पृष्ठभूमि
छह बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता स्कॉटिश साइकिलिस्ट सर क्रिस होय को 2024 के अंत में प्रोस्टेट कैंसर का पता चला था। यह बीमारी उनकी हड्डियों तक फैल चुकी थी, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें दो से चार साल का जीवनकाल बताया था।
ब्रिटेन में प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में सबसे आम कैंसर है, जिसके हर साल लगभग 63,000 नए मामले सामने आते हैं और 12,000 से अधिक मौतें होती हैं। इसके बावजूद, स्तन, आंत और फेफड़ों के कैंसर के विपरीत, इस बीमारी के लिए कोई राष्ट्रीय स्क्रीनिंग कार्यक्रम नहीं है।
वर्तमान स्थिति
सर क्रिस ने हाल ही में बताया कि वे उपचार के प्रति अच्छी प्रतिक्रिया दे रहे हैं और सकारात्मक बने हुए हैं। वे हर तीन से छह महीने में परीक्षण कराते हैं, लेकिन अगर डॉक्टरों को कोई चिंताजनक संकेत मिलता है तो निगरानी अधिक बार हो जाती है।
द गार्जियन से बातचीत में उन्होंने एक घटना साझा की, जब एक कार्यक्रम से पहले उन्होंने अपने फोन पर परीक्षण के परिणाम देखे और पाया कि पीएसए (प्रोस्टेट-विशिष्ट एंटीजन) का स्तर बढ़ गया था। उन्होंने कहा कि उन्होंने फोन रखकर मुस्कुराते हुए मंच संभाला।
सर क्रिस ने यह भी बताया कि अब वे परिणामों के लिए व्यक्तिगत रूप से मिलने के बजाय ज़ूम पर परामर्श पसंद करते हैं, क्योंकि वे डॉक्टरों की शारीरिक भाषा से बुरी खबर का अनुमान लगाने लगते हैं।
प्रभाव
सर क्रिस ने प्रोस्टेट कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक प्रमुख वकील की भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि 'पुरुष इस बीमारी के जोखिम को समझें'।
ब्रिटेन में अगले साल एक सीमित स्क्रीनिंग अभियान शुरू होने की उम्मीद है, जिसमें केवल लगभग 1,500 पुरुषों को जांच के लिए आमंत्रित किए जाने की संभावना है। इसमें 45 से 61 वर्ष की आयु के वे पुरुष शामिल होंगे जिनमें दुर्लभ जीन उत्परिवर्तन और स्तन, डिम्बग्रंथि, अग्नाशय या प्रोस्टेट कैंसर का पारिवारिक इतिहास हो।
सर क्रिस ने सवाल उठाया कि व्यापक स्क्रीनिंग कार्यक्रम अभी तक क्यों नहीं लाया गया। उन्होंने कहा कि सरकार का तर्क कि सभी पुरुषों की जांच से अनावश्यक उपचार बढ़ेगा, एक 'उपचार मुद्दा' है, न कि स्क्रीनिंग मुद्दा। उन्होंने फ्रांस का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां स्क्रीनिंग प्रणाली मौजूद है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि सरकार व्यापक स्क्रीनिंग कार्यक्रम शुरू करती है, तो इससे प्रोस्टेट कैंसर का शुरुआती चरण में पता लगाने में मदद मिल सकती है और मृत्यु दर में कमी आ सकती है। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाएगी या नहीं।
इस बीच, एनएचएस ने 500,000 पुरुषों से संपर्क करने की घोषणा की है, जिन्हें प्रोस्टेट कैंसर है या रह चुका है, ताकि अनुसंधान कार्यक्रम में भागीदारी बढ़ाई जा सके। यदि यह पहल सफल रहती है, तो भविष्य में निदान और उपचार के तरीकों में सुधार हो सकता है।
सर क्रिस ने व्यायाम को अपने उपचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है, क्योंकि अध्ययनों से पता चलता है कि यह कैंसर दवाओं की प्रभावशीलता बढ़ा सकता है। यदि वे इस दृष्टिकोण को जारी रखते हैं, तो उनके स्वास्थ्य में और सुधार की संभावना है, लेकिन यह पूरी तरह से निश्चित नहीं है।
स्रोत: dailymail.com



