मुख्य तथ्य
- वैज्ञानिक
- मार्को टेडेस्को
- संस्थान
- लैमोंट-डोहर्टी अर्थ वेधशाला, कोलंबिया क्लाइमेट स्कूल
- एआई अनुभव
- 1990 के दशक के अंत से
- मुख्य चिंता
- निर्णय, नैतिकता और जिज्ञासा को खोए बिना एआई से जुड़ना
- पर्माफ्रॉस्ट कार्बन
- आर्कटिक में बड़ी मात्रा में कार्बनिक कार्बन संग्रहीत
पृष्ठभूमि
मार्को टेडेस्को, जो कोलंबिया क्लाइमेट स्कूल के अंतर्गत लैमोंट-डोहर्टी अर्थ वेधशाला में शोध प्रोफेसर हैं, 1990 के दशक के अंत से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के साथ काम कर रहे हैं। इसके बावजूद, वे प्रौद्योगिकी को लेकर चल रहे उत्साह को लेकर सतर्क बने हुए हैं।
टेडेस्को एआई को न तो विज्ञान को बचाने वाली क्रांति के रूप में देखते हैं, न ही इसे एक क्षणिक चलन मानकर खारिज करते हैं। उनका मानना है कि एआई पहले से ही शोध कक्षों में मौजूद है, और सवाल यह नहीं है कि शोधकर्ताओं को इससे जुड़ना चाहिए या नहीं, बल्कि यह है कि क्या वे अपने निर्णय, नैतिकता और जिज्ञासा को खोए बिना ऐसा कर सकते हैं।
वर्तमान स्थिति
एनएन डॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार, टेडेस्को ने जिम्मेदार एआई की अवधारणा पर विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने एआई को बेचने की कोशिश करने वाले व्यक्ति की तरह नहीं सुना जाता, बल्कि वे इसके प्रति एक संतुलित और सतर्क दृष्टिकोण रखते हैं।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि आर्कटिक में पर्माफ्रॉस्ट बड़ी मात्रा में कार्बनिक कार्बन संग्रहीत करता है। जब जमी हुई जमीन पिघलती है या तटीय क्षेत्रों का कटाव होता है, तो यह कार्बन समुद्र में प्रवेश कर सकता है, जहां सूक्ष्मजीव इसे तोड़कर जलवायु-हानिकारक ग्रीनहाउस गैसों में बदल सकते हैं।
प्रभाव
टेडेस्को के विचार उन शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के लिए प्रासंगिक हैं जो जलवायु अनुसंधान में एआई का उपयोग कर रहे हैं या करने की योजना बना रहे हैं। उनका सतर्क रुख यह संकेत देता है कि एआई को अपनाते समय नैतिकता और वैज्ञानिक निर्णय की रक्षा करना आवश्यक है।
पर्माफ्रॉस्ट से कार्बन उत्सर्जन का मुद्दा जलवायु परिवर्तन को समझने के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को बढ़ा सकता है। यह स्थिति आर्कटिक क्षेत्रों और वैश्विक जलवायु प्रणाली को प्रभावित कर सकती है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि शोधकर्ता टेडेस्को के सुझाव को अपनाते हैं, तो वे एआई का उपयोग करते हुए अपनी वैज्ञानिक स्वतंत्रता बनाए रख सकते हैं। इससे जलवायु अनुसंधान में अधिक जिम्मेदार एआई अनुप्रयोगों की संभावना बढ़ सकती है।
हालांकि, यदि एआई को बिना सावधानी के अपनाया जाता है, तो यह वैज्ञानिक निर्णय और नैतिकता को कमजोर कर सकता है। यह स्पष्ट नहीं है कि भविष्य में एआई का उपयोग किस दिशा में विकसित होगा, लेकिन टेडेस्को की चेतावनी एक महत्वपूर्ण संकेत है।
स्रोत: enn.com



