मुख्य तथ्य
- घटना
- अगस्त 2022 में मुंबई की पत्रकार को सैल्मन साशिमी खाने के बाद आंतों में संक्रमण हुआ
- स्वीडन में फूड पॉइज़निंग
- अप्रैल 2026 में लगभग 100 लोग प्रभावित
- नवी मुंबई की घटना
- 11 लोगों ने स्मोक्ड सैल्मन खाया, सभी बीमार हुए
- FDA नियम
- -20°C पर 7 दिन या -35°C पर ब्लास्ट फ्रीज अनिवार्य
- FSSAI नियम
- क्विक-फ्रीज -18°C या उससे कम, परजीवी नाश के लिए कोई दिशानिर्देश नहीं
- रेस्तरां का उदाहरण
- मिज़ु इज़ाकाया -35°C पर टूना फ्रीज करता है; इज़ुमी -40°C पर सैल्मन, -50°C पर टूना
पृष्ठभूमि
अगस्त 2022 में, मुंबई की एक पत्रकार ने दक्षिण मुंबई के एक रेस्तरां में सैल्मन साशिमी खाने के बाद गंभीर सीने में जलन और ऊपरी पेट में सुई जैसी जलन महसूस की। कई डॉक्टरों ने इसे तनाव, चिंता और एसिड रिफ्लक्स बताया, लेकिन तीन सप्ताह बाद कोलोनोस्कोपी से पता चला कि बैक्टीरिया ने छोटी आंत की परत को नुकसान पहुंचाया है, जिससे कई अल्सर और आंतरिक रक्तस्राव हुआ।
इस घटना के बाद, पत्रकार ने छह महीने तक दवाओं और सादा भोजन के साथ इलाज कराया। उनके गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट ने उन्हें विशेष रूप से मानसून में कच्ची मछली से बचने की सलाह दी। यह घटना भारत में कच्ची मछली के सेवन से जुड़े जोखिमों को उजागर करती है।
वर्तमान स्थिति
इस साल अप्रैल में, स्वीडन में एक सुशी रेस्तरां में खाने के बाद लगभग 100 लोगों ने फूड पॉइज़निंग की शिकायत की। भारत में, नवी मुंबई के एक कैफे में ग्यारह लोगों ने स्मोक्ड सैल्मन खाया, और उनमें से प्रत्येक को फूड पॉइज़निंग हो गई। एक ग्राहक प्रीति वेंकटराम ने Google Reviews पर लिखा कि उनके बेटे और पति को अस्पताल में भर्ती कराया गया, और उनके बेटे को चार दिनों तक तेज बुखार, उल्टी, दस्त और निर्जलीकरण के कारण अस्पताल में रहना पड़ा।
भारत में कच्ची मछली खाने की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। मणिपाल हॉस्पिटल बेंगलुरु के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के एसोसिएट कंसल्टेंट डॉ. आशिक वाई एस के अनुसार, कच्ची मछली में नॉन-टाइफाइडल साल्मोनेला, विब्रियो प्रजाति, रोगजनक ई. कोलाई और स्टैफिलोकोकस जैसे बैक्टीरिया हो सकते हैं, जो मछली को लगातार ठंडा या स्वच्छ रूप से संभाले न रखने पर पनपते हैं।
| देश/संस्था | तापमान | अवधि |
|---|---|---|
| अमेरिकी FDA | -20°C | 7 दिन |
| अमेरिकी FDA (ब्लास्ट फ्रीज) | -35°C | कम अवधि |
| यूरोपीय संघ | निर्धारित तापमान | 24 घंटे |
| भारत (FSSAI) | -18°C या उससे कम | क्विक-फ्रीज (अवधि निर्दिष्ट नहीं) |
| मिज़ु इज़ाकाया (मुंबई) | -35°C | निर्दिष्ट नहीं |
| इज़ुमी (मुंबई/गोवा) - सैल्मन | -40°C | निर्दिष्ट नहीं |
| इज़ुमी (मुंबई/गोवा) - टूना | -50°C | निर्दिष्ट नहीं |
प्रभाव
भारत में उच्च परिवेश तापमान, आर्द्रता और भारी मानसूनी बारिश के कारण मछली के परिवहन, भंडारण और तैयारी के दौरान बैक्टीरिया तेजी से पनप सकते हैं, यदि कोल्ड चेन सही न हो। डॉ. आशिक के अनुसार, गर्मी और मानसून में रेफ्रिजरेशन में थोड़ी सी भी रुकावट या दूषित पानी और सतहों के संपर्क में आने से सुरक्षित मछली भी कच्ची परोसे जाने पर उच्च जोखिम वाली सामग्री बन सकती है।
अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के अनुसार, रेस्तरां को परजीवियों को मारने के लिए कच्ची मछली को -20°C पर सात दिनों के लिए या -35°C पर ब्लास्ट फ्रीज करना अनिवार्य है। यूरोपीय संघ भी कच्ची मछली को परोसने से पहले कुछ तापमान पर 24 घंटे के लिए फ्रीज करने का नियम लागू करता है। भारत में, FSSAI ने कच्ची मछली को -18°C या उससे कम तापमान पर क्विक-फ्रीज करने का नियम बनाया है, लेकिन रेस्तरां में परजीवी नाश के लिए फ्रीजिंग तापमान के बारे में कोई दिशानिर्देश नहीं हैं।
भारत में जापानी रेस्तरां तेजी से खुल रहे हैं, लेकिन सभी रेस्तरां कच्ची मछली संभालने के लिए सुसज्जित नहीं हैं। डॉ. आशिक कहते हैं कि कोल्ड चेन में चूक, रसोई में क्रॉस-संदूषण, या अपर्याप्त स्टाफ प्रशिक्षण अक्सर फूड पॉइज़निंग के क्लस्टर के पीछे होते हैं।
भविष्य का परिदृश्य
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि भारत में रेस्तरां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार कच्ची मछली को फ्रीज करने के लिए आवश्यक उपकरणों में निवेश करते हैं और स्टाफ को उचित प्रशिक्षण देते हैं, तो खाद्य विषाक्तता के मामलों में कमी आ सकती है। मुंबई के मिज़ु इज़ाकाया के हेड शेफ लखन जेठानी के अनुसार, वे HACCP प्रणाली का पालन करते हैं, जिसमें विश्वसनीय आपूर्तिकर्ताओं से मछली लाना, सतह का तापमान जांचना, और मछली को -35°C पर फ्रीज करना शामिल है।
यदि FSSAI रेस्तरां के लिए परजीवी नाश के लिए फ्रीजिंग तापमान पर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करता है, तो उद्योग में मानकीकरण हो सकता है। हालांकि, यदि ऐसा नहीं होता है, तो उपभोक्ताओं को सतर्क रहना होगा और केवल उन्हीं रेस्तरां में कच्ची मछली खानी चाहिए जो उच्च स्वच्छता मानकों का पालन करते हैं। डॉ. सुब्रत दास के अनुसार, चूंकि उद्योग में कोई मानकीकरण नहीं है, उपभोक्ताओं को ध्यान रखना चाहिए कि कच्ची मछली संभालना पकी हुई मछली की तुलना में अधिक कठिन काम है।
गर्भवती महिलाओं, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों, उन्नत यकृत रोग वाले रोगियों और हाल ही में जीआई सर्जरी कराने वालों को कच्ची मछली से पूरी तरह बचना चाहिए। यदि कच्ची मछली खाने के बाद बुखार, उल्टी या दस्त होते हैं, तो तुरंत चिकित्सा सलाह लेनी चाहिए।
स्रोत: livemint.com
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विभिन्न संस्थाओं/रेस्तरां में फ्रीजिंग तापमान
Izumi (टूना)-50 °C
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| श्रेणी | तापमान |
|---|---|
| FDA | -20 °C |
| EU | -35 °C |
| FSSAI | -18 °C |
| Mizu | -35 °C |
| Izumi (सैल्मन) | -40 °C |
| Izumi (टूना) | -50 °C |
स्रोत:लेख में उल्लिखित आंकड़ों से स्रोत-समर्थित



