मुख्य तथ्य
- दैनिक हवाई यात्री
- लगभग 80 लाख
- सबसे अधिक प्रभावित आयु वर्ग
- 45-54 वर्ष
- विशेषज्ञों के अनुसार डर का कारण
- अप्रत्यक्ष आघात और मीडिया कवरेज
- अध्ययन में शामिल पत्रिका
- Behavioural Sciences
- पायलटों पर प्रभाव
- दुर्घटनाओं से भावनात्मक प्रतिक्रियाएं और स्थिति जागरूकता प्रभावित
पृष्ठभूमि
हाल के महीनों में विमानों से जुड़ी कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें अचानक अशांति और तकनीकी खराबी शामिल हैं। इन घटनाओं ने दुनिया भर के यात्रियों में हवाई यात्रा को लेकर बेचैनी बढ़ा दी है। हालांकि, विमानन अब भी परिवहन के सबसे सुरक्षित साधनों में से एक है, लेकिन इन घटनाओं के मीडिया कवरेज ने आम और कभी-कभार उड़ान भरने वाले यात्रियों में डर और चिंता को बढ़ा दिया है।
हर दिन लगभग 80 लाख लोग हवाई यात्रा करते हैं। इनमें बड़ी संख्या में 45-54 आयु वर्ग के लोग शामिल हैं, जिन्हें मनोवैज्ञानिक एरिक्सन के अनुसार 'सैंडविच स्टेज' कहा जाता है। इस अवस्था में लोग बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल और अपने बच्चों की परवरिश के बीच फंसे होते हैं, साथ ही करियर, शादी और दोस्तों को संभालते हैं। ऐसे में उड़ान भरना उनके लिए अतिरिक्त तनाव का कारण बन सकता है।
वर्तमान स्थिति
विमानन मनोवैज्ञानिक एमिली कार्टर बताती हैं कि मस्तिष्क का एमिग्डाला डर को संसाधित करता है, और जब यह सक्रिय होता है, तो यह तर्क को ओवरराइड कर सकता है। यही कारण है कि अनुभवी यात्री भी सुरक्षा आंकड़ों को जानने के बावजूद अचानक भय महसूस कर सकते हैं। वहीं, नैदानिक मनोवैज्ञानिक सारा मिशेल कहती हैं कि हमारा दिमाग खतरों पर ध्यान देने के लिए तैयार है, और अलार्मिंग खबरों के बार-बार संपर्क में आने से उड़ान वास्तव में जितनी खतरनाक है, उससे कहीं अधिक खतरनाक लग सकती है।
विमान दुर्घटनाओं की बड़े पैमाने पर कवरेज और सोशल मीडिया पर वायरल होते वीडियो 'अप्रत्यक्ष आघात' का कारण बन सकते हैं। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें किसी दर्दनाक घटना को देखकर ही व्यक्ति का तंत्रिका तंत्र ऐसे प्रतिक्रिया करता है जैसे वह खुद खतरे में हो। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी स्थिति में डर, घबराहट और असहायता की भावना पूरी तरह से वैध है।
| उपाय | विवरण |
|---|---|
| शिक्षा | विमानन सुरक्षा प्रोटोकॉल को समझें; आंकड़े बताते हैं कि उड़ान ड्राइविंग से कहीं अधिक सुरक्षित है। |
| माइंडफुलनेस | गहरी सांस लेने और ग्राउंडिंग व्यायाम से उड़ान के दौरान चिंता कम होती है। |
| मीडिया सीमा | अलार्मिंग खबरों से बचें; केवल विश्वसनीय स्रोतों पर भरोसा करें। |
| नियंत्रण पर ध्यान | प्रतिष्ठित एयरलाइन चुनें, हाइड्रेटेड रहें और पर्याप्त आराम करें। |
| व्याकुलता | ऑडियोबुक, शांत संगीत या तनाव गेंदों का उपयोग करें। |
| पेशेवर मदद | यदि डर गंभीर हो, तो संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (सीबीटी) प्रभावी है। |
प्रभाव
उड़ान के डर का सबसे अधिक प्रभाव 45-54 आयु वर्ग के यात्रियों पर पड़ता है, जो पहले से ही कई जिम्मेदारियों का बोझ उठा रहे हैं। उनके लिए उड़ान भरना, समय का ध्यान रखना और परिवार की चिंता करना, सब कुछ एक साथ करना मानसिक रूप से थका देने वाला हो सकता है। इसके अलावा, बार-बार विमान दुर्घटनाओं की खबरें देखने से यात्रियों में अप्रत्यक्ष आघात के लक्षण विकसित हो सकते हैं, जिससे उनकी दैनिक दिनचर्या और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।
विमानन कर्मचारियों और पायलटों पर भी इसका असर देखा गया है। 'बिहेवियरल साइंसेज' जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, दुर्घटनाओं और घटनाओं से पायलटों की भावनाओं और स्थिति जागरूकता पर अलग-अलग प्रभाव पड़ते हैं। दुर्घटनाओं से खुशी और उदासी में महत्वपूर्ण बदलाव आते हैं, और उच्च स्थिति जागरूकता वाले पायलट बेहतर भावनात्मक नियंत्रण दिखाते हैं।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि एयरलाइंस और नियामक निकाय सुरक्षा उपायों में सुधार जारी रखते हैं, तो उड़ान के डर में कमी आ सकती है। कुछ एयरलाइंस पहले से ही चालक दल के लिए गोपनीय परामर्श और सहकर्मी सहायता समूह शुरू कर रही हैं, साथ ही यात्रियों के लिए वीआर-आधारित एक्सपोज़र थेरेपी भी उपलब्ध करा रही हैं। यदि ये पहल सफल रहती हैं, तो भविष्य में उड़ान से जुड़ी चिंता को कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, यदि मीडिया में विमान घटनाओं की सनसनीखेज कवरेज जारी रहती है, तो यात्रियों का डर बना रह सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और तर्कसंगत दृष्टिकोण के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण है। यदि लोग सुरक्षा प्रोटोकॉल के बारे में शिक्षित हों और माइंडफुलनेस तकनीकों का अभ्यास करें, तो वे उड़ान के दौरान अपनी चिंता को नियंत्रित कर सकते हैं।
स्रोत: thehindu.com



