मुख्य तथ्य
- एकल स्वामित्व
- ओनर ड्रॉ, तिमाही अनुमानित कर
- साझेदारी
- गारंटीड भुगतान या ओनर ड्रॉ
- एलएलसी
- एकल-सदस्य: ओनर ड्रॉ; बहु-सदस्य: गारंटीड भुगतान या ड्रॉ
- एस-कॉर्पोरेशन
- उचित वेतन + वितरण
- सी-कॉर्पोरेशन
- वेतन + लाभांश, दोहरा कर
पृष्ठभूमि
व्यवसाय स्वामियों के लिए स्वयं को भुगतान करने का तरीका उनकी व्यवसाय संरचना पर निर्भर करता है। फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, एकल स्वामित्व, साझेदारी, एलएलसी, एस-कॉर्पोरेशन और सी-कॉर्पोरेशन जैसी संरचनाओं में भुगतान के अलग-अलग तरीके होते हैं।
कई व्यवसाय संरचनाएं, जिनमें एकल स्वामित्व, साझेदारी, एलएलसी और एस-कॉर्पोरेशन शामिल हैं, पास-थ्रू इकाइयां मानी जाती हैं, जिसका अर्थ है कि लाभ और हानि सीधे मालिकों के व्यक्तिगत कर रिटर्न में जाती है।
पास-थ्रू इकाई का प्रकार यह निर्धारित करता है कि मालिक को कंपनी का 'कर्मचारी' माना जाता है या नहीं और उन्हें भुगतान कैसे मिलता है।
वर्तमान स्थिति
एकल स्वामित्व में, मालिक को कर्मचारी नहीं माना जाता है और वे 'ओनर ड्रॉ' के माध्यम से भुगतान प्राप्त करते हैं, जिसमें वे व्यवसाय के लाभ से पैसा निकालते हैं। इन ड्रॉ से कोई कर नहीं काटा जाता है, और मालिक को तिमाही अनुमानित कर भुगतान करना होता है।
साझेदारी में, साझेदारों को गारंटीड भुगतान या ओनर ड्रॉ के माध्यम से भुगतान किया जाता है। गारंटीड भुगतान नियमित अंतराल पर तय राशि होती है, जो सेवाओं के लिए दी जाती है, और इस पर कोई आयकर नहीं काटा जाता है।
एलएलसी के सदस्यों को भी कर्मचारी नहीं माना जाता है; एकल-सदस्य एलएलसी एकल स्वामित्व की तरह काम करता है, जबकि बहु-सदस्य एलएलसी साझेदारी की तरह करों का भुगतान करता है। एस-कॉर्पोरेशन में, मालिकों को उचित वेतन मिलता है और अतिरिक्त लाभ वितरण के रूप में मिलता है। सी-कॉर्पोरेशन में, मालिकों को वेतन और लाभांश मिलता है, जिस पर दोहरा कर लगता है।
| संरचना | भुगतान विधि | कर निहितार्थ |
|---|---|---|
| एकल स्वामित्व | ओनर ड्रॉ | तिमाही अनुमानित कर |
| साझेदारी | गारंटीड भुगतान/ड्रॉ | तिमाही अनुमानित कर |
| एकल-सदस्य एलएलसी | ओनर ड्रॉ | एकल स्वामित्व के समान |
| बहु-सदस्य एलएलसी | गारंटीड भुगतान/ड्रॉ | साझेदारी के समान |
| एस-कॉर्पोरेशन | वेतन + वितरण | वेतन पर एफआईसीए, वितरण पर नहीं |
| सी-कॉर्पोरेशन | वेतन + लाभांश | दोहरा कर |
प्रभाव
भुगतान का तरीका कर देनदारियों और नकदी प्रवाह को प्रभावित करता है। एकल स्वामित्व और साझेदारी में, मालिकों को स्व-रोजगार कर का सामना करना पड़ता है, जबकि एस-कॉर्पोरेशन में वेतन पर ही सामाजिक सुरक्षा और मेडिकेयर कर लगता है, जिससे कर कम हो सकता है।
सी-कॉर्पोरेशन में लाभांश पर दोहरा कर लगता है, पहले कॉर्पोरेट स्तर पर और फिर व्यक्तिगत स्तर पर। इससे मालिकों की कुल कर देनदारी बढ़ सकती है।
पेरोल करों का पालन करना आवश्यक है, जिसमें एफआईसीए, एफयूटीए, राज्य बेरोजगारी कर, और स्थानीय कर शामिल हैं। गलत भुगतान विधियों से कर जुर्माना और कानूनी समस्याएं हो सकती हैं।
भविष्य का परिदृश्य
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि व्यवसाय स्वामी अपनी संरचना के अनुसार सही भुगतान विधि चुनते हैं, तो वे कर जुर्माने से बच सकते हैं और नकदी प्रवाह को बेहतर बना सकते हैं। हालांकि, यदि वे अत्यधिक ड्रॉ लेते हैं या पेरोल पंजीकरण की उपेक्षा करते हैं, तो उन्हें वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
एस-कॉर्पोरेशन चुनने से स्व-रोजगार कर कम हो सकता है, लेकिन इसके लिए उचित वेतन निर्धारित करना आवश्यक है। यदि वेतन अनुचित रूप से कम रखा जाता है, तो आईआरएस जांच कर सकता है।
भविष्य में, दूरस्थ कर्मचारियों की बढ़ती संख्या के कारण राज्य-बाहर पेरोल करों का पालन अधिक जटिल हो सकता है। व्यवसायों को पेरोल सेवा प्रदाताओं का उपयोग करके इन जटिलताओं का प्रबंधन करना चाहिए।
स्रोत: forbes.com



