मुख्य तथ्य
- वक्ता
- श्री स्वामीनाथन जे, डिप्टी गवर्नर, भारतीय रिज़र्व बैंक
- अवसर
- कोलंबिया विश्वविद्यालय, SIPA में व्याख्यान
- तारीख
- 1 जून 2026
- मुख्य विषय
- Resilience by Design: Lessons from India’s Banking Sector
- मुद्रास्फीति
- सहनशीलता सीमा के भीतर
- गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ
- बहु-दशकीय निम्न स्तर पर
पृष्ठभूमि
भारतीय रिज़र्व बैंक के डिप्टी गवर्नर श्री स्वामीनाथन जे ने 1 जून 2026 को कोलंबिया विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल एंड पब्लिक अफेयर्स (SIPA) में 'Resilience by Design: Lessons from India’s Banking Sector' विषय पर व्याख्यान दिया। यह व्याख्यान ऐसे समय में हुआ जब वैश्विक नीति चर्चा भू-राजनीति, जलवायु परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, तकनीकी व्यवधान और आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्गठन जैसे बड़े विषयों से भरी हुई है।
SIPA की स्थापना 1946 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुई थी, जब दुनिया नए अंतरराष्ट्रीय आदेश के लिए संस्थानों का पुनर्निर्माण कर रही थी। इसका उद्देश्य वैश्विक मामलों की समझ को गहरा करना और विभिन्न देशों, संस्थानों और विषयों में सार्वजनिक सेवा के लिए पेशेवरों को तैयार करना था।
वर्तमान स्थिति
श्री स्वामीनाथन ने कहा कि भारत आज अपेक्षाकृत मजबूत व्यापक आर्थिक स्थिति में है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता, आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान और अस्थिर वस्तु स्थितियों के बावजूद, औद्योगिक और सेवा गतिविधियों में मजबूती, व्यापक मांग और बेहतर कॉर्पोरेट प्रदर्शन के कारण घरेलू आर्थिक गतिविधियों ने लचीलापन दिखाया है। मुद्रास्फीति सहनशीलता सीमा के भीतर है और बाहरी कमजोरियाँ प्रबंधनीय हैं।
भारतीय वित्तीय प्रणाली इस अनिश्चित चरण में मजबूती के साथ प्रवेश कर रही है: स्वस्थ बैलेंस शीट, आरामदायक पूंजी बफर, बेहतर लाभप्रदता और बहु-दशकीय निम्न स्तर पर गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ। हालांकि, डिप्टी गवर्नर ने जोर देकर कहा कि लचीलापन बनाने का सबसे अच्छा समय तब है जब स्थितियाँ अनुकूल हों। जोखिम अच्छे समय में चुपचाप बनता है और परिस्थितियाँ बदलने पर जोर से प्रकट होता है।
| संकेतक | स्थिति |
|---|---|
| मुद्रास्फीति | सहनशीलता सीमा के भीतर |
| बाहरी कमजोरियाँ | प्रबंधनीय |
| बैलेंस शीट | स्वस्थ |
| पूंजी बफर | आरामदायक |
| लाभप्रदता | बेहतर |
| गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ | बहु-दशकीय निम्न स्तर पर |
प्रभाव
डिप्टी गवर्नर ने कहा कि कमजोर बैंकिंग प्रणाली वित्तीय बैलेंस शीट से फर्मों, परिवारों, सार्वजनिक वित्त और व्यापक अर्थव्यवस्था तक तनाव को तेजी से पहुंचा सकती है। इसलिए, बैंकिंग लचीलापन केवल बैंकों के लिए नहीं, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
भारत का हालिया अनुभव बताता है कि लचीलापन सबसे मजबूत तब होता है जब नियम, पर्यवेक्षी प्रणाली, समाधान तंत्र और बैंकों का व्यवहार एक-दूसरे को सुदृढ़ करते हैं। पारदर्शी तनाव पहचान, बैलेंस शीट सुदृढ़ीकरण, मजबूत पर्यवेक्षण, कैलिब्रेटेड और अनुकूली विनियमन, और बैंकों के भीतर लचीलापन - ये पाँच आयाम भारत के हालिया बैंकिंग लचीलेपन को रेखांकित करते हैं।
भविष्य का परिदृश्य
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि बैंक अनुकूल परिस्थितियों में बफर, शासन और जोखिम अनुशासन को मजबूत करते हैं, तो वे भविष्य के झटकों का सामना करने में सक्षम होंगे। हालांकि, यदि जोखिम अच्छे समय में चुपचाप बनता रहा और उसे पहचाना नहीं गया, तो यह मैक्रो-वित्तीय भेद्यता पैदा कर सकता है।
भारत का अनुभव बताता है कि तनाव की पारदर्शी पहचान, पर्याप्त प्रावधान, पुनर्पूंजीकरण और पर्यवेक्षी हस्तक्षेप से बैंकिंग प्रणाली मजबूत हो सकती है। यदि ये तत्व एक-दूसरे को सुदृढ़ करते रहे, तो भारतीय बैंकिंग क्षेत्र अनिश्चित वैश्विक माहौल में भी लचीला बना रह सकता है।
स्रोत: Reserve Bank of India



