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RBI जारी करता है वाणिज्यिक बैंकों के लिए अनुपालन कार्य हेतु दिशानिर्देश 2026

RBI ने वाणिज्यिक बैंकों के लिए अनुपालन कार्य हेतु दिशानिर्देश 2026 जारी किए, जो तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। ये दिशानिर्देश बोर्ड की भूमिका, मुख्य अनुपालन अधिकारी की नियुक्ति, और प्रौद्योगिकी के उपयोग पर केंद्रित हैं।

मुख्य तथ्य

जारी करने की तिथि
31 जुलाई 2026
लागू
तत्काल प्रभाव से
लागू होने वाले बैंक
वाणिज्यिक बैंक (स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट्स बैंक, लोकल एरिया बैंक को छोड़कर)
कानूनी आधार
बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35-ए
बोर्ड की समीक्षा
तिमाही आधार पर
अनुपालन नीति समीक्षा
वर्ष में कम से कम एक बार

पृष्ठभूमि

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 31 जुलाई 2026 को 'रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (वाणिज्यिक बैंक - अनुपालन कार्य) दिशानिर्देश, 2026' जारी किए। ये दिशानिर्देश बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35-ए के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी किए गए हैं। RBI ने इन्हें सार्वजनिक हित में आवश्यक और समीचीन माना है।

दिशानिर्देशों की प्रस्तावना के अनुसार, अनुपालन कार्य बैंक के कॉर्पोरेट प्रशासन ढांचे का एक प्रमुख तत्व है और आंतरिक लेखा परीक्षा तथा जोखिम प्रबंधन प्रक्रियाओं के साथ-साथ आश्वासन का अभिन्न अंग है। ये सिद्धांत बेसल समिति के ढांचे के अनुरूप हैं, जिन्हें भारतीय परिचालन परिवेश के अनुकूल बनाया गया है।

ये दिशानिर्देश वाणिज्यिक बैंकों पर लागू होंगे, जिनमें बैंकिंग कंपनियाँ (स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट्स बैंक और लोकल एरिया बैंकों को छोड़कर), संवाददाता नए बैंक और भारतीय स्टेट बैंक शामिल हैं। दिशानिर्देश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।

वर्तमान स्थिति

दिशानिर्देशों के अनुसार, बोर्ड की समग्र जिम्मेदारी होगी कि वह बैंक के अनुपालन कार्य और अनुपालन जोखिम का प्रभावी पर्यवेक्षण और प्रबंधन सुनिश्चित करे। बोर्ड को यह सुनिश्चित करना होगा कि बैंक के पास एक उपयुक्त अनुपालन नीति हो और वह उसके प्रभावी कार्यान्वयन की देखरेख करे। नीति की समीक्षा वर्ष में कम से कम एक बार की जानी चाहिए।

बोर्ड या लेखा परीक्षा समिति (ACB) को तिमाही आधार पर अनुपालन कार्य की समीक्षा करनी होगी। वार्षिक विस्तृत समीक्षा भी बोर्ड/ACB के समक्ष रखी जानी चाहिए। मुख्य अनुपालन अधिकारी (CCO) को ऐसी बैठकों में आमंत्रित किया जाना चाहिए। बोर्ड को यह सुनिश्चित करना होगा कि अनुपालन कार्य और आंतरिक लेखा परीक्षा कार्य अलग-अलग रखे जाएँ।

प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD & CEO) को एक स्वतंत्र अनुपालन कार्य की उपस्थिति और बैंक की अनुपालन नीति का पालन सुनिश्चित करना होगा। वरिष्ठ प्रबंधन को एक लिखित अनुपालन नीति स्थापित करनी होगी जिसमें प्रबंधन और कर्मचारियों द्वारा पालन किए जाने वाले बुनियादी सिद्धांत शामिल हों और यह स्पष्ट किया जाए कि बैंक के सभी स्तरों पर अनुपालन जोखिम की पहचान और प्रबंधन कैसे किया जाएगा।

दिशानिर्देशों के प्रमुख प्रावधान
प्रावधान विवरण
बोर्ड की भूमिकाअनुपालन कार्य और जोखिम का समग्र पर्यवेक्षण
अनुपालन नीतिबोर्ड द्वारा अनुमोदित, वार्षिक समीक्षा
समीक्षा आवृत्तितिमाही (बोर्ड/ACB), वार्षिक विस्तृत समीक्षा
CCO की भूमिकाबैठकों में आमंत्रित, नियुक्ति और स्वतंत्रता
प्रौद्योगिकीनिगरानी हेतु उपयोग
स्रोत: RBI दिशानिर्देश 2026

प्रभाव

इन दिशानिर्देशों का सीधा प्रभाव वाणिज्यिक बैंकों पर पड़ेगा, जिन्हें अपने अनुपालन कार्य को पुनर्गठित करना होगा। बैंकों को अपने आकार, जटिलता, जोखिम प्रोफ़ाइल और संगठनात्मक संरचना के अनुरूप अनुपालन कार्य को व्यवस्थित करना होगा। इससे बैंकों के बोर्ड और वरिष्ठ प्रबंधन की जिम्मेदारियाँ बढ़ेंगी।

मुख्य अनुपालन अधिकारी की नियुक्ति और उनकी भूमिका को स्पष्ट किया गया है, जिससे बैंकों में अनुपालन संस्कृति को मजबूत किया जा सकेगा। बोर्ड और ACB की तिमाही समीक्षा से अनुपालन मुद्दों का शीघ्र समाधान हो सकेगा।

दिशानिर्देशों में प्रौद्योगिकी के उपयोग पर भी जोर दिया गया है, जिससे बैंकों को अनुपालन निगरानी के लिए तकनीकी समाधान अपनाने होंगे। इससे बैंकों की परिचालन लागत में वृद्धि हो सकती है, लेकिन लंबी अवधि में अनुपालन जोखिम कम होने की संभावना है।

भविष्य का परिदृश्य

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि बैंक इन दिशानिर्देशों का पालन करते हैं, तो उनके अनुपालन ढांचे में सुधार हो सकता है और वित्तीय स्थिरता बढ़ सकती है। हालांकि, यदि बैंकों को नए मानकों को लागू करने में कठिनाई होती है, तो उन्हें परिचालन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

RBI द्वारा इन दिशानिर्देशों के कार्यान्वयन की निगरानी की जा सकती है, और यदि आवश्यक हुआ तो भविष्य में संशोधन भी किए जा सकते हैं। बैंकों को अपने अनुपालन कार्य को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी में निवेश करना होगा, जिससे दीर्घकालिक लाभ हो सकते हैं।

यदि बैंक इन दिशानिर्देशों का पालन नहीं करते हैं, तो RBI द्वारा जुर्माना या अन्य कार्रवाई की संभावना है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इसके क्या परिणाम होंगे, क्योंकि दिशानिर्देशों में केवल सिद्धांतों को रेखांकित किया गया है।

स्रोत: Reserve Bank of India

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