मुख्य तथ्य
- योजना
- यूमीद (जम्मू-कश्मीर ग्रामीण आजीविका मिशन)
- लाभार्थी
- स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं
- स्थान
- भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के गांव
- मासिक आय
- लगभग 20,000 रुपये प्रति सदस्य
- वार्षिक आय
- लाखों रुपये
- मुख्य गतिविधियां
- मसालों, मिर्च उत्पादों और अन्य वस्तुओं का उत्पादन
पृष्ठभूमि
जम्मू-कश्मीर ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित यूमीद योजना का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इस योजना के तहत महिलाओं को आजीविका के साधन उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।
योजना का प्रभाव विशेष रूप से पिछले कुछ वर्षों में अधिक दिखाई दिया है, खासकर जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के किनारे बसे गांवों की महिलाओं ने बताया कि इस योजना ने उनके जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव लाया है।
वर्तमान स्थिति
यूमीद स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से वे बड़े पैमाने पर काम कर रही हैं, जिसमें मसालों, मिर्च उत्पादों और अन्य वस्तुओं का उत्पादन शामिल है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'वोकल फॉर लोकल' पहल ने यूमीद योजना के तहत उनके काम में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
महिलाओं के अनुसार, समूह की वार्षिक आय लाखों में पहुंच गई है। लाभार्थी सुषमा ने बताया कि हालांकि वह यूमीद योजना से जुड़ी हैं, लेकिन उनके जीवन में वास्तविक बदलाव 5 अगस्त 2019 के बाद आया। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अब अधिक स्वतंत्रता और सुरक्षा की भावना मिली है।
| विवरण | मान |
|---|---|
| प्रति सदस्य मासिक आय | लगभग 20,000 रुपये |
| समूह की वार्षिक आय | लाखों रुपये |
प्रभाव
सुषमा ने बताया कि अनुच्छेद 370 और 35ए हटाए जाने से पहले वह अपनी बेटी के भविष्य के लिए लाडली योजना का लाभ लेना चाहती थीं, लेकिन ऐसा नहीं कर पाईं। संवैधानिक बदलावों के बाद उन्हें ये लाभ मिले, जिसे उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से एक उपहार बताया।
अन्य लाभार्थियों ने भी कहा कि योजना से जुड़कर वे अपने परिवारों का भरण-पोषण कर पा रही हैं और बेहतर जीवन जी रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को महिला सशक्तिकरण का श्रेय दिया और कहा कि उनके दृष्टिकोण से महिलाओं की आर्थिक भागीदारी मजबूत हुई है। सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने की चुनौतियों के बावजूद, महिलाएं अब कार्यशालाओं और प्रदर्शनियों में भाग ले रही हैं और स्थानीय उत्पादों के माध्यम से अपने क्षेत्र को पहचान दिला रही हैं।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि यह रुझान जारी रहता है, तो यूमीद योजना से जुड़ी महिलाओं की आय और अधिक बढ़ सकती है, और अधिक महिलाएं इससे जुड़ सकती हैं। सुषमा ने कहा कि कई और महिलाएं इस पहल से जुड़ चुकी हैं, जबकि कई अन्य इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक हैं।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि योजना का विस्तार किस गति से होगा और सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा स्थिति कैसी रहेगी। यदि सरकारी सहायता और स्थानीय उत्पादों की मांग बनी रहती है, तो महिलाओं की आर्थिक स्थिति में और सुधार हो सकता है। लेकिन यदि परिस्थितियां बदलती हैं, तो इसका प्रभाव भी देखने को मिल सकता है।
स्रोत: ianslive.in



