मुख्य तथ्य
- व्याख्यान
- 12वां जी. रामचंद्रन स्मृति व्याख्यान
- वक्ता
- श्री स्वामीनाथन जे, डिप्टी गवर्नर, आरबीआई
- तिथि
- 30 अप्रैल 2026
- स्थान
- मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, चेन्नई
- मुख्य विषय
- सीख, निर्णय और पर्यवेक्षण
पृष्ठभूमि
भारतीय रिज़र्व बैंक के डिप्टी गवर्नर श्री स्वामीनाथन जे ने 30 अप्रैल 2026 को चेन्नई के मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में 12वां जी. रामचंद्रन स्मृति व्याख्यान दिया। यह व्याख्यान आरबीआई की वेबसाइट पर 4 मई 2026 को प्रकाशित किया गया।
श्री जी. रामचंद्रन भारत की आर्थिक और वित्तीय संस्थाओं के निर्माण में योगदान देने वाली पीढ़ी से थे। वे मद्रास विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में प्रथम श्रेणी में प्रथम थे और सिविल सेवा की अखिल भारतीय परीक्षा में टॉपर रहे। उन्होंने तमिलनाडु में वित्त सचिव, प्रधानमंत्री सचिवालय में कार्य किया और बाद में भारत सरकार के वित्त सचिव बने। वे बैंक राष्ट्रीयकरण और गरीबी उन्मूलन जैसी प्रमुख आर्थिक नीतियों से जुड़े रहे और एशियाई विकास बैंक से कार्यकारी निदेशक के रूप में सेवानिवृत्त हुए।
इस अवसर पर मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के अध्यक्ष डॉ. सी. रंगराजन और निदेशक डॉ. एन. आर. भानुमूर्ति सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
वर्तमान स्थिति
अपने व्याख्यान में श्री स्वामीनाथन जे ने कहा कि बैंकिंग को केवल संख्याओं, मॉडलों या विनियमों से नहीं समझा जा सकता, हालांकि ये तीनों महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि बैंकिंग को अनुभव, संस्थागत व्यवहार और उस सार्वजनिक उद्देश्य के माध्यम से भी समझा जाना चाहिए जिसे वित्त पूरा करने के लिए होता है।
उन्होंने बैंकिंग में अपने जीवन से तीन शिक्षाओं का उल्लेख किया: कक्षा की शिक्षा, बैंकिंग काउंटर की शिक्षा और पर्यवेक्षण की शिक्षा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक एक अलग दृष्टिकोण प्रदान करती है और साथ में वे बैंकिंग को अधिक व्यापक रूप से समझने में मदद करती हैं।
उन्होंने कहा कि अर्थशास्त्र की अच्छी शिक्षा शक्तिशाली होती है क्योंकि यह सरल लेकिन गहरे प्रश्न पूछना सिखाती है, जैसे प्रोत्साहन क्या हैं, लागत कौन वहन करता है, लाभ किसे मिलता है, नियम बदलने पर क्या होता है, और अनपेक्षित परिणाम क्या हो सकते हैं।
| तत्व | विवरण |
|---|---|
| बैंक की परिभाषा | वादों का समूह |
| शिक्षाएं | कक्षा, बैंकिंग काउंटर, पर्यवेक्षण |
| आर्थिक प्रश्न | प्रोत्साहन, लागत, लाभ, नियम परिवर्तन, अनपेक्षित परिणाम |
प्रभाव
श्री स्वामीनाथन जे ने कहा कि एक बैंक केवल एक इमारत, बैलेंस शीट या फोन का ऐप नहीं है, बल्कि वादों का एक समूह है। यह जमाकर्ताओं से वादा करता है कि उनका पैसा सुरक्षित रहेगा और जरूरत पड़ने पर उपलब्ध होगा। यह उधारकर्ताओं से उचित शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराने का वादा करता है।
बैंक शेयरधारकों से वादा करता है कि उनकी पूंजी की देखभाल की जाएगी, और नियामक से वादा करता है कि वह विवेकपूर्ण ढंग से काम करेगा। भारत जैसे देश में बैंकों पर समावेशी आर्थिक विकास का समर्थन करने की व्यापक विकासात्मक अपेक्षाएं भी होती हैं।
ये वादे और अपेक्षाएं बैंकिंग क्षेत्र के कामकाज को प्रभावित करती हैं और इस बात को रेखांकित करती हैं कि बैंकिंग का सार्वजनिक उद्देश्य वित्तीय स्थिरता और समावेशी विकास से जुड़ा है।
भविष्य का परिदृश्य
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि बैंकिंग को केवल संख्याओं और मॉडलों के आधार पर समझा जाता है, तो संस्थागत व्यवहार और सार्वजनिक उद्देश्य की अनदेखी हो सकती है, जिससे विनियामक निरीक्षण में कमियां रह सकती हैं।
यदि बैंकिंग में अनुभव और निर्णय को शामिल किया जाता है, तो पर्यवेक्षण अधिक प्रभावी हो सकता है और वित्तीय प्रणाली में विश्वास बढ़ सकता है।
भविष्य में, बैंकिंग शिक्षा और पर्यवेक्षण में सार्वजनिक उद्देश्य पर जोर देने से वित्तीय समावेशन और आर्थिक विकास को बल मिल सकता है, लेकिन यह नीति निर्माताओं और संस्थानों के रुख पर निर्भर करेगा।
स्रोत: Reserve Bank of India



