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ओडिशा स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 10 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए

ओडिशा स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 10 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। इनमें आयुष, ट्रॉमा केयर, बाल हृदय रोग और दवा भंडारण नेटवर्क जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

ओडिशा स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 10 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए
Graphic: Amrit Khabar NewsroomImage rights policy

मुख्य तथ्य

समझौता ज्ञापनों की संख्या
10
हस्ताक्षर की तारीख
मंगलवार, 4 अगस्त 2026
मुख्य भागीदार
आई-हब, अंतरा फाउंडेशन, एम्स दिल्ली, अमृता अस्पताल, आईएफसी, आदि
ट्रॉमा केयर केंद्र
एक जिला मुख्यालय मेडिकल कॉलेज में विकसित किया जाएगा
बाल हृदय रोग उपचार
नि:शुल्क सर्जरी और देखभाल
विश्राम गृह
छह मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में स्थापित किए जाएंगे

पृष्ठभूमि

ओडिशा के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने मंगलवार को राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से विभिन्न संगठनों के साथ दस समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह जानकारी आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त रिपोर्ट में दी गई है।

इन समझौतों में गुजरात का आई-हब, द अंतरा फाउंडेशन, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, स्वास्थ्य प्रणाली परिवर्तन मंच, एम्स दिल्ली का आपातकाल और ट्रॉमा केयर केंद्र, कोच्चि के अमृता अस्पताल का बाल चिकित्सा कार्डियक केयर, भारतीय गुणवत्ता परिषद, अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम और कैवल्य एजुकेशन फाउंडेशन शामिल हैं।

वर्तमान स्थिति

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री मुकेश महालिंग ने इस अवसर को स्वास्थ्य विभाग के लिए ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व में विभाग ने ओडिशा में स्वास्थ्य सेवा वितरण के विभिन्न पहलुओं को बेहतर बनाने के लिए दस रणनीतिक साझेदारियां की हैं।

महालिंग ने बताया कि एम्स दिल्ली के आपातकाल और ट्रॉमा केयर केंद्र के साथ समझौता ज्ञापन से एक जिला मुख्यालय में एक मेडिकल कॉलेज को ट्रॉमा केयर के उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी। साथ ही, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के सहयोग से आयुर्वेद आधारित उपचार प्रणालियों और भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली के तहत विकसित दवाओं को बढ़ावा मिलेगा।

इसके अलावा, गुजरात के आई-हब के साथ साझेदारी से चिकित्सा शिक्षा में स्टार्टअप, नवाचार और बेहतर शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा। भारतीय गुणवत्ता परिषद के माध्यम से जिला मुख्यालय अस्पतालों और उप-मंडल अस्पतालों की प्रयोगशालाओं को एनएबीएल मान्यता मिलेगी, जिससे गुणवत्ता मानकों और नैदानिक सेवाओं में सुधार होगा।

समझौता ज्ञापनों के प्रमुख भागीदार और उद्देश्य
संगठन उद्देश्य
आई-हब (गुजरात)स्टार्टअप, नवाचार और शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देना
अंतरा फाउंडेशनस्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानआयुर्वेद उपचार और पारंपरिक ज्ञान को बढ़ावा देना
एम्स दिल्ली (आपातकाल और ट्रॉमा केयर)ट्रॉमा केयर उत्कृष्टता केंद्र विकसित करना
अमृता अस्पताल, कोच्चिबाल हृदय रोगों का नि:शुल्क उपचार
भारतीय गुणवत्ता परिषदप्रयोगशालाओं को एनएबीएल मान्यता दिलाना
अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगमजलवायु-स्मार्ट दवा भंडारण नेटवर्क विकसित करना
कैवल्य एजुकेशन फाउंडेशनपरियोजना स्वास्थ्य के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना
स्रोत के अनुसार, कुल 10 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए, लेकिन सभी संगठनों के विवरण उपलब्ध नहीं हैं।

प्रभाव

मंत्री ने कहा कि राज्य के छह मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में विश्राम गृह स्थापित किए जाएंगे, जिससे मरीजों के साथ आने वाले परिजनों को सुरक्षित और सुविधाजनक आवास की सुविधा मिलेगी। यह कदम अस्पतालों में मरीजों के साथ रहने वाले परिवारों के लिए राहत ला सकता है।

दूरदराज के क्षेत्रों में जन्मजात हृदय रोग (सीएचडी) वाले बच्चों की जांच के लिए नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे। अमृता अस्पताल, कोच्चि के साथ समझौते के तहत ओडिशा के जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को पूरी तरह से नि:शुल्क सर्जरी, इंटरवेंशनल कार्डियक प्रक्रियाएं, ऑपरेशन के बाद का उपचार और अनुवर्ती देखभाल मिलेगी।

अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम (आईएफसी) के साथ समझौते से राज्यव्यापी जलवायु-स्मार्ट दवा भंडारण नेटवर्क के विकास में मदद मिलेगी। कैवल्य एजुकेशन फाउंडेशन के साथ परियोजना स्वास्थ्य के तहत हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापनों से राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं, अनुसंधान और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की उम्मीद है।

भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि ये समझौते प्रभावी ढंग से लागू होते हैं, तो ओडिशा में ट्रॉमा देखभाल, आयुर्वेद उपचार, चिकित्सा शिक्षा और नैदानिक सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। विशेष रूप से, जिला स्तर पर ट्रॉमा केयर उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना से गंभीर चोटों के मामलों में त्वरित और बेहतर उपचार संभव हो सकता है।

बाल हृदय रोगों के लिए नि:शुल्क उपचार और दूरदराज के क्षेत्रों में जांच शिविरों से राज्य में जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की मृत्यु दर में कमी आ सकती है। हालांकि, इन परिणामों की पुष्टि के लिए समय और कार्यान्वयन की निगरानी आवश्यक होगी।

आईएफसी के साथ साझेदारी से दवा भंडारण नेटवर्क में आधुनिकीकरण और जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे के विकास की संभावना है, जिससे दवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता में सुधार हो सकता है। फिर भी, यह स्पष्ट नहीं है कि इन सभी परियोजनाओं को पूरा करने में कितना समय लगेगा और उनका वास्तविक प्रभाव क्या होगा।

स्रोत: prokerala.com

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