मुख्य तथ्य
- स्थगन समय
- 12.20 बजे तक
- पारित विधेयक
- 11
- अध्यक्ष की सेवानिवृत्ति आयु
- 65 से 67 वर्ष
- उपाध्यक्ष/सदस्य की सेवानिवृत्ति आयु
- 62 से 65 वर्ष
- विस्थापित परिवारों को भूमि अधिकार
- विभाजन और 1971 युद्ध के बाद बसे परिवार
पृष्ठभूमि
उत्तर प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान की कथित चोरी के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायकों ने जमकर हंगामा किया। विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडेय ने इस मामले को आस्था से जोड़ते हुए चर्चा की मांग की।
विधानसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई थी, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण प्रश्नकाल बाधित रहा। अध्यक्ष सतीश महाना ने चर्चा की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद सपा विधायक कूप में उतर आए और भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
वर्तमान स्थिति
अध्यक्ष ने हंगामा कर रहे सदस्यों से कहा कि यदि उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए कोई दान दिया है तो वे रसीद पेश करें। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सपा पर पलटवार करते हुए उसके शासनकाल में कारसेवकों पर गोली चलाने का जिक्र किया और कहा कि पार्टी का जनता की आस्था से कोई लेना-देना नहीं है।
हंगामे के बीच अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 12.20 बजे तक स्थगित कर दी, जिससे प्रश्नकाल अचानक समाप्त हो गया। हालांकि, विरोध के बावजूद विधानसभा ने ध्वनिमत से 11 विधेयक पारित किए।
| पद | पुरानी आयु | नई आयु |
|---|---|---|
| अध्यक्ष | 65 वर्ष | 67 वर्ष |
| उपाध्यक्ष/सदस्य | 62 वर्ष | 65 वर्ष |
प्रभाव
पारित विधेयकों में उत्तर प्रदेश लोक सेवा अधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल है, जिसके तहत अधिकरण के अध्यक्ष की सेवानिवृत्ति आयु 65 से बढ़ाकर 67 वर्ष और उपाध्यक्षों तथा सदस्यों की आयु 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष की गई है।
इसके अलावा, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता में संशोधन पारित किया गया, जिससे विभाजन और 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के बाद राज्य में बसे विस्थापित परिवारों को भूमि स्वामित्व अधिकार मिलेंगे। इन विधेयकों का सीधा असर न्यायिक अधिकरणों के अधिकारियों और विस्थापित परिवारों पर पड़ेगा।
आगे की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि विपक्ष दान चोरी के मुद्दे पर अपना विरोध जारी रखता है, तो आगामी सत्रों में भी सदन की कार्यवाही बाधित हो सकती है और महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा प्रभावित हो सकती है।
सरकार की ओर से इस मामले में कोई ठोस जानकारी साझा नहीं की गई है, इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि दान चोरी की जांच होगी या नहीं। यदि जांच शुरू होती है, तो विपक्ष का हंगामा कम हो सकता है, अन्यथा सदन में गतिरोध जारी रहने की संभावना है।
स्रोत: dailypioneer.com



