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MPUDC ठेकेदार के खिलाफ जाली बैंक गारंटी मामले में FIR दर्ज

मध्य प्रदेश शहरी विकास कंपनी (MPUDC) की शिकायत पर भोपाल के एमपी नगर थाने में ठेकेदार के खिलाफ जाली बैंक गारंटी देने का मामला दर्ज किया गया है।

MPUDC ठेकेदार के खिलाफ जाली बैंक गारंटी मामले में FIR दर्ज
Graphic: Amrit Khabar NewsroomImage rights policy

मुख्य तथ्य

मामला दर्ज
मंगलवार को भोपाल के एमपी नगर थाने में FIR दर्ज
आरोपी
दक्षिण गुजरात कंस्ट्रक्शन कंपनी और इंजीनियरिंग प्रोफेशनल कंपनी का संयुक्त उद्यम
आरोप
चार निर्माण पैकेजों के लिए जाली बैंक गारंटी जमा करना
शिकायतकर्ता
मध्य प्रदेश शहरी विकास कंपनी (MPUDC)
धाराएं
BNS की धारा 318(4), 336(3), 338 और 340(2)
अधिकारी
संकेत भोंडवे, नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त और MPUDC के प्रबंध निदेशक

पृष्ठभूमि

मध्य प्रदेश शहरी विकास कंपनी (MPUDC) ने चार निर्माण पैकेजों के लिए टेंडर प्रक्रिया में जाली बैंक गारंटी प्रस्तुत करने के आरोप में एक ठेकेदार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। यह मामला भोपाल के एमपी नगर थाने में मंगलवार को दर्ज किया गया।

शिकायत दक्षिण गुजरात कंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड और इंजीनियरिंग प्रोफेशनल कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के संयुक्त उद्यम के खिलाफ दर्ज की गई है। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान बैंक गारंटी जमा की गई थी, जिसकी प्रामाणिकता को लेकर संदेह पैदा हुआ।

वर्तमान स्थिति

MPUDC द्वारा की गई विस्तृत जांच में कथित तौर पर बैंक गारंटी जाली पाई गई। इसके बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त और MPUDC के प्रबंध निदेशक संकेत भोंडवे ने अधिकारियों को कानूनी कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए।

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 336(3), 338 और 340(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। धारा 318(4) धोखाधड़ी और संपत्ति या मूल्यवान दस्तावेजों की डिलीवरी कराने से संबंधित है, जबकि धारा 336(3) धोखाधड़ी के इरादे से दस्तावेजों या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जालसाजी से संबंधित है। धारा 338 बैंक गारंटी सहित मूल्यवान प्रतिभूतियों की जालसाजी से संबंधित है, और धारा 340(2) जाली दस्तावेजों को असली के रूप में उपयोग करने से संबंधित है।

प्रभाव

इस मामले से सरकारी परियोजनाओं में ठेकेदारों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच बढ़ाने की आवश्यकता पर बल मिलता है। अधिकारियों ने धोखाधड़ी को रोकने और सार्वजनिक धन की सुरक्षा के लिए सत्यापन प्रक्रिया को कड़ा करने की बात कही है।

संकेत भोंडवे ने कहा कि सरकारी कार्यों में धोखाधड़ी के प्रति विभाग की शून्य-सहिष्णुता की नीति है। उन्होंने कहा कि सरकारी परियोजनाओं में जाली दस्तावेज जमा करने या वित्तीय अनियमितता में शामिल होने के किसी भी प्रयास से कानून के तहत सख्ती से निपटा जाएगा।

भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

पुलिस ने कहा है कि दस्तावेजों की प्रामाणिकता और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

यदि इस तरह के मामले सामने आते रहे, तो सरकारी विभाग दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया को और सख्त कर सकते हैं। इससे भविष्य में ठेकेदारों को अधिक पारदर्शिता बरतनी पड़ सकती है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस मामले में अंतिम निर्णय क्या होगा, क्योंकि जांच अभी जारी है।

स्रोत: prokerala.com

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