मुख्य तथ्य
- विधायक
- सज्जाद शाहीन (नेशनल कॉन्फ्रेंस)
- मुख्य मांग
- जम्मू-कश्मीर की राज्य का दर्जा बहाल किया जाए
- हमले का संदर्भ
- पहलगाम के बैसारन में 26 लोगों की मौत
- हाल की घटनाएं
- कुलगाम में दो मजदूरों की हत्या, अनंतनाग में पुलिसकर्मी पर गोलीबारी
- आर्थिक आंकड़े
- जीएसडीपी 1.68 लाख करोड़ से बढ़कर 2.62 लाख करोड़ रुपये (2020-21 से 2024-25)
- स्रोत
- एएनआई, सीएजी रिपोर्ट 2024-25
पृष्ठभूमि
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने की बरसी पर नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के विधायक सज्जाद शाहीन ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि संविधानिक बदलाव के बाद भी क्षेत्र में आतंकवाद खत्म नहीं हुआ है।
शाहीन ने बीजेपी के उस दावे पर सवाल उठाया कि अनुच्छेद 370 आतंकवाद को बढ़ावा देता था। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता तो अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पहलगाम के बैसारन में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान नहीं जाती।
वर्तमान स्थिति
एएनआई से बात करते हुए शाहीन ने कहा, 'जम्मू-कश्मीर के लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ किया गया। इस राज्य को, जिसे देश का ताज कहा जाता है, अपग्रेड करके दो केंद्र शासित प्रदेशों में बदल दिया गया। भारत सरकार को संसद में दिए गए वादे के अनुसार जम्मू-कश्मीर की राज्य का दर्जा बहाल करना चाहिए। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में भी हलफनामा दिया है कि वह राज्य का दर्जा बहाल करेगी।'
उन्होंने कुलगाम में दो मजदूरों की हत्या और अनंतनाग में दिनदहाड़े एक पुलिसकर्मी पर गोली चलाने की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ये दिखाता है कि आतंकवाद अब भी एक गंभीर चुनौती है। शाहीन ने आरोप लगाया कि अनुच्छेद 370 हटाने का असली मकसद जम्मू-कश्मीर के लोगों को कमजोर करना था।
| वर्ष | जीएसडीपी (रुपये) | प्रति व्यक्ति आय (रुपये) | आर्थिक सेवाओं पर खर्च (रुपये) | सामाजिक सेवाओं पर खर्च (रुपये) | कुल खर्च/जीएसडीपी (%) |
|---|---|---|---|---|---|
| 2020-21 | 1.68 लाख करोड़ | 1.01 लाख | 14,842 करोड़ | 21,964 करोड़ | 37.66 |
| 2024-25 | 2.62 लाख करोड़ | 1.55 लाख | 23,257 करोड़ | 28,234 करोड़ | 31.45 |
प्रभाव
शाहीन ने कहा कि सरकार के वादों और कामों में साफ अंतर है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) की स्थितियां बिल्कुल अलग हैं। भारतीय केंद्र शासित प्रदेश में आर्थिक वृद्धि और बुनियादी ढांचे का विस्तार हो रहा है, जबकि पीओजेके आर्थिक संकट, राजनीतिक अशांति और बार-बार होने वाले विरोध प्रदर्शनों से जूझ रहा है।
कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (सीएजी) की 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर ने पिछले पांच वर्षों में लगातार आर्थिक प्रगति दर्ज की है। जीएसडीपी 2020-21 में 1.68 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 2.62 लाख करोड़ रुपये हो गई, जबकि प्रति व्यक्ति आय 1.01 लाख रुपये से बढ़कर 1.55 लाख रुपये हो गई।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि सरकार राज्य का दर्जा बहाल करने के अपने वादे पर अमल करती है, तो इससे क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता बढ़ सकती है और लोगों का भरोसा बहाल हो सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम कब उठाएगी।
अगर आतंकवाद की घटनाएं जारी रहती हैं, तो सुरक्षा चुनौतियां बनी रह सकती हैं और राजनीतिक बयानबाजी तेज हो सकती है। वहीं, आर्थिक विकास की मौजूदा रफ्तार बनी रही तो क्षेत्र की अर्थव्यवस्था सरकारी खर्च पर निर्भरता कम कर सकती है, जैसा कि सीएजी रिपोर्ट में संकेत दिया गया है।
स्रोत: asiabulletin.com
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जम्मू-कश्मीर के प्रमुख आर्थिक संकेतक (2020-21 से 2024-25)
2024-2523,257
सटीक आंकड़े देखें
| श्रेणी | आर्थिक सेवाओं पर खर्च (रुपये) | सामाजिक सेवाओं पर खर्च (रुपये) | कुल खर्च/जीएसडीपी (%) |
|---|---|---|---|
| 2020-21 | 14,842 | 21,964 | 37.66 |
| 2024-25 | 23,257 | 28,234 | 31.45 |
स्रोत:asiabulletin.com स्रोत-समर्थित



