मुख्य तथ्य
- रक्षा मंत्री का बयान
- ख्वाजा आसिफ ने प्रदर्शनकारियों को 'दुश्मन' कहा
- प्रदर्शन की शुरुआत
- 5 जून से
- मौतें
- 50 से अधिक
- घायल
- सैकड़ों
- जेकेजेएएसी पर प्रतिबंध
- आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत
- मानवीय अपील
- पाकिस्तान रेड क्रिसेंट को पत्र
पृष्ठभूमि
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) के प्रदर्शनकारियों को भारत से जोड़कर 'दुश्मन' करार दिया है। यूरेशिया रिव्यू की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह बयान दिखाता है कि इस्लामाबाद पीओजेके पर अपना अवैध कब्जा जारी रखे हुए है, उसे एक उपनिवेश मानता है और वहां के लोगों के साथ द्वितीय श्रेणी के नागरिकों जैसा व्यवहार करता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह मामला पीओजेके के कश्मीरियों को संवैधानिक प्रतिबंधों, राजनीतिक हेरफेर और सैन्य दमन के माध्यम से वश में करने का है, जबकि विडंबना यह है कि पाकिस्तान उन्हें 'आज़ाद' कहता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलीबारी से साबित होता है कि पीओजेके के निवासियों की जान की कोई कीमत नहीं है, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की उदासीनता भी स्पष्ट है।
वर्तमान स्थिति
पीओजेके में वर्तमान में दशकों में स्थानीय आबादी और पाकिस्तानी राज्य के बीच सबसे व्यापक टकराव देखा जा रहा है। प्रदर्शन 5 जून से शुरू हुए और लगातार तेज होते जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कठोर कार्रवाई की है, जिसमें पिछले कई हफ्तों में 50 से अधिक लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं।
पाकिस्तानी अधिकारी दमन के बावजूद प्रदर्शनों को दबाने में विफल रहे हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत जम्मू-कश्मीर संयुक्त आवामी एक्शन कमेटी (जेकेजेएएसी) को प्रतिबंधित कर दिया है। यूरेशिया रिव्यू की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह संकट पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर की जिद्दी मानसिकता का परिणाम है, और उन्हें अपनी नई वर्दी पर गर्व है, लेकिन किसी को उन्हें बताना चाहिए कि वे वास्तव में कुछ भी नहीं पहने हैं।
| विवरण | संख्या |
|---|---|
| मौतें | 50 से अधिक |
| घायल | सैकड़ों |
प्रभाव
पीओजेके में बढ़ती अस्थिरता के बीच, जेकेजेएएसी ने पाकिस्तान रेड क्रिसेंट सोसाइटी को एक पत्र लिखा है, जिसमें रावलाकोट और कब्जे वाले क्षेत्र के अन्य प्रभावित इलाकों में तत्काल मानवीय और चिकित्सा सहायता का अनुरोध किया गया है। पत्र में कहा गया है कि 27-28 जुलाई की घटनाओं के बाद पीओजेके की स्थिति एक 'गंभीर मानवीय और चिकित्सा आपातकाल' बन गई है।
पत्र में प्रभावित समुदायों से मिली रिपोर्टों का हवाला देते हुए नागरिक हताहत, बंदूक की गोली से चोटें, एम्बुलेंस मार्गों में बाधा, अस्पतालों तक सीमित पहुंच और दवाओं, रक्त आपूर्ति और आपातकालीन देखभाल में कठिनाइयों का उल्लेख किया गया है। जेकेजेएएसी ने रेड क्रिसेंट से रावलाकोट और अन्य प्रभावित स्थानों पर एक स्वतंत्र आपातकालीन मूल्यांकन और चिकित्सा दल भेजने, एम्बुलेंस, मोबाइल मेडिकल यूनिट, प्रशिक्षित प्राथमिक चिकित्सा कर्मियों और आघात देखभाल आपूर्ति उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि पाकिस्तानी अधिकारी प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ध्यान नहीं देते हैं, तो विरोध प्रदर्शन और तेज हो सकते हैं और हिंसा में और वृद्धि हो सकती है। जेकेजेएएसी की मांगों में बिजली दरों में कटौती, गेहूं पर सब्सिडी और राजनीतिक विशेषाधिकारों को समाप्त करना शामिल है, जिन्हें अनदेखा किए जाने की संभावना है।
यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवीय संगठन हस्तक्षेप करते हैं, तो पीड़ितों को राहत मिल सकती है, लेकिन राजनीतिक समाधान की संभावना कम है। यदि पाकिस्तान सरकार संवाद और सुधारों के लिए तैयार होती है, तो स्थिति में सुधार हो सकता है, लेकिन वर्तमान रुख को देखते हुए यह संभावना कमजोर है।
स्रोत: prokerala.com



