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ब्रिक्स देशों की सांख्यिकी प्रमुखों की बैठक लखनऊ में संपन्न, संयुक्त वक्तव्य अपनाया

ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों के प्रमुखों की दो दिवसीय बैठक लखनऊ में संपन्न हुई। इसमें डिजिटल डेटा संग्रहण, एआई-रेडी सार्वजनिक डेटा सिस्टम और 2025 एसएनए पर चर्चा हुई। भारत-इंडोनेशिया के बीच एलओआई पर हस्ताक्षर हुए और ब्रिक्स संयुक्त वक्तव्य को अपनाया गया।

मुख्य तथ्य

बैठक की अवधि
दो दिवसीय, 4 अगस्त 2026 को संपन्न
स्थान
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
विषय
परिवर्तन के प्रेरक के रूप में गुणवत्तापूर्ण सांख्यिकी
प्रतिभागी
350 से अधिक
मुख्य समझौता
भारत-इंडोनेशिया के बीच एलओआई पर हस्ताक्षर
प्रमुख परिणाम
ब्रिक्स संयुक्त वक्तव्य को अपनाया गया

पृष्ठभूमि

ब्रिक्स सदस्य देशों के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों (एनएसओ) के प्रमुखों की दो दिवसीय बैठक मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को लखनऊ, उत्तर प्रदेश में संपन्न हुई। बैठक का विषय 'परिवर्तन के प्रेरक के रूप में गुणवत्तापूर्ण सांख्यिकी' था, जो ब्रिक्स के व्यापक विषय 'सुदृढ़शीलता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास' के अनुरूप आयोजित की गई।

कार्यक्रम में ब्रिक्स देशों के एनएसओ प्रतिनिधियों के साथ नीति निर्माता, शिक्षाविद, विचारक, नागरिक समाज संगठनों और तकनीकी विशेषज्ञों समेत 350 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

वर्तमान स्थिति

बैठक के दूसरे दिन 'ब्रिक्स सहयोग की संभावनाओं के लिए साझा नवाचार क्षेत्रों की पहचान' विषय पर तकनीकी सत्र-III में आधुनिक सर्वेक्षण पद्धतियों और डिजिटल डेटा संग्रहण पर चर्चा हुई। भारत और मिस्र ने सर्वेक्षण तथा जनगणना डेटा संग्रहण के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।

भारत ने पेपर आधारित सर्वेक्षण से आधुनिक डिजिटल उपकरणों की ओर बदलाव के दौरान मिले अनुभव और सीख प्रस्तुत की। ई-सिग्मा (ई-सर्वे सूचना संग्रहण और प्रबंधन अनुप्रयोग) कंप्यूटर असिस्टेड पर्सनल इंटरव्यू (सीएपीआई) सक्षम प्लेटफॉर्म है, जिसे बड़े पैमाने पर नमूना सर्वेक्षणों को क्लाउड-आधारित आर्किटेक्चर में एकीकृत करने के लिए तैयार किया गया है।

तकनीकी सत्र-IV में व्यापक आर्थिक और क्षेत्रीय सांख्यिकी को सुदृढ़ करने पर चर्चा हुई। भारत ने राष्ट्रीय लेखा प्रणाली, 2025 (2025 एसएनए) के कार्यान्वयन के लिए अपना संक्रमणकालीन रोडमैप प्रस्तुत किया और आधिकारिक सांख्यिकी तैयार करने में प्रशासनिक डेटा के प्रभावी इस्तेमाल का प्रदर्शन किया। चीन ने 2025 एसएनए ढांचे को लागू करने में अपनी प्रगति और शुरुआती व्यावहारिक अनुभव साझा किए।

ब्रिक्स बैठक में चर्चा के मुख्य विषय और देश
विषय देश/संस्था मुख्य बिंदु
डिजिटल डेटा संग्रहणभारत, मिस्रडिजिटल प्लेटफॉर्म के अनुभव साझा
ई-सिग्मा प्लेटफॉर्मभारतपेपर से डिजिटल सर्वेक्षण में बदलाव
भू-स्थानिक तकनीकमिस्रआधिकारिक आंकड़ों में उपयोग
2025 एसएनएभारत, चीन, इंडोनेशियासंक्रमण रोडमैप और प्रगति
वैकल्पिक डेटा स्रोतब्राजीलई-कॉमर्स डेटा का उपयोग
एआई-रेडी डेटा सिस्टमभारत, दक्षिण अफ्रीका, रूस, इंडोनेशिया, चीन, यूएईकेस स्टडी प्रस्तुत
स्रोत: डीडी न्यूज़ / पीआईबी

प्रभाव

बैठक के दौरान भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) और बीपीएस-सांख्यिकी इंडोनेशिया ने आधिकारिक सांख्यिकी, क्षमता निर्माण और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए एक द्विपक्षीय बैठक में आशय पत्र (एलओआई) पर हस्ताक्षर किए। एलओआई ज्ञान के आदान-प्रदान, तकनीकी एवं पद्धतिगत उन्नति, मानव संसाधन विकास और एआई, मेटाडेटा मानकीकरण तथा ओपन डेटा जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग के लिए ढांचा उपलब्ध कराएगा।

सत्र का समापन ब्रिक्स संयुक्त वक्तव्य को अपनाने और उसके बाद समापन वक्तव्य सत्र के साथ हुआ। संयुक्त वक्तव्य को औपचारिक रूप से अपनाना ब्रिक्स सदस्य देशों में सांख्यिकीय ढांचों को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया। इससे अधिक सशक्त, पारदर्शी और नीति-प्रासंगिक आधिकारिक आंकड़ों के लिए आधार तैयार होगा।

भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि ब्रिक्स देश 2025 एसएनए के कार्यान्वयन में तेजी लाते हैं, तो आधिकारिक सांख्यिकी में अधिक तुलनात्मकता और विश्वसनीयता आ सकती है। भारत और चीन द्वारा साझा किए गए अनुभवों से अन्य सदस्य देशों को संक्रमण में मदद मिल सकती है।

ब्राजील द्वारा प्रस्तावित वैकल्पिक डेटा स्रोतों, जैसे ई-कॉमर्स और मध्यस्थ प्लेटफॉर्म से ऑनलाइन डेटा को आधिकारिक आंकड़ों में शामिल करने की संभावना है, जिससे डेटा की गुणवत्ता बढ़ सकती है। हालांकि, इसके लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और मानकों की आवश्यकता होगी।

एआई-रेडी पब्लिक डेटा सिस्टम पर हुई चर्चा से संकेत मिलता है कि आने वाले वर्षों में डेटा गवर्नेंस और अंतरसंचालनीयता को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलता है, तो सार्वजनिक डेटा सिस्टम अधिक मजबूत हो सकते हैं, लेकिन इसकी सफलता सदस्य देशों की नीतियों पर निर्भर करेगी।

स्रोत: डीडी न्यूज़, प्रसार भारती

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