भारत द्वारा ताज़ा वियतनामी ड्यूरियन के आयात को हरी झंडी दिए जाने से वियतनाम के कृषि क्षेत्र में नई उम्मीद जगी है। यह कदम 1.4 अरब से अधिक की आबादी वाले भारतीय बाजार तक सीधी पहुंच प्रदान करता है, जिससे वियतनाम को चीन पर अपनी निर्भरता कम करने का अवसर मिला है।
हालांकि, बाजार विश्लेषकों का कहना है कि भारत में ड्यूरियन की मांग बढ़ रही है, लेकिन संरचनात्मक बाधाएं शुरुआती उम्मीदों पर पानी फेर सकती हैं। डीप मार्केट इंसाइट्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय ड्यूरियन बाजार 2025 में 1.27 अरब डॉलर का था, जो 2034 तक 2.19 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
वियतनाम फ्रूट एंड वेजिटेबल एसोसिएशन के महासचिव डांग फुक गुयेन ने बताया कि भारत में ड्यूरियन पर करीब 43 प्रतिशत आयात शुल्क है, जबकि कई अन्य फलों पर 60-70 प्रतिशत तक शुल्क लगता है। उन्होंने कहा कि आसियान-भारत मुक्त व्यापार समझौते के तहत शून्य शुल्क दर हासिल करना ही वियतनामी निर्यातकों के लिए वास्तविक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त सुनिश्चित करेगा।
गुयेन ने यह भी कहा कि भारतीय उपभोक्ता ड्यूरियन की तेज़ गंध और स्वाद से परिचित नहीं हैं, जो चीन के विपरीत है। उन्होंने अनुमान लगाया कि शुरुआती वर्षों में निर्यात 50 से 100 मिलियन डॉलर तक सीमित रह सकता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि ताज़े फल के बजाय प्रसंस्कृत, सूखे या जमे हुए ड्यूरियन उत्पादों से शुरुआत करना बेहतर होगा, और वितरण शुरुआत में महानगरों के उच्च-स्तरीय सुपरमार्केट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर केंद्रित रहेगा।
स्रोत: news.tuoitre.vn



