मार्केट

बाज़ार डेटा लोड हो रहा है…

विलंबित भाव
लाइव टीवी
राज्य

बैंकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर ने कहा, जनता ने सम्राट चौधरी के 'आचरण, चरित्र और चेहरे' को नकारा

जन सुराज के प्रशांत किशोर ने बैंकीपुर उपचुनाव में भाजपा की हार को बिहार की जनता का संदेश बताया, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आचरण पर सवाल उठाए और नेतृत्व बदलने की मांग की।

बैंकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर ने कहा, जनता ने सम्राट चौधरी के 'आचरण, चरित्र और चेहरे' को नकारा
Graphic: Amrit Khabar NewsroomImage rights policy

मुख्य तथ्य

जीत का अंतर
19,324 वोट
पिछली जीत का अंतर
51,000 से अधिक वोट
एनडीए का बहुमत
202 सीटें
सीट का इतिहास
1995 से भाजपा का गढ़
उपचुनाव का कारण
नितिन नबीन के इस्तीफे से सीट खाली

पृष्ठभूमि

बैंकीपुर विधानसभा सीट बिहार की राजधानी पटना का शहरी क्षेत्र है, जिसे 1995 से भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है। यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के विधायक रहने के कारण खाली हुई थी, जिसके लिए उपचुनाव हुआ।

नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को इस सीट पर 51,000 से अधिक मतों से जीत मिली थी। इस उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने पहली बार चुनाव जीतकर इतिहास रचा।

वर्तमान स्थिति

प्रशांत किशोर ने मंगलवार को एएनआई से बातचीत में कहा कि बैंकीपुर उपचुनाव का नतीजा बिहार की जनता का भाजपा और एनडीए नेतृत्व को संदेश है कि वे राज्य का नेतृत्व बदलें। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाताओं ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के 'आचरण, चरित्र और चेहरे' को नकार दिया है।

किशोर ने कहा कि बैंकीपुर में जीत को बिहार की जनता द्वारा भाजपा और एनडीए के नेतृत्व को संदेश देने के प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि सरकार बदलने की मांग के रूप में। उन्होंने कहा कि जनता चाहती है कि बिहार का मुख्यमंत्री बेहतर व्यक्ति हो और सत्ता में आने के समय किए गए वादों पर ध्यान दिया जाए।

उन्होंने कहा, 'अपराध, आधी एनकाउंटर और जाति के गमछे के आधार पर लोगों को गोली मारने जैसी भाषा बंद होनी चाहिए। बिहार में बातचीत शिक्षा, रोजगार और प्रवासन पर होनी चाहिए।'

बैंकीपुर उपचुनाव: मुख्य आंकड़े
विवरण मान
जीत का अंतर19,324 वोट
पिछली जीत का अंतर51,000 से अधिक वोट
एनडीए का बहुमत202 सीटें
आंकड़े प्रशांत किशोर के बयान और रिपोर्ट से लिए गए हैं।

प्रभाव

किशोर ने सवाल उठाया कि जब नवंबर में भाजपा 51,000 से अधिक मतों से जीती थी, तब बैंकीपुर की सड़कें नहीं टूटी थीं, न ही वहां कुछ गलत हुआ था। फिर भी अगर लोगों ने उन्हें हराया है, तो क्या बदला? उन्होंने कहा कि बदला यह है कि भाजपा ने बिहार में एक नया नेतृत्व दिया है जो बिहार की जनता को स्वीकार्य नहीं है।

किशोर ने कहा कि भाजपा ने उसी 'जंगल राज' की राजनीति का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता को स्थापित किया है, जिसके खिलाफ वह चुनाव लड़ती थी। उन्होंने कहा, 'जिस जंगल राज के खिलाफ आपने वोट मांगे थे, अगर आप उसी जंगल राज का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्ति को केसरिया शॉल में सिंहासन पर बिठाते हैं, तो लोग इसे स्वीकार नहीं करेंगे।'

इस हार का असर हिंदी पट्टी के अन्य क्षेत्रों में भी देखा जा सकता है, जहां परीक्षा पेपर लीक और बेरोजगारी के खिलाफ युवाओं के विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। यह भाजपा के पारंपरिक गढ़ों में कमजोरियों को उजागर कर सकता है।

भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

किशोर ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सरकार बदलने की कोई बात नहीं है, क्योंकि एनडीए के पास बिहार विधानसभा में 202 सीटों का स्पष्ट बहुमत है। उन्होंने कहा कि अगले चार वर्षों तक एनडीए सरकार बनी रहेगी, लेकिन सरकार के नेतृत्व में बदलाव हो सकता है।

उन्होंने कहा कि वे बैंकीपुर की जनता के साथ मिलकर नेतृत्व परिवर्तन की लड़ाई लड़ रहे हैं और केंद्रीय नेतृत्व से आग्रह कर रहे हैं कि वे बिहार पर ध्यान दें और एक सक्षम, गुणी और शिक्षित व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाएं।

राजद नेता तेजस्वी यादव के बारे में किशोर ने कहा कि विपक्ष के नेता के रूप में उनका राजनीतिक भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वे अगले चार वर्षों में अपनी भूमिका कितनी सक्रियता से निभाते हैं। यदि वे प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाते हैं, तो वे मजबूत हो सकते हैं, अन्यथा कमजोर पड़ सकते हैं।

स्रोत: calcuttanews.net

इस समाचार को साझा करें