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बाद में अभिजीत पाटीदार और आर्यन राठौर को भी गिरफ्तार किया, जिन्होंने कथित तौर पर धोखाधड़ी वाली राशि प्राप्त करने के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराए थे।
इस मामले में छह मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं, जिनमें आपत्तिजनक चैट मौजूद हैं। इस कार्रवाई से अन्य संभावित पीड़ितों को सतर्क रहने की आवश्यकता है, क्योंकि ऐसे सिंडिकेट विभिन्न तरीकों से लोगों को ठगते हैं।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
पुलिस ने कहा कि आगे की जांच जारी है। यदि जांच में सिंडिकेट के अन्य सदस्यों या बड़े नेटवर्क का पता चलता है, तो और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर, पुलिस को अन्य पीड़ितों के बारे में जानकारी मिल सकती है, जिससे ठगी की कुल राशि और अधिक हो सकती है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि क्या इस सिंडिकेट के अन्य सदस्य अभी भी सक्रिय हैं।
यदि लोग ऐसे फ्रॉड से बचने के लिए सतर्क रहें और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, तो ऐसे मामलों में कमी आ सकती है। लेकिन यह तभी संभव है जब जागरूकता बढ़े और पुलिस की कार्रवाई प्रभावी हो।
स्रोत: hindustantimes.com



