मुख्य तथ्य
- मुख्य मांग
- अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली
- प्रदर्शन की तारीख
- 5 अगस्त
- वक्ता
- मेहबूबा मुफ्ती, पीडीपी अध्यक्ष
- अन्य वक्ता
- सज्जाद शाहीन, नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायक
- आरोप
- केंद्र ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा लूटा
- अतिरिक्त मांगें
- सेना की वापसी, मुजफ्फराबाद-रावलकोट मार्ग बहाली, कैदियों की रिहाई
पृष्ठभूमि
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष मेहबूबा मुफ्ती ने 5 अगस्त को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पार्टी और उनका समुदाय इस मुद्दे पर लड़ाई जारी रखेगा। उन्होंने कश्मीर मुद्दे के समाधान के साथ-साथ अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली और देशभर की जेलों में बंद कैदियों की रिहाई की मांग दोहराई।
मेहबूबा मुफ्ती ने कहा कि अनुच्छेद 370 केवल एक संवैधानिक प्रावधान नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की पहचान और अधिकारों का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में बहुमत का दुरुपयोग करके भारतीय संविधान में बदलाव किया गया और जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया गया।
वर्तमान स्थिति
मेहबूबा मुफ्ती ने कहा कि यदि सरकार का दावा है कि स्थिति में सुधार हुआ है, तो उसे सेना को नागरिक क्षेत्रों से हटाकर छावनियों में वापस भेजना चाहिए और मुजफ्फराबाद तथा रावलकोट मार्गों पर यातायात बहाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दो दिन पहले छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों की गोली मारकर हत्या कर दी गई और ओवर ग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) के नाम पर हजारों लोगों को जेल में डाला जा रहा है।
उन्होंने कहा, "हम आज रात यहीं रहेंगे और कल विरोध प्रदर्शन करने की कोशिश करेंगे ताकि पूरे देश को संदेश जाए कि जम्मू-कश्मीर के लोग जीवित हैं और अनुच्छेद 370 हमारा अधिकार है।" उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस तरह भाजपा ने राम मंदिर को लूटा, उसी तरह उसने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा भी लूटा।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक सज्जाद शाहीन ने भी जम्मू-कश्मीर की राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश के लोगों के साथ अन्याय हुआ है और देश का ताज कहे जाने वाले इस राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया।
| वक्ता | मांग/बयान |
|---|---|
| मेहबूबा मुफ्ती | अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली |
| मेहबूबा मुफ्ती | सेना को नागरिक क्षेत्रों से हटाना |
| मेहबूबा मुफ्ती | मुजफ्फराबाद और रावलकोट मार्ग बहाल करना |
| मेहबूबा मुफ्ती | कैदियों की रिहाई |
| सज्जाद शाहीन | जम्मू-कश्मीर की राज्य का दर्जा बहाल करना |
प्रभाव
मेहबूबा मुफ्ती के बयान से संकेत मिलता है कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग को लेकर राजनीतिक आंदोलन तेज हो सकता है। उन्होंने कहा कि वे रात भर प्रदर्शन स्थल पर रहेंगी और अगले दिन विरोध प्रदर्शन करेंगी, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
सज्जाद शाहीन के बयान से यह स्पष्ट है कि जम्मू-कश्मीर की राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर विपक्षी दल एकजुट हो सकते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से संसद में दिए गए वादे और सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हलफनामे के अनुसार राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग की।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि केंद्र सरकार राज्य का दर्जा बहाल करने के अपने वादे पर अमल नहीं करती है, तो जम्मू-कश्मीर में विरोध प्रदर्शन और तेज हो सकते हैं। मेहबूबा मुफ्ती ने चेतावनी दी है कि अनुच्छेद 370 की बहाली के बिना कश्मीर मुद्दे का समाधान संभव नहीं है।
यदि सरकार राज्य का दर्जा बहाल करने का कदम उठाती है, तो विपक्षी दलों का दबाव कम हो सकता है, लेकिन अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग बनी रह सकती है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि केंद्र सरकार इन मांगों पर कोई ठोस कदम उठाएगी या नहीं।
स्रोत: webindia123.com



