मुख्य तथ्य
- निपटान दर
- 93% से अधिक
- कुल प्राप्त मामले
- 10 लाख से अधिक
- निपटाए गए मामले
- 9.32 लाख से अधिक
- नई पीठें
- जम्मू-श्रीनगर
- सर्किट बैठकें
- पुडुचेरी, लेह, कारगिल, विजयवाड़ा
- डिजिटल प्रणाली
- एसीआईएस, ई-ऑफिस, ई-एचआरएमएस, पीएफएमएस, ई-एसएएम
पृष्ठभूमि
केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) की स्थापना के बाद से उसे निर्णय के लिए 10 लाख से अधिक मामले प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 9.32 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया जा चुका है। इस प्रकार न्यायाधिकरण की कुल निपटान दर 93% से अधिक बनी हुई है।
न्यायमूर्ति मोरे ने बताया कि नए मामलों के लगातार आने के बावजूद हाल के वर्षों में लंबित मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है और 2025 में वार्षिक निपटारे की संख्या नए मामलों से अधिक रही।
वर्तमान स्थिति
केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजीत वसंतराव मोरे ने मंगलवार को केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री तथा कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात कर न्यायाधिकरण की हालिया पहलों और सुधारों की जानकारी दी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रौद्योगिकी आधारित शासन, डिजिटल परिवर्तन और प्रक्रिया सरलीकरण ने प्रशासनिक न्याय को अधिक तेज, पारदर्शी और सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि सीएटी का विस्तारित डिजिटल इकोसिस्टम, मजबूत बुनियादी ढांचा और मामलों के निपटारे में निरंतर सुधार शासन सुधारों की व्यापक दिशा को दर्शाता है।
| विवरण | संख्या |
|---|---|
| कुल प्राप्त मामले | 10 लाख से अधिक |
| निपटाए गए मामले | 9.32 लाख से अधिक |
| निपटान दर | 93% से अधिक |
प्रभाव
न्यायमूर्ति मोरे ने बताया कि सीएटी ने हाल के वर्षों में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। इनमें जम्मू-श्रीनगर में नई पीठों की स्थापना के साथ पुडुचेरी, लेह, कारगिल और विजयवाड़ा में सर्किट बैठकों की शुरुआत शामिल है। इन पहलों से दूरदराज और कम सेवा वाले क्षेत्रों में प्रशासनिक न्याय तक पहुंच का विस्तार हुआ है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि नई पीठों की स्थापना और भौगोलिक रूप से दूरदराज क्षेत्रों में सर्किट बैठकों की शुरुआत से प्रशासनिक न्याय वादियों के करीब पहुंचा है। इससे यात्रा की आवश्यकता कम हुई है और देश के विभिन्न हिस्सों में कार्यरत सरकारी कर्मचारियों के लिए न्यायिक सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है।
एडवांस्ड केस इंफॉर्मेशन सिस्टम (एसीआईएस) के तहत ई-फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई, ऑनलाइन डिस्प्ले बोर्ड, एसएमएस और ई-मेल अलर्ट, अदालती फीस का ऑनलाइन भुगतान, मोबाइल एप्लिकेशन और ई-प्रमाणित प्रतियों जैसी डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे पेपरलेस अदालती कामकाज को बढ़ावा मिला है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार संस्थागत क्षमता मजबूत करने, सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार लाने और कुशल, जवाबदेह तथा नागरिक-केंद्रित संस्थानों के निर्माण के लिए प्रौद्योगिकी आधारित सुधारों का समर्थन जारी रखेगी।
यदि ये डिजिटल पहलें जारी रहती हैं, तो सीएटी की निपटान दर में और सुधार हो सकता है और लंबित मामलों में कमी आ सकती है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि भविष्य में नए मामलों की संख्या किस दर से बढ़ेगी।
यदि सर्किट बैठकों और नई पीठों का विस्तार होता है, तो दूरदराज के क्षेत्रों में प्रशासनिक न्याय तक पहुंच और आसान हो सकती है। लेकिन इसके लिए संसाधनों की उपलब्धता और प्रशासनिक सहयोग आवश्यक होगा।
स्रोत: डीडी न्यूज़, प्रसार भारती



