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ब्रिक्स देशों में कौशल सहयोग को मिलेगी नई दिशा, डिजिटल और हरित कौशल पर जोर

नई दिल्ली में ब्रिक्स-टीसीए की अनुसंधान संगोष्ठी और जेएमसी बैठक संपन्न। डिजिटल और हरित कौशल पर जोर, तीन भारतीय प्रस्तावों पर चर्चा।

ब्रिक्स देशों में कौशल सहयोग को मिलेगी नई दिशा, डिजिटल और हरित कौशल पर जोर
Graphic: Amrit Khabar NewsroomImage rights policy

मुख्य तथ्य

आयोजन
ब्रिक्स-टीसीए अनुसंधान संगोष्ठी एवं जेएमसी बैठक, 3-4 अगस्त 2026, नई दिल्ली
विषय
सतत एवं डिजिटल रूप से सक्षम टीवीईटी: ब्रिक्स का दृष्टिकोण
आयोजक
राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी)
भागीदार देश
ब्राजील, रूस, चीन, यूएई, ईरान, भारत सहित ब्रिक्स सदस्य
प्रस्ताव
तीन: कौशल अंतराल अध्ययन, कौशल प्रतियोगिता, सर्वोत्तम प्रथाओं का संकलन

पृष्ठभूमि

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के मार्गदर्शन में ब्रिक्स तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण सहयोग गठबंधन (ब्रिक्स-टीसीए) की अनुसंधान संगोष्ठी एवं संयुक्त प्रबंधन समिति (जेएमसी) की बैठक 3-4 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित कौशल भवन में आयोजित हुई।

“सतत एवं डिजिटल रूप से सक्षम टीवीईटी: ब्रिक्स का दृष्टिकोण” विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम में ब्रिक्स देशों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, शिक्षाविदों, उद्योग जगत और प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) ने किया।

वर्तमान स्थिति

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी ने कहा कि कौशल अब केवल सामाजिक हस्तक्षेप नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण आर्थिक अवसंरचना है, जो उत्पादकता, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और कार्यबल की लचीलापन को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि विश्व की 40% से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले ब्रिक्स देशों के पास तेज, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार कौशल प्रणाली विकसित करने का अवसर और जिम्मेदारी दोनों हैं।

शिक्षा मंत्रालय के अपर सचिव आनंदराव वी. पाटिल ने आजीवन सीखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि डिग्री को सीखने का अंत नहीं माना जा सकता। शिक्षा प्रणालियों को ऐसा बनाना होगा, जिससे विद्यार्थी जीवनभर कक्षा, कार्यस्थल और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच आसानी से आवागमन कर सकें।

विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजीव बोडवाड़े ने कौशल कूटनीति को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में कौशल सहयोग को सदस्य देशों की साझा जनसांख्यिकीय और आर्थिक ताकत को व्यावहारिक एवं जन-केंद्रित परिणामों में बदलना चाहिए। उन्होंने सुव्यवस्थित कार्यबल गतिशीलता, विश्वसनीय प्रमाणन और बेहतर संस्थागत तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रमुख आंकड़े
संकेतक मान
विश्व जनसंख्या में ब्रिक्स का प्रतिनिधित्व40% से अधिक
नियोक्ता जो मानते हैं कि एआई कारोबार बदलेगा (2030 तक)86%
कर्मचारी जिनके मूल कौशल में बदलाव की संभावना39%
नवीकरणीय ऊर्जा में वैश्विक रोजगार1.66 करोड़
स्रोत: डीडी न्यूज़

प्रभाव

एनएसडीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और ब्रिक्स-टीसीए के रोटेटिंग चेयर अरुण कुमार पिल्लई ने कहा कि ब्रिक्स देश एक साथ डिजिटल, हरित और जनसांख्यिकीय बदलावों से गुजर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2030 तक 86% नियोक्ताओं का मानना है कि एआई और सूचना-प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियां कारोबार को बदलेंगी, जबकि 39% कर्मचारियों के मूल कौशल में बदलाव आने की संभावना है।

अरुण कुमार पिल्लई ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र पहले ही वैश्विक स्तर पर 1.66 करोड़ नौकरियों को समर्थन दे रहा है। वहीं, कुछ ब्रिक्स सदस्य देशों में युवा कार्यबल बढ़ रहा है, जबकि अन्य देश संरचनात्मक श्रम की कमी का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वास्तविक चुनौती विभिन्न कौशल प्रणालियों के बीच विश्वास और मान्यता स्थापित करने की है।

उद्घाटन सत्र के बाद आयोजित पूर्ण सत्र में ब्राजील, रूस, चीन, यूएई, ईरान और भारत सहित ब्रिक्स सदस्य देशों ने व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास से जुड़ी प्रमुख पहलों को प्रस्तुत किया। इससे सदस्य देशों को अपनी नीतियों, कार्यक्रमों और अनुभवों को साझा करने का अवसर मिला।

भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

4 अगस्त को आयोजित संयुक्त प्रबंधन समिति की बैठक में अनुसंधान संगोष्ठी की चर्चाओं के निष्कर्षों पर विचार किया गया और भविष्य की प्राथमिकताओं पर सदस्य देशों से सुझाव लिए गए। भारत की अध्यक्षता में तीन प्रमुख प्रस्तावों पर चर्चा हुई।

पहले प्रस्ताव में उभरते व्यवसायों में कौशल अंतराल और कार्यबल की कमी की पहचान करने के लिए ब्रिक्स अंतरराष्ट्रीय कौशल अंतराल अध्ययन की रूपरेखा तैयार करने पर चर्चा हुई। दूसरे प्रस्ताव के तहत व्यावसायिक उत्कृष्टता और दक्षता की साझा समझ को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स कौशल प्रतियोगिता आयोजित करने का सुझाव दिया गया। तीसरे प्रस्ताव में टीवीईटी के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं का संकलन विकसित करने पर चर्चा हुई।

यदि इन प्रस्तावों पर सदस्य देशों के बीच सहमति बनती है, तो आने वाले वर्षों में कौशल अंतराल अध्ययन, कौशल प्रतियोगिता और सर्वोत्तम प्रथाओं के संकलन से ब्रिक्स देशों में कौशल गतिशीलता और साझा मानकों को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, इन प्रस्तावों के क्रियान्वयन की समयसीमा और विस्तृत रूपरेखा अभी स्पष्ट नहीं है।

स्रोत: DD News

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