मुख्य तथ्य
- अदालत
- अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आश्विनी पंवार
- आरोपी
- बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर
- धाराएं
- IPC 354, 354A, 506(1)
- मुकदमा शुरू
- जुलाई 2024
- गवाह
- 32 गवाह, 9 को अभियोजन ने हटाया
- पीड़ित
- 6 महिला पहलवान, 2 ने बयान बदला
पृष्ठभूमि
यह मामला 2023 में सुर्खियों में आया जब टोक्यो ओलंपिक कांस्य पदक विजेता बजरंग पूनिया, रियो ओलंपिक कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक और विश्व चैंपियनशिप की दो बार पदक विजेता विनेश फोगाट ने जंतर-मंतर पर 38 दिनों तक धरना दिया। वे बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही थीं, जो उस समय भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के प्रमुख थे।
28 अप्रैल 2023 को सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली पुलिस ने दो प्राथमिकी दर्ज कीं। पहली प्राथमिकी छह वयस्क महिला पहलवानों की शिकायत पर सिंह और तोमर के खिलाफ थी, जबकि दूसरी प्राथमिकी एक नाबालिग पहलवान के आरोपों पर POCSO अधिनियम की धाराओं के तहत सिंह के खिलाफ दर्ज की गई थी।
आरोपों के अनुसार, सिंह पर 2012 से 2022 के बीच यौन उत्पीड़न के कई आरोप लगे थे, जिनमें एक पहलवान को सप्लीमेंट्स देने की पेशकश, एक को बिस्तर पर बुलाना, नाबालिग के सीने को छूना और टूर्नामेंट के दौरान अकेले समय बिताने के लिए उकसाना शामिल था।
वर्तमान स्थिति
सोमवार को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आश्विनी पंवार ने बृजभूषण शरण सिंह और पूर्व WFI सहायक सचिव विनोद तोमर को अपर्याप्त सबूतों के आधार पर बरी कर दिया। अदालत ने कहा, "दोनों आरोपी बृजभूषण सिंह और विनोद तोमर को इस मामले में बरी किया जाता है।"
अतिरिक्त लोक अभियोजक मनीष रावत ने कहा कि वे फैसले की प्रमाणित प्रति मिलने के बाद उच्च अदालत में चुनौती देंगे। विनेश फोगाट ने सोशल मीडिया पर कहा कि महिला पहलवानों ने अपने वकीलों को अपील दायर करने का निर्देश दिया है और वे लड़ाई जारी रखेंगी।
बृजभूषण सिंह ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उन्होंने पहले ही कहा था कि अगर आरोप सच हुए तो वे फांसी लगा लेंगे। WFI प्रमुख संजय सिंह ने भी फैसले का स्वागत किया और आरोपों को निराधार बताया।
| तारीख | घटना |
|---|---|
| 28 अप्रैल 2023 | दो FIR दर्ज |
| मई 2023 | POCSO मामला बंद |
| मई 2024 | आरोप तय |
| जुलाई 2024 | मुकदमा शुरू |
| 2026-08-04 | बरी |
प्रभाव
इस फैसले का सीधा असर छह महिला पहलवानों पर पड़ा है, जिन्होंने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। विनेश फोगाट ने कहा कि वे गहरे दुखी हैं और उन्हें लगता है कि प्रशासन और सरकार बृजभूषण सिंह की रक्षा में लगी रही।
इस फैसले से भारतीय कुश्ती के खेल पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि WFI प्रमुख संजय सिंह ने कहा कि इन आरोपों के कारण कुश्ती को काफी नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस फैसले से खेल की छवि पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
कानूनी दृष्टिकोण से, यह फैसला यौन उत्पीड़न के मामलों में सबूतों के महत्व को रेखांकित करता है। अदालत ने कुछ आरोपों को समय-सीमा के कारण और कुछ को विदेश में घटित होने के कारण विचार में नहीं लिया, जिसके लिए केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक थी।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि महिला पहलवान उच्च अदालत में अपील दायर करती हैं, तो मामला फिर से खुल सकता है। विनेश फोगाट ने कहा है कि अपील जल्द दायर की जाएगी, लेकिन यह देखना होगा कि अदालत इसे स्वीकार करती है या नहीं।
यदि अपील खारिज हो जाती है, तो यह मामला समाप्त हो सकता है, लेकिन इससे यौन उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने वाली महिलाओं पर निराशाजनक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, यह संभावना है कि पहलवानों का संघर्ष जारी रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अपील में नए सबूत पेश किए जाते हैं, तो फैसला बदल सकता है, लेकिन फिलहाल यह अनिश्चित है कि उच्च अदालत क्या रुख अपनाएगी।
स्रोत: hindustantimes.com
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मामले की प्रमुख घटनाएं
- 01
दो FIR दर्ज
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली पुलिस ने दो प्राथमिकी दर्ज कीं।
- 02
POCSO मामला बंद
नाबालिग पीड़िता के बयान वापस लेने के बाद अदालत ने POCSO मामला बंद किया।
- 03
आरोप तय
अदालत ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए।
- 04
मुकदमा शुरू
मुकदमा इन-कैमरा शुरू हुआ।
- 05
बरी
अदालत ने दोनों आरोपियों को बरी किया।
स्रोत:स्रोत: hindustantimes.com स्रोत-समर्थित



