मुख्य तथ्य
- एनपीएस एयूएम
- ₹17 लाख करोड़ से अधिक (30 जून 2026 तक)
- डीमैट खाते
- 5.5 करोड़ (FY21) से बढ़कर 22.9 करोड़ (मई 2026)
- म्यूचुअल फंड एयूएम
- ₹33.1 लाख करोड़ (जून 2021) से ₹82.2 लाख करोड़ (जून 2026)
- म्यूचुअल फंड फोलियो
- 12.9 करोड़ (FY22) से 27.7 करोड़
- बी30 हिस्सेदारी
- 16% (FY22) से लगभग 19% (₹15.5 लाख करोड़) 2026 की शुरुआत में
पृष्ठभूमि
हाल के वर्षों में भारतीय निवेशकों का रुझान पारंपरिक निवेश साधनों जैसे सोना और बैंक जमा से हटकर शेयर, ग्लोबल इक्विटी, सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी), नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) और रियल एस्टेट जैसे संपत्ति-निर्माण विकल्पों की ओर बढ़ा है। यह बदलाव सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी देखा जा रहा है, जहां बढ़ती आय ने निवेशकों को वित्तीय बाजारों और भौतिक संपत्तियों में सक्रिय रूप से निवेश करने के लिए प्रेरित किया है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की 2026 की वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार, भारत की वित्तीय प्रणाली वास्तविक अर्थव्यवस्था और विकास गति के लिए एक प्रमुख स्तंभ बनी हुई है। पिछले एक दशक में निवेश पैटर्न में उल्लेखनीय बदलाव आया है, जिसमें निवेशक भौतिक संपत्तियों से हटकर वित्तीय संपत्तियों पर अधिक निर्भर हो गए हैं। एनपीएस का विस्तार इसका एक उदाहरण है, जो 30 जून 2026 तक 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कोष (एयूएम) के साथ एक प्रमुख दीर्घकालिक वित्तीय उत्पाद बन गया है।
वर्तमान स्थिति
निवेशक आधार अब युवा, विविध और छोटे शहरों से आने वाला है। बेन एंड कंपनी के अनुसार, माइक्रो-एसआईपी (250 रुपये), एनपीएस जैसी सेवानिवृत्ति-केंद्रित योजनाएं और सरलीकृत फंड संरचनाएं वंचित और ग्रामीण निवेशकों को वित्तीय प्रणाली में ला रही हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म म्यूचुअल फंड और प्रत्यक्ष इक्विटी निवेश में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जो वेतनभोगी मिलेनियल्स, जेन जेड, टियर-2/3 शहरों के स्व-रोजगार और व्यवसाय मालिकों तक फैला हुआ है।
डीमैट खातों की संख्या पिछले पांच वर्षों में चार गुना से अधिक बढ़ी है, जो वित्त वर्ष 2021 में लगभग 5.5 करोड़ से बढ़कर मई 2026 तक 22.9 करोड़ से अधिक हो गई है। एएमएफआई, सेबी और आर्थिक सर्वेक्षण के रुझान बताते हैं कि यह वृद्धि मुख्य रूप से टियर-2, टियर-3 और अन्य उभरते बाजारों से प्रेरित है। म्यूचुअल फंड उद्योग का एयूएम जून 2021 में 33.1 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर जून 2026 में 82.2 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जबकि म्यूचुअल फंड फोलियो वित्त वर्ष 2022 में 12.9 करोड़ से बढ़कर 27.7 करोड़ हो गए हैं।
| संकेतक | पहले | बाद में |
|---|---|---|
| डीमैट खाते (करोड़) | 5.5 (FY21) | 22.9 (मई 2026) |
| म्यूचुअल फंड एयूएम (₹ लाख करोड़) | 33.1 (जून 2021) | 82.2 (जून 2026) |
| म्यूचुअल फंड फोलियो (करोड़) | 12.9 (FY22) | 27.7 |
| बी30 हिस्सेदारी (% एयूएम) | 16 (FY22) | 19 (2026 की शुरुआत) |
प्रभाव
इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रभाव खुदरा निवेश पूंजी पर पड़ा है, जो 2047 तक भारत की अर्थव्यवस्था को 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह विकसित भारत मिशन की कुंजी है। एसआईपी और प्रत्यक्ष इक्विटी (स्टॉक और एनपीएस) इस विकास के प्रमुख चालक रहे हैं। बी30 शहरों की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2022 में उद्योग एयूएम के 16% से बढ़कर 2026 की शुरुआत में लगभग 19% (15.5 लाख करोड़ रुपये) हो गई है, जिसमें 64% से अधिक इक्विटी-उन्मुख योजनाओं में निवेशित है।
निवेशक व्यवहार में भी परिपक्वता आई है, मार्च 2020 से मार्च 2025 के बीच एसआईपी होल्डिंग्स पांच वर्ष से अधिक की अवधि की ओर स्थानांतरित हुई हैं। आवास क्षेत्र में भी बदलाव देखा जा रहा है, जहां लोग सिर्फ घर नहीं खरीद रहे बल्कि एक जीवनशैली में निवेश कर रहे हैं। टियर-2 और 3 शहरों में किफायती आवास खंड में वृद्धि देखी जा रही है, और प्रौद्योगिकी ने दस्तावेज़ीकरण और प्रक्रियाओं को सरल बनाकर एनबीएफसी और वित्तीय संस्थानों को ऋण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने में सक्षम बनाया है।
भविष्य का परिदृश्य
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
जैसे-जैसे भारत विकसित अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है, घरेलू बचत का वित्तीयकरण और तेज होने की संभावना है। बढ़ती आय, डिजिटल पहुंच और वित्तीय जागरूकता म्यूचुअल फंड, बीमा, पेंशन और इक्विटी बाजारों में भागीदारी को बढ़ावा देती रहेगी। यदि यह रुझान जारी रहता है, तो निवेशकों का ध्यान केवल बचत से हटकर अनुशासित निवेश के माध्यम से दीर्घकालिक धन सृजन पर केंद्रित हो सकता है।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि भू-राजनीतिक तनाव और मानसून की अनिश्चितताएं भविष्य में निवेश प्रवाह को किस हद तक प्रभावित करेंगी। यदि वैश्विक आर्थिक स्थितियां प्रतिकूल होती हैं, तो बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है, जिससे निवेशकों का विश्वास प्रभावित हो सकता है। दूसरी ओर, यदि सरकारी नीतियां और डिजिटल बुनियादी ढांचा मजबूत होता रहा, तो छोटे शहरों से निवेश भागीदारी और बढ़ सकती है। फिलहाल, यह देखना बाकी है कि ये कारक किस दिशा में काम करेंगे।
स्रोत: hindustantimes.com



