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NHRC ने मेटा प्लेटफॉर्म पर CSAM मामले में नई नोटिस जारी की

NHRC ने मेटा के खिलाफ CSAM मामले में ताजा नोटिस जारी कर मीतय, पुलिस और मेटा से एक सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की है।

NHRC ने मेटा प्लेटफॉर्म पर CSAM मामले में नई नोटिस जारी की
Graphic: Amrit Khabar NewsroomImage rights policy

मुख्य तथ्य

नोटिस की तारीख
3 अगस्त
पिछली नोटिस
8 जुलाई
जांच का आधार
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस रिपोर्ट
निर्देशित प्राधिकरण
MeitY, पश्चिम बंगाल, चंडीगढ़, हरियाणा, ओडिशा, नई दिल्ली के पुलिस प्रमुख, मेटा
रिपोर्ट की समय सीमा
एक सप्ताह
दिल्ली पुलिस आयुक्त
अनुराग कुमार

पृष्ठभूमि

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मेटा प्लेटफॉर्म्स पर कथित रूप से प्रसारित बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) के मामले में अपना हस्तक्षेप तेज कर दिया है। आयोग ने दो दिन पहले एक नई नोटिस जारी की है, जबकि बीबीसी की रिपोर्टों के आधार पर शुरू की गई पिछली जांच की निगरानी जारी है।

इससे पहले, आयोग ने 8 जुलाई को बीबीसी वर्ल्ड सर्विस की रिपोर्टों का संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि इंस्टाग्राम पर भुगतान किए गए विज्ञापनों ने 'रेप वीडियो' और 'चाइल्ड वीडियो' जैसे शब्दों का उपयोग करके भारत में CSAM को बढ़ावा दिया और उपयोगकर्ताओं को टेलीग्राम चैनलों पर पुनर्निर्देशित किया, जहां यह सामग्री कथित तौर पर बिक्री के लिए पेश की गई थी।

वर्तमान स्थिति

3 अगस्त की नोटिस में, आयोग ने एक गैर-लाभकारी फाउंडेशन की शिकायत का संज्ञान लिया, जिसे इंस्टाग्राम और फेसबुक पर अश्लील और आयु-अनुचित लिंक के बारे में गुमनाम सूचना मिली थी, जिनमें CSAM हो सकता है। फाउंडेशन ने स्पष्ट किया कि उसने POCSO अधिनियम, 2012 और IT अधिनियम, 2000 का अनुपालन करते हुए केवल जांच के लिए लिंक की सूची संलग्न की थी, और न तो उसने सामग्री तक पहुंच बनाई, न डाउनलोड किया, न देखा और न ही संग्रहीत किया।

NHRC ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव, पश्चिम बंगाल, चंडीगढ़, हरियाणा, ओडिशा और नई दिल्ली के पुलिस महानिदेशकों और मेटा के प्रवर्तन प्रमुख (भारत) को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी साइबर क्राइम इकाई/विशेष किशोर पुलिस इकाई के माध्यम से URL की जांच करें, संज्ञेय अपराध होने पर FIR दर्ज करें, शामिल लोगों की पहचान करें और उनके खिलाफ कार्यवाही करें, MeitY, मेटा, I4C और NCRB के साथ समन्वय करें, और किसी भी पहचाने गए बाल पीड़ित को तुरंत बचाकर बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश करें।

इस बीच, दिल्ली के पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने NHRC की नोटिस और बीबीसी जांच से उत्पन्न विस्तृत निर्देशों के अनुपालन में, POCSO अधिनियम, 2012 और अन्य लागू कानूनों के तहत मेटा प्लेटफॉर्म के खिलाफ FIR दर्ज करने की प्रक्रिया सुनिश्चित करते हुए प्राथमिकता से जांच शुरू कर दी है।

NHRC द्वारा जारी नोटिसों का विवरण
नोटिस की तारीख आधार निर्देश
8 जुलाईबीबीसी वर्ल्ड सर्विस रिपोर्टदिल्ली पुलिस आयुक्त को जांच और साक्ष्य संरक्षण के निर्देश
3 अगस्तगैर-लाभकारी फाउंडेशन की शिकायतMeitY, पुलिस और मेटा को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश
तारीखें और विवरण स्रोत से लिए गए हैं।

प्रभाव

इस मामले में NHRC की कार्रवाई का सीधा असर मेटा प्लेटफॉर्म्स पर पड़ सकता है, जिन्हें न केवल कथित सामग्री को हटाना होगा, बल्कि मेटाडेटा और IP लॉग संरक्षित करने, POCSO अधिनियम की धारा 19 के तहत रिपोर्ट करने और निवारक तंत्र का विवरण देने के लिए कहा गया है।

पुलिस और MeitY पर भी दायित्व है: पुलिस को URL की जांच करनी है, FIR दर्ज करनी है और पीड़ित बच्चों की पहचान कर उन्हें बचाना है, जबकि MeitY को URL ब्लॉक करने, मध्यस्थ के खिलाफ कार्रवाई और दीर्घकालिक बाल सुरक्षा उपायों पर रिपोर्ट देनी है।

इसके अलावा, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने मेटा के प्लेटफॉर्म पर 'बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार' सामग्री के आरोपों की औपचारिक जांच शुरू करने का निर्णय लिया है, जिससे मेटा को अपनी नीतियों और प्रथाओं की समीक्षा करनी पड़ सकती है।

भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि मेटा और संबंधित पुलिस इकाइयां एक सप्ताह के भीतर संतोषजनक कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करती हैं, तो NHRC अपनी जांच को और सख्त कर सकता है। आयोग ने पहले ही 29 जुलाई को दिल्ली पुलिस को अनुस्मारक जारी कर चेतावनी दी थी कि सात दिनों के भीतर अनुपालन न करने पर मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 13 के तहत बाध्यकारी शक्तियों का प्रयोग किया जा सकता है।

NCPCR की जांच के नतीजों के आधार पर, यदि मेटा को दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और जुर्माना लगाए जाने की संभावना है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि जांच कितने समय में पूरी होगी और क्या मेटा अपनी प्रक्रियाओं में बदलाव करेगा।

यदि मामला अदालत तक पहुंचता है, तो सुप्रीम कोर्ट के 'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस एंड अन्य बनाम एस हरिश एंड अन्य' के फैसले के अनुसार, मध्यस्थों को POCSO के संदिग्ध अपराधों की सूचना NCMEC और विशेष किशोर पुलिस इकाई या स्थानीय पुलिस दोनों को देनी होगी, जिससे मेटा की जिम्मेदारी और बढ़ सकती है।

स्रोत: ianslive.in

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