मुख्य तथ्य
- समर्थन
- सीजेपी ने झारखंड में परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में छात्रों का समर्थन किया
- अनशन
- देवेंद्र नाथ महतो ने रविवार रात 10 बजे आमरण अनशन शुरू किया
- मांगें
- 14वीं JPSC परीक्षा और JSSC-CGL सहित अन्य परीक्षाओं की सीबीआई और ईडी जांच
- धरना स्थल
- रांची का जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम
- आंदोलन की शुरुआत
- 5 जुलाई से शुरू, 25 जुलाई से दिन-रात सत्याग्रह, 29 जुलाई से अनिश्चितकालीन धरना
पृष्ठभूमि
झारखंड में विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र पिछले कई दिनों से आंदोलनरत हैं। यह आंदोलन 5 जुलाई से शुरू हुआ था और 25 जुलाई से रात-दिन सत्याग्रह जारी है। छात्रों का मुख्य आरोप 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर है।
प्रदर्शनकारी छात्र 29 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। वे इन परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। शनिवार शाम को राजधानी में हजारों छात्रों ने मशाल जुलूस निकाला और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की।
वर्तमान स्थिति
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने रविवार रात वीडियो कॉल के माध्यम से छात्र नेताओं से बात की। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों से बात की। सीजेपी झारखंड के सभी छात्रों के साथ खड़ी है और उनकी मांगों का समर्थन करती है।"
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने रविवार रात करीब 10 बजे जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन स्थल पर आमरण अनशन शुरू किया। उन्होंने 14वीं JPSC परीक्षा, JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की सीबीआई और ईडी से जांच की मांग की। अनशन शुरू करने से पहले उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों का कथित अनियमितताओं के प्रति "उदासीन रवैया" छात्रों, युवाओं और अभ्यर्थियों का मनोबल गिरा रहा है।
सोमवार को सोशल मीडिया पोस्ट में महतो ने कहा, "यह अनशन का दूसरा दिन है। यह संघर्ष, जो 5 जुलाई को शुरू हुआ और 25 जुलाई से जारी दिन-रात सत्याग्रह अब कठिन दौर में पहुंच गया है। शरीर में कमजोरी है, कदम भारी हैं, लेकिन छात्रों को न्याय दिलाने का संकल्प पहले से कहीं अधिक मजबूत है।" उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों मेहनती युवाओं के भविष्य के लिए है।
| तारीख | घटना |
|---|---|
| 5 जुलाई | आंदोलन की शुरुआत |
| 25 जुलाई | दिन-रात सत्याग्रह शुरू |
| 29 जुलाई | अनिश्चितकालीन धरना शुरू |
| शनिवार शाम | मशाल जुलूस |
| रविवार रात 10 बजे | आमरण अनशन शुरू |
| सोमवार | अनशन का दूसरा दिन |
प्रभाव
इस आंदोलन का सीधा असर झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। छात्रों की प्राथमिक मांग 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करना और एजेंसी द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं की जांच करना है। यदि सरकार इन मांगों पर विचार करती है, तो परीक्षा कार्यक्रम में बदलाव हो सकता है और नई परीक्षा तिथियों की घोषणा हो सकती है।
आंदोलन के कारण छात्रों में अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे उनकी तैयारी और मानसिक स्थिति प्रभावित हो रही है। देशभर से लोग ऑनलाइन डिलीवरी ऐप के माध्यम से प्रदर्शन स्थल पर खाद्य सामग्री भेजकर समर्थन जता रहे हैं, जिससे आंदोलन को व्यापक समर्थन मिल रहा है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि सरकार छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करती है और सीबीआई या ईडी जांच की घोषणा करती है, तो आंदोलन समाप्त हो सकता है। हालांकि, यदि सरकार अनशन को नजरअंदाज करती है, तो आंदोलन और तेज हो सकता है और अन्य छात्र संगठन भी इसमें शामिल हो सकते हैं।
महतो ने कहा है कि जब तक पारदर्शिता, निष्पक्षता और न्याय सुनिश्चित नहीं होता, छात्रों का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सभी साथियों से आंदोलन को शांतिपूर्ण, संवैधानिक और अनुशासित रखने की अपील की है। यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में प्रशासन और सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।
स्रोत: tribuneindia.com



