पृष्ठभूमि
कोका-कोला ने भारत में दूसरी तिमाही में बाजार हिस्सेदारी खो दी है, ऐसा कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) जॉन मर्फी ने कहा। उन्होंने इसका कारण एल्युमीनियम की ऊंची लागत और मध्यम मूल्य वर्ग के लिए पैकेजिंग की कमी को बताया।
अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध के बाद भारत में डाइट कोक की कमी हो गई थी, क्योंकि एल्युमीनियम कैन की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। इसके बाद 'डाइट कोक पार्टियों' की लहर से मांग बढ़ गई। सूत्रों के अनुसार, कोका-कोला ने भारत में कीमतें बढ़ा दी हैं और दक्षिण पूर्व एशिया से बड़े आकार के डिब्बे मंगा रही है।
वर्तमान स्थिति
कोका-कोला ने पिछले सप्ताह मजबूत तिमाही परिणाम दर्ज किए और वार्षिक पूर्वानुमान बढ़ा दिए, जिसमें विश्व कप प्रायोजन के आसपास विज्ञापन अभियानों का योगदान रहा। हालांकि, भारत कमजोर कड़ी रहा, क्योंकि बाजार हिस्सेदारी में गिरावट ने एशिया प्रशांत क्षेत्र के नतीजों को प्रभावित किया।
सीएफओ जॉन मर्फी ने रॉयटर्स से बातचीत में कहा, 'पिछला साल भारत में उद्योग के लिए कठिन रहा और इस साल उद्योग में सुधार देख रहे हैं।' उन्होंने स्वीकार किया कि पिछली तिमाही में कोका-कोला ने बाजार हिस्सेदारी खोई है।
मर्फी ने कहा, 'अभी मध्यम मूल्य वर्ग (11 से 40 रुपये के बीच) के लिए हमारे पास वह पैक प्राइस संरचना नहीं है जिसकी जरूरत है। हम उस पर काम कर रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि समय के साथ हम कुछ हिस्सेदारी वापस हासिल कर लेंगे।'
प्रभाव
एल्युमीनियम और पीईटी प्लास्टिक की कीमतें इस साल कोका-कोला की उम्मीद से अधिक बढ़ी हैं, जिससे कंपनी की लागत दबाव में है। कंपनी इन मूल्य दबावों की भरपाई के लिए काम कर रही है।
भारत में डाइट कोक की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मर्फी ने इसे 'शानदार समस्या' बताया और कहा कि इस साल ब्रांड की मांग में 10 गुना वृद्धि हो सकती है, हालांकि आधार छोटा है।
इसका असर उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है क्योंकि कंपनी ने भारत में कीमतें बढ़ाई हैं। साथ ही, मध्यम मूल्य वर्ग में पैकेजिंग की कमी के कारण कुछ ग्राहकों को उत्पाद उपलब्ध नहीं हो सकते हैं।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि एल्युमीनियम और पीईटी की कीमतें स्थिर होती हैं और कंपनी मध्यम मूल्य वर्ग के लिए पैकेजिंग विकसित कर लेती है, तो कोका-कोला अपनी खोई हुई बाजार हिस्सेदारी वापस पा सकती है। मर्फी ने भारतीय बाजार के प्रति आशावाद जताया है।
हालांकि, यदि लागत दबाव जारी रहता है और प्रतिस्पर्धा बढ़ती है, तो बाजार हिस्सेदारी में और गिरावट संभव है। कंपनी की रणनीति और बाजार की स्थितियों पर निर्भर करेगा कि वह कितनी जल्दी सुधार कर पाती है।
डाइट कोक की मांग में वृद्धि को देखते हुए, यदि आपूर्ति सुनिश्चित हो जाती है, तो यह ब्रांड के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है। लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह वृद्धि लंबे समय तक बनी रहेगी या नहीं।
स्रोत: esmmagazine.com



